3 साल का सबसे खराब महीना, डॉलर के आगे लड़खड़ाया रुपया, 92 के स्तर पर RBI ने संभाला मोर्चा

3 साल में पहली बार भारतीय करेंसी ने इतनी बड़ी गिरावट देखी है. डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार दबाव में रहा और महीने के आखिरी कारोबारी दिन यह अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया. विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कंपनियों की डॉलर की ज्यादा मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती ने रुपये की हालत कमजोर कर दी.

रुपये में गिरावट जारी Image Credit: money9live.com

Worst month for Rupee: जनवरी का महीना रुपये के लिए बेहद मुश्किल साबित हुआ है. 3 साल में पहली बार भारतीय करेंसी ने इतनी बड़ी गिरावट देखी है. डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार दबाव में रहा और महीने के आखिरी कारोबारी दिन यह अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया. विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कंपनियों की डॉलर की ज्यादा मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती ने रुपये की हालत कमजोर कर दी. हालात इतने गंभीर हो गए कि भारतीय रिजर्व बैंक को बाजार में दखल देना पड़ा ताकि रुपया 92 प्रति डॉलर के अहम स्तर से नीचे ही रुका रहे.

जनवरी में सबसे बड़ी गिरावट

शुक्रवार को देर शाम रुपये में तेज कमजोरी देखने को मिली. इस गिरावट के साथ जनवरी महीना सितंबर 2022 के बाद से रुपये का सबसे खराब महीना बन गया. पूरे महीने में रुपया करीब 210 पैसे टूट गया. कारोबार के दौरान यह डॉलर के मुकाबले 91.99 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक चला गया और अंत में 91.98 पर बंद हुआ. यह पिछले दिन के मुकाबले दो पैसे कमजोर रहा. खबर लिखते वक्त तक रुपये 0.10 फीसदी गिरकर लगभग 91.69 रुपये पर है.

सोर्स: Investing.com

RBI की दखल से रुका बड़ा झटका

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक अगर भारतीय रिजर्व बैंक बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप नहीं करता तो रुपया 92 के स्तर को भी पार कर सकता था. यह स्तर बाजार के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत अहम माना जाता है. RBI की मौजूदगी से फिलहाल रुपये को संभाल लिया गया. फिर भी बाजार से जुड़े लोगों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव बना रह सकता है.

विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी

रुपये पर दबाव की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों का पैसा निकालना है. जनवरी में विदेशी निवेशकों ने करीब 4 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेच दिए. इससे पहले पिछले साल करीब 19 अरब डॉलर की निकासी हो चुकी है. इसके अलावा आयात करने वाली कंपनियां और बड़े कारोबारी भी डॉलर खरीद रहे हैं ताकि भविष्य के जोखिम से बच सकें. सोने और अन्य कीमती धातुओं के आयात के लिए भी डॉलर की मांग बढ़ी है.

डॉलर मजबूत, घरेलू बाजार कमजोर

कारोबार के शुरुआती हिस्से में रुपया थोड़ा संभला हुआ दिखा और करीब 91.95 पर था. लेकिन बाद में घरेलू शेयर बाजारों की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मजबूत होने से यह फिर फिसल गया. वैश्विक बाजार में डॉलर लगभग 0.4 प्रतिशत मजबूत हुआ. इसका सीधा असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ा, जिसमें भारतीय रुपया भी शामिल है.

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