फरवरी की इस तारीख को हड़ताल पर रहेंगे देशभर के बैंककर्मी, नए लेबर कोड्स के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे कर्मचारी संगठन

देशभर के बैंककर्मी फरवरी 2026 को नए लेबर कोड्स के विरोध में हड़ताल पर रहेंगे, जिससे बैंकिंग सेवाओं के ठप रहने की आशंका है. All India Bank Employees' Association समेत कई संगठन इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होंगे. कर्मचारी संगठन लेबर कोड्स, 5-दिवसीय कार्य सप्ताह जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध जता रहे हैं.

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Bank Strike: देश के प्रमुख बैंक कर्मचारी संगठनों ने देशव्यापी आम हड़ताल में शामिल होने का ऐलान किया है. वे 12 फरवरी 2026 को नए लेबर कोड्स के खिलाफ हल्‍ला बोलेंगे. ऑल इंडिया बैंक इम्‍प्‍लॉयीज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक इम्‍प्‍लॉयीज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) ने अपनी यूनिट्स और सदस्यों से 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) के साथ मिलकर हड़ताल में शामिल होने की अपील की है.

हड़ताल का मुख्य कारण सरकार द्वारा नवंबर में अधिसूचित चार नए लेबर कोड्स हैं, जो मौजूदा 29 श्रम कानूनों की जगह लागू किए जाने हैं. बैंक संगठनों का आरोप है कि ये कोड्स कामगारों के हितों के खिलाफ हैं और इससे वर्किंग क्लास को नुकसान होगा. बैंक कर्मचारी संगठन तमाम मुद्दों को लेकर विरोध जता रहे हैं. उनके देशव्‍यापी हड़ताल का असर 12 फरवरी 2026 को दिखेगा. इससे बैंकिंग सेवाएं ठप रहेंगी, जिससे आम ग्राहकों को असुविधा हो सकती है

लेबर कोड्स का विरोध

बैंक यूनियनों की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि नए लेबर कोड्स ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रेशन के लिए कड़े नियम तय करते हैं. इसके साथ ही 300 से कम कर्मचारियों वाले संस्थानों में मालिकों को बिना अनुमति कर्मचारियों को हटाने का अधिकार मिल जाएगा. संगठनों का आरोप है कि ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के नाम पर मल्टीनेशनल कंपनियों और छोटे प्रतिष्ठानों के मालिकों को फायदा पहुंचाया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है.

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5-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक AIBOA के महासचिव एस नागराजन का कहना है कि बैंक कर्मचारी लंबे समय से वर्क-लाइफ बैलेंस और पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसके उलट काम के घंटे बढ़ाने की बात की जा रही है. उनका कहना है कि Reserve Bank of India, मनी एक्सचेंज, लाइफ इंश्‍योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, शेयर बाजार और कमोडिटी एक्सचेंज में पांच दिन का कार्य सप्ताह है, जबकि बैंक कर्मचारी आज भी वैकल्पिक रूप से छह दिन काम करने को मजबूर हैं, इसे बदला जाना चाहिए.

फिक्स्ड-टर्म रोजगार पर सवाल

बैंक संगठनों ने फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट स्कीम का भी विरोध किया है. उनका कहना है कि जब देश में बेरोजगारी दर ऊंची है, तब युवाओं के लिए स्थायी नौकरियां पैदा करने के बजाय ऐसी योजनाएं उनके भविष्य को असुरक्षित बनाती हैं.