रुपये में 2 महीने की सबसे बड़ी गिरावट, डॉलर के मुकाबले 90.87 पर हुआ बंद; एक दिन में 48 पैसे से ज्यादा टूटा
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और ग्लोबल मार्केट में डॉलर की मजबूती के चलते भारतीय रुपया दबाव में रहा. शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 90.87 पर बंद हुआ और करीब दो महीनों की सबसे बड़ी सिंगल डे गिरावट दर्ज की गई. पिछले सत्रों में भी रुपये में कमजोरी बनी हुई थी.
Rupee vs Dollar: विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी और ग्लोबल मार्केट में डॉलर की मजबूती के कारण शुक्रवार को भारतीय रुपये में तेज गिरावट देखने को मिली है. कारोबार के अंत में रुपया 90.87 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले सत्र के 90.30 के मुकाबले बड़ी गिरावट है. यह लगभग दो महीनों में रुपये की सबसे बड़ी सिंगल डे कमजोरी मानी जा रही है. बीते कुछ सत्रों से ही रुपये पर दबाव बना हुआ था. इससे पहले सप्ताह के दौरान बुधवार को रुपया 90.34 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जिसमें 11 पैसे की गिरावट दर्ज की गई थी. उससे पहले वाले सत्र में भी रुपये में 6 पैसे की कमजोरी आई थी.
यानी लगातार कई कारोबारी दिनों से रुपये का ट्रेंड निगेटिव बना हुआ है. गुरुवार को मुंबई नगर निगम चुनाव के कारण फॉरेन एक्सचेंज मार्केट बंद रहे, जिससे शुक्रवार को एक साथ दबाव ज्यादा साफ दिखाई दिया.
विदेशी फंड आउटफ्लो और डॉलर की मजबूती का असर
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक रुपये पर सबसे बड़ा दबाव लगातार हो रही विदेशी फंड आउटफ्लो की वजह से है. ग्लोबल इन्वेस्टर्स उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं. इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर में मजबूती बनी हुई है, जिससे एशियन और अन्य इमर्जिंग मार्केट करेंसी पर दबाव बढ़ा है. मजबूत डॉलर आमतौर पर रुपये जैसी करेंसी को कमजोर करता है और मौजूदा हालात में यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है.
कैपिटल मार्केट की कमजोरी ने बढ़ाया दबाव
करेंसी मार्केट पर असर डालने वाला एक अहम फैक्टर घरेलू कैपिटल मार्केट की कमजोरी भी रही. शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव ने रुपये की चाल को और कमजोर किया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक इक्विटी मार्केट में स्थिरता नहीं लौटती और विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत नहीं होता, तब तक रुपये पर दबाव बना रह सकता है.
आगे भी रह सकता है उतार-चढ़ाव
LKP Securities के वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, रुपये में शुक्रवार को 48 पैसे से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. उन्होंने कहा कि कैपिटल मार्केट की कमजोरी और इंडिया–यूएस ट्रेड डील को लेकर जारी अनिश्चितता ने करेंसी पर दबाव बनाए रखा.
जतिन त्रिवेदी का कहना है कि निकट अवधि में रुपया 89.75 से 91.45 के ब्रॉड रेंज में ट्रेड कर सकता है. बाजार की नजर अब महीने के आखिर में आने वाले फेडरल रिजर्व की पॉलिसी आउटलुक पर टिकी हुई है, क्योंकि ब्याज दरों को लेकर किसी भी संकेत का सीधा असर डॉलर और रुपये की चाल पर पड़ेगा.
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