बेडरूम तक पहुंचा ईरान- इजरायल युद्ध का असर, महंगे हो सकते हैं कंडोम, जानें कहां अटकी सप्लाई
पश्चिम एशिया युद्ध के चलते एनर्जी संकट गहरा गया है, जिसका असर अब भारत के कंडोम इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है. पेट्रोकेमिकल सप्लाई बाधित होने से सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया जैसे कच्चे माल महंगे हो गए हैं. इससे प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ रही है. 8000 करोड़ रुपये के इस सेक्टर पर दबाव बढ़ा है और बड़ी कंपनियां भी प्रभावित हैं.
Condom Industry India: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने पूरी दुनिया में एनर्जी संकट को बढ़ा दिया है. जिससे पेट्रोल, डीजल और LPG की सप्लाई पर असर पड़ा है. भारत जैसे देश, जो अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, उन्हें ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. इस संकट का असर ट्रांसपोर्ट से लेकर आम लोगों की रसोई तक पहुंच चुका है.
युद्ध को एक महीने से ज्यादा हो चुका है और अब इसका असर अन्य सेक्टर पर भी दिखने लगा है. स्थिति ऐसी हो गई है कि इसका प्रभाव लोगों के बेडरूम तक पहुंच गया है. दरअसल कंडोम बनाने वाली कंपनियां भी इस संकट से प्रभावित हो रही हैं और उनका प्रोडक्शन महंगा हो सकता है. आइए जानते हैं पूरा मामला.
कैसे प्रभावित हो रही है इंडस्ट्री
देश में इस इंडस्ट्री का आकार करीब 8000 करोड़ रुपये है और हर साल लगभग 400 करोड़ से ज्यादा यूनिट का प्रोडक्शन होता है. युद्ध के चलते पेट्रोकेमिकल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे इस सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है. कच्चे माल की उपलब्धता और कीमत दोनों ही चुनौती बन गए हैं.
क्या है दबाव की वजह
इस इंडस्ट्री के लिए दो प्रमुख कच्चे माल अहम हैं, जिन पर इस समय दबाव बना हुआ है. सिलिकॉन ऑयल, जो लुब्रिकेंट के रूप में इस्तेमाल होता है, उसकी भारी कमी हो रही है. वहीं अमोनिया, जो लेटेक्स को स्थिर रखने के लिए जरूरी है, उसकी कीमत में 40 से 50 फीसदी तक बढ़ोतरी की आशंका है. इसके अलावा PVC और एल्यूमिनियम फॉयल जैसे पैकेजिंग मटेरियल भी महंगे हो रहे हैं, जिससे कंपनियों की लागत बढ़ गई है.
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पूरी इंडस्ट्री पर असर
इस स्थिति का असर बड़े प्लेयर्स पर भी पड़ रहा है. HLL Lifecare, Mankind Pharma और Cupid जैसी कंपनियां इस दबाव को महसूस कर रही हैं. इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि पेट्रोकेमिकल से जुड़े लगभग सभी प्रोडक्ट प्रभावित हो रहे हैं और इसका असर कितना गहरा होगा, इसका आकलन अभी किया जा रहा है. Mankind Pharma के शेयर 1 महीने में 7 फीसदी तक टूटे हैं जबकि Cupid के शेयरों में 1 महीने में 11 फीसदी की तेजी देखने को मिली है.
सरकार भी इस स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही है. मनी कंट्रोल कीरिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को मिलने वाले रिसोर्स में करीब 35 फीसदी तक कटौती हो सकती है, जिससे सप्लाई और अधिक सीमित हो सकती है. इसका असर सिर्फ अर्थव्यवस्था पर ही नहीं बल्कि फैमिली प्लानिंग पर भी पड़ेगा.
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