LPG में कौन-सी 2 गैस होती हैं यूज, जिन पर सरकार ने लगा दी इमरजेंसी? जानें आप पर क्या होगा असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन पर मंडराते खतरे के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने रिफाइनरी कंपनियों को आदेश दिया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल केवल LPG बनाने के लिए करें. इस फैसले का असर पेट्रोकेमिकल कंपनियों के उत्पादन और मुनाफे पर पड़ सकता है, लेकिन इसका मकसद देश के करोड़ों उपभोक्ताओं तक गैस सिलेंडर की सप्लाई बिना रुकावट जारी रखना है.
LPG Gas and Indian Govt Emergency: मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और एनर्जी सप्लाई पर मंडराते खतरे के बीच भारत सरकार ने बड़ा एहतियाती कदम उठाया है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को आदेश दिया है कि वे रसोई गैस यानी LPG के प्रोडक्शन को अधिकतम स्तर तक बढ़ाएं. इसके लिए खास तौर पर दो गैसों- प्रोपेन (Propane) और ब्यूटेन (Butane) का इस्तेमाल केवल LPG बनाने के लिए करने को कहा गया है. इसका मतलब यह है कि फिलहाल इन गैसों का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल या दूसरे इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन के लिए नहीं किया जाएगा.
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल तनाव के कारण तेल और गैस की सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने की आशंका है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG इंपोर्टर देश है और घरेलू खपत का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है. ऐसे में अगर मिडिल ईस्ट से सप्लाई प्रभावित होती है तो देश में रसोई गैस की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है. इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने गुरुवार, 5 मार्च देर रात यह आदेश जारी किया.
LPG आखिर बनती कैसे है?
LPG यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस असल में दो मुख्य गैसों का मिक्सचर होती है, प्रोपेन और ब्यूटेन. इन दोनों गैसों को रिफाइनरी या गैस प्रोसेसिंग प्लांट में प्रोसेस करके तरल रूप में सिलेंडरों में भरा जाता है. यही गैस घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर में पहुंचती है. भारत में करीब 33 करोड़ से ज्यादा एक्टिव LPG ग्राहक हैं, इसलिए इसकी सप्लाई में जरा-सी भी रुकावट बड़े स्तर पर असर डाल सकती है. सरकार के आदेश के मुताबिक अब रिफाइनरी कंपनियां अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल प्राथमिकता के आधार पर LPG प्रोडक्शन में करेंगी. साथ ही इन गैसों की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) को दी जाएगी ताकि घरेलू उपभोक्ताओं तक सिलेंडर की सप्लाई बिना बाधा जारी रह सके.
मिडिल ईस्ट संकट क्यों बना चिंता का कारण
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मिडिल ईस्ट का समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है. यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा ट्रांजिट रूट्स में से एक है, जहां से कतर, यूएई और अन्य खाड़ी देश तेल और गैस निर्यात करते हैं. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगाता है. मौजूदा संघर्ष के कारण जहाजों की आवाजाही कम हो गई है और सप्लाई में बाधा की आशंका बढ़ गई है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल देश में तेल और गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और भारत सिर्फ एक ही सप्लाई रूट पर निर्भर नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऊर्जा आयात के स्रोतों को भी विविध बनाया है. उदाहरण के तौर पर रूस से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ा है. 2022 में जहां भारत अपनी जरूरत का सिर्फ 0.2 फीसदी तेल रूस से खरीदता था, वहीं अब यह हिस्सा बढ़कर करीब 20 फीसदी तक पहुंच गया है.
प्राइवेट कंपनियों पर क्या पड़ेगा असर
सरकार के इस फैसले का असर निजी रिफाइनरी कंपनियों, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज, पर भी पड़ सकता है. प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ LPG प्रोडक्शन में करने से कुछ पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स का प्रोडक्शन कम हो सकता है. उदाहरण के लिए अल्काइलेट्स, जो पेट्रोल की क्वालिटी सुधारने के लिए इस्तेमाल होते हैं, उनका प्रोडक्शन घट सकता है. पिछले साल रिलायंस औसतन हर महीने चार अल्काइलेट्स कार्गो एक्सपोर्ट करती थी. लेकिन अब प्रोपेन और ब्यूटेन के डायवर्जन से इन उत्पादों की उपलब्धता कम हो सकती है. सरकार ने रिफाइनरी कंपनियों को यह भी स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल इन गैसों का इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन के लिए नहीं किया जाए.
कंपनियों के मुनाफे पर असर की आशंका
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फैसले से पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है. दरअसल पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइलेट्स जैसे प्रोडक्ट बाजार में LPG के मुकाबले ज्यादा कीमत पर बिकते हैं. इसलिए अगर प्रोपेन और ब्यूटेन को इन उत्पादों के बजाय LPG बनाने में लगाया जाएगा तो कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है. हालांकि सरकार की प्राथमिकता फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को बिना रुकावट गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना है. यही वजह है कि उत्पादन और सप्लाई को सीधे घरेलू जरूरतों की ओर मोड़ दिया गया है.
आम उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर
सरकार का दावा है कि यह कदम संभावित संकट को पहले से रोकने के लिए उठाया गया है, ताकि रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित न हो. अगर यह कदम नहीं उठाया जाता और सप्लाई चेन में रुकावट आती, तो देश में LPG की कमी और कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती थी. फिलहाल सरकार का कहना है कि देश में गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और अतिरिक्त सप्लाई के विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं. लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा खींचता है और ऊर्जा सप्लाई बाधित होती है, तो आने वाले महीनों में वैश्विक गैस बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.
Latest Stories
घरेलू और कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडर हुआ महंगा, दिल्ली में 60 रुपये बढ़ी LPG की कीमत, जानें- अब कितने में मिलेगा
दुबई में बचा केवल 10 दिन का फ्रेश फूड स्टॉक, इस शख्स ने दी चेतावनी; क्या खाने-पीने के पड़ जाएंगे लाले!
$90 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल, $100 का खतरा कितना बड़ा? जानें भारत के लिए क्यों है ये बुरी खबर, कहां पड़ेगा ज्यादा असर
