कॉपर क्यों बनता जा रहा है ‘न्यू गोल्ड’, 2026 में रैली या रहेगा क्रैश का दौर, इन 5 शेयरों पर रखें पैनी नजर
एक इंडस्ट्रियल मेटल अब रणनीतिक संपत्ति के तौर पर देखा जाने लगा है. वैश्विक एनर्जी ट्रांजिशन, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी जरूरतों ने इसकी अहमियत बढ़ा दी है, जबकि बड़े ब्रोकरेज इसके भविष्य को लेकर अहम संकेत दे रहे हैं. ऐसे में रिपोर्ट में जानें की किन शेयरों पर आपको नजर बनाए रखना फायदेमंद साबित हो सकता है.
वैश्विक कमोडिटी बाजार में एक मेटल है, जो अब सिर्फ फैक्ट्री, तार या मशीनों तक सीमित नहीं रह गई है. इलेक्ट्रिक गाड़ियों से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर्स और ग्रीन एनर्जी तक, हर जगह इसकी जरूरत बढ़ती जा रही है. यही वजह है कि निवेशक और एनालिस्ट अब कॉपर को सिर्फ एक इंडस्ट्रियल मेटल नहीं, बल्कि “न्यू गोल्ड” कहने लगे हैं. सवाल यह है कि आखिर कॉपर को सोने जैसी अहमियत क्यों मिलने लगी है, आगे इसकी कीमतों को लेकर क्या अनुमान हैं और भारत में कौन-सी कंपनियां इस ट्रेंड से फायदा उठा सकती हैं.
कॉपर को “न्यू गोल्ड” क्यों कहा जा रहा है?
कॉपर की मांग अब ट्रेडिशनल कंस्ट्रक्शन या मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है. एनर्जी ट्रांजिशन में इसकी भूमिका बेहद अहम हो गई है. एक इलेक्ट्रिक वाहन में पारंपरिक कार के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा कॉपर लगता है. इसी तरह विंड टर्बाइन, सोलर पैनल और पावर ग्रिड के विस्तार में कॉपर अनिवार्य हो चुका है.
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी कॉपर की मांग को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है. डेटा सेंटर्स, 5G नेटवर्क और AI-बेस्ड सिस्टम्स में हाई-क्वालिटी कॉपर वायरिंग की जरूरत होती है. यही वजह है कि कॉपर को अब “डॉ. कॉपर” की पुरानी पहचान से आगे देखा जा रहा है, जो सिर्फ आर्थिक सेहत नहीं बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी की नब्ज भी बताता है.
सप्लाई की बात करें तो नए कॉपर माइनिंग प्रोजेक्ट्स शुरू करना बेहद महंगा और समय लेने वाला है. कई बड़े देशों में पर्यावरण नियम सख्त होते जा रहे हैं. इससे कॉपर की उपलब्धता सीमित होती दिख रही है, जो इसे गोल्ड जैसी दुर्लभता के करीब ले जाती है.
द इकोनॉमिस्ट और कॉपर की नई पहचान
द इकोनॉमिस्ट ने 2020 में यह बात उठाई थी कि एक समय पर कॉपर और गोल्ड की कीमतें एक साथ बढ़ रही थी, जबकि आमतौर पर दोनों की चाल उलटी होती है. यह संकेत था कि कॉपर पर दबाव सिर्फ आर्थिक चक्र का नहीं, बल्कि स्ट्रैटेजिक जरूरतों का भी है. द इकोनॉमिस्ट ने कॉपर को “एनर्जी ट्रांजिशन का मिसिंग इंग्रीडिएंट” कहा था, जो आज और ज्यादा प्रासंगिक लगता है.
गोल्डमैन सैक्स का कॉपर प्राइस आउटलुक
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 की शुरुआत में कॉपर की कीमतें 11,771 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं. इसकी वजह ब्याज दरों में नरमी, डॉलर की कमजोरी, चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद और AI व पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ता निवेश रहा.
हालांकि 2026 को लेकर ब्रोकरेज थोड़ा संतुलित नजरिया रखता है. रिपोर्ट कहती है कि 2026 में कॉपर की कीमतें लगातार 11,000 डॉलर प्रति टन से ऊपर टिके रहना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर सप्लाई सरप्लस बना रह सकता है.

गोल्डमैन का अनुमान है कि 2026 में लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर की कीमतें 10,000 से 11,000 डॉलर प्रति टन के दायरे में रह सकती हैं. 2026 की पहली छमाही में औसत कीमत करीब 10,710 डॉलर प्रति टन रहने की उम्मीद है. यानी तेज गिरावट की आशंका कम है और बाजार में एक स्थिर संतुलन बना रह सकता है.
भारत की वो 5 कॉपर कंपनियां, जो फोकस में रहनी चाहिए
कॉपर के इस लॉन्गटर्म के ट्रेंड का फायदा भारतीय कंपनियों को भी मिल सकता है. कुछ कंपनियां ऐसी हैं, जिनके फंडामेंटल और बिजनेस मॉडल इस सेक्टर से सीधे जुड़े हैं. कंपनियों का ये डेटा स्क्रीनर के साइट पर दिए जानकारी के मुताबिक है.
Hindustan Copper
यह भारत की इकलौती सरकारी और इंटीग्रेटेड कॉपर माइनिंग कंपनी है. शेयर का मौजूदा भाव करीब ₹378.55 है. कंपनी का P/E 63.86 है, जो ऊंचा जरूर है लेकिन ग्रोथ उम्मीदों को दिखाता है. इसका मार्केट कैप करीब ₹36,600 करोड़ है, जो इसे इस लिस्ट की सबसे बड़ी कंपनी बनाता है. तिमाही आधार पर कंपनी का मुनाफा ₹186 करोड़ रहा है और ROCE 23.75% है, जो ऑपरेशनल मजबूती को दर्शाता है. एनर्जी ट्रांजिशन और पावर सेक्टर में बढ़ती मांग से इस कंपनी को सीधा फायदा मिल सकता है.
Onix Solar
ऑनिक्स सोलर का शेयर ₹302.85 के आसपास ट्रेड कर रहा है. कंपनी का P/E बहुत ऊंचा 431 के करीब है, जो बताता है कि इसमें जोखिम भी ज्यादा है. इसका मार्केट कैप करीब ₹620 करोड़ है. हालिया तिमाही में बिक्री में जबरदस्त उछाल दिखा है, लेकिन मुनाफा अभी निगेटिव है. इसके बावजूद ROCE 32% से ज्यादा है, जो संकेत देता है कि बिजनेस मॉडल में संभावनाएं हैं, खासकर सोलर और कॉपर-लिंक्ड डिमांड के चलते.
- Bhagyanagar Ind
यह कंपनी कॉपर ट्यूब्स और प्रोडक्ट्स में मजबूत पकड़ रखती है. शेयर का भाव करीब ₹136 है. इसका P/E 15.87 है, जो इसे तुलनात्मक रूप से सस्ता बनाता है. मार्केट कैप करीब ₹435 करोड़ है. तिमाही मुनाफा ₹11.27 करोड़ रहा है और बिक्री में 40% से ज्यादा की ग्रोथ दिखी है. हालांकि ROCE 8.28% है, जो बताता है कि मार्जिन और कैपिटल एफिशिएंसी में अभी सुधार की गुंजाइश है.
Mardia Samyoung
यह एक स्मॉल-कैप कंपनी है, जिसका शेयर ₹116.35 के आसपास है. कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹81 करोड़ है. मुनाफा छोटा है, लेकिन तिमाही आधार पर ग्रोथ दिखती है. इसकी सबसे बड़ी ताकत ROCE 22.59% है, जो स्मॉल-कैप सेगमेंट में मजबूत मानी जाती है. यह स्टॉक ज्यादा जोखिम पसंद करने वाले निवेशकों के लिए हो सकता है.
- N D Metal Inds.
एन डी मेटल का शेयर करीब ₹87 पर है और इसका मार्केट कैप सिर्फ ₹21.58 करोड़ है. हालिया तिमाही में कंपनी का मुनाफा निगेटिव रहा और ROCE 6.63% है. यह कंपनी कॉपर वैल्यू चेन से जुड़ी जरूर है, लेकिन फिलहाल इसके फंडामेंटल कमजोर दिखते हैं. इसमें निवेश हाई-रिस्क कैटेगरी में आता है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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