वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था, गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में संविधान के मूल्यों, युवा शक्ति और तेज आर्थिक विकास पर जोर दिया. उन्होंने भारत को विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बताते हुए 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की निर्णायक भूमिका की बात कही.
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में संविधान की भावना, युवा शक्ति और देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को लेकर अहम बातें कहीं. उन्होंने कहा कि 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपने संविधान को पूरी तरह लागू किया और उसी दिन देश एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अस्तित्व में आया. राष्ट्रपति ने संविधान को विश्व इतिहास में सबसे बड़े गणराज्य का आधार-ग्रंथ बताते हुए कहा कि इसमें निहित न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्श ही हमारे गणतंत्र की पहचान हैं.
देश की युवा आबादी को भारत की सबसे बड़ी पूंजी
उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने देश की युवा आबादी को भारत की सबसे बड़ी पूंजी बताया. उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी युवा जनसंख्या भारत में है और यह देश के लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि युवा उद्यमी, खिलाड़ी, वैज्ञानिक और प्रोफेशनल्स देश में नई ऊर्जा का संचार कर रहे हैं और वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान मजबूत कर रहे हैं. बड़ी संख्या में युवा स्व-रोजगार के माध्यम से सफलता के प्रभावशाली उदाहरण पेश कर रहे हैं. राष्ट्रपति ने कहा कि युवा ही भारत की विकास यात्रा के ध्वजवाहक हैं.
उन्होंने ‘मेरा युवा भारत’ (MY भारत) पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह टेक्नोलॉजी आधारित, अनुभव-आधारित शिक्षा और अवसर मंच है जो युवाओं को नेतृत्व, कौशल विकास और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों से जोड़ता है. उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप इकोसिस्टम की सफलता का बड़ा श्रेय युवा उद्यमियों को जाता है. युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं पर केंद्रित नीतियों और कार्यक्रमों से देश के विकास को नई गति मिल रही है. राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवा शक्ति की प्रमुख भूमिका होगी.
विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है भारत
आर्थिक मोर्चे पर राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत आज विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश में निरंतर आर्थिक विकास जारी है. उन्होंने कहा कि भारत निकट भविष्य में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि विश्व-स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के जरिए देश की आर्थिक संरचना का उच्च स्तर पर पुनर्निर्माण किया जा रहा है. आत्मनिर्भरता और स्वदेशी को विकास का मूलमंत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि यही भारत की आर्थिक नियति तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
जीएसटी को लेकर कही यह बात
राष्ट्रपति ने जीएसटी को स्वतंत्रता के बाद देश के आर्थिक एकीकरण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि जीएसटी से ‘वन नेशन, वन मार्केट’ की व्यवस्था स्थापित हुई है और हाल के सुधारों से यह प्रणाली और अधिक प्रभावी बनेगी. इसके साथ ही उन्होंने श्रम सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि चार लेबर कोड जारी किए गए हैं, जिससे श्रमिकों को लाभ होगा और उद्योगों के विकास को भी गति मिलेगी.
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