स्टील सेक्टर में आने वाली है IPO की लहर, अगले 10 महीनों में ₹7,000 करोड़ तक जुटाने की योजना में हैं ये कंपनियां
देश के स्टील सेक्टर में IPO की नई लहर आने वाली है. अगले 8-10 महीनों में कम से कम 10 कंपनियां बाजार से 5,000-7,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं. बढ़ती मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और सरकारी नीतियों के समर्थन से कंपनियां क्षमता विस्तार, कर्ज घटाने और बैलेंस शीट मजबूत करने पर फोकस कर रही हैं.
देश का स्टील सेक्टर एक बार फिर प्राइमरी मार्केट में हलचल मचाने को तैयार है. अगले आठ से दस महीनों के दौरान कम से कम 10 स्टील और स्टील से जुड़ी कंपनियां प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के जरिए करीब ₹5,000 से ₹7,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही हैं. निवेश बैंकरों के अनुसार, कई कंपनियां ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर चुकी हैं जबकि कुछ तैयारी के अंतिम चरण में हैं. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टील सेक्टर अब केवल कमोडिटी कारोबार नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी विकास से जुड़ा एक लॉन्ग टर्म ग्रोथ प्ले बनता जा रहा है.
कौन सी कंपनियां लाइनअप में
IPO लाने वाली प्रमुख कंपनियों में स्टील इंफ्रा सॉल्यूशंस, जर्मन ग्रीन स्टील एंड पावर, राजपूताना स्टेनलेस, बॉम्बे कोटेड स्टील, ए-वन स्टील्स इंडिया, जिंदल सुप्रीम (इंडिया), मधुर आयरन एंड स्टील और सिनेर्जी एडवांस्ड मेटल्स शामिल हैं.
| क्रमांक | कंपनी का नाम |
|---|---|
| 1 | स्टील इंफ्रा सॉल्यूशंस कंपनी लिमिटेड |
| 2 | जर्मन ग्रीन स्टील एंड पावर लिमिटेड |
| 3 | राजपूताना स्टेनलेस लिमिटेड |
| 4 | बॉम्बे कोटेड स्टील लिमिटेड |
| 5 | ए-वन स्टील्स इंडिया लिमिटेड |
| 6 | जिंदल सुप्रीम (इंडिया) लिमिटेड |
| 7 | मधुर आयरन एंड स्टील लिमिटेड |
| 8 | सिनेर्जी एडवांस्ड मेटल्स लिमिटेड |
क्यों स्टील की मांग बढ़ सकती है
विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे सड़क, रेलवे, पोर्ट और मेट्रो में बढ़ते निवेश से स्टील की मांग में तेजी आने की उम्मीद है. सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना और कैपेक्स पर जोर ने भी इंडस्ट्री को सहारा दिया है. अनुमान है कि कुल स्टील मांग का लगभग 25-30% हिस्सा सरकारी परियोजनाओं से जुड़ा है.
क्यों जुटाएंगी फंड
आईपीओ से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल नई ग्रीनफील्ड लाइन, गैल्वनाइजिंग यूनिट, कलर-कोटिंग फैसिलिटी और स्टेनलेस स्टील क्षमता विस्तार में किया जाएगा. इसके अलावा कंपनियां अपने बैलेंस शीट को मजबूत करने और कर्ज बोझ घटाने पर भी ध्यान दे रही हैं. पिछले एक दशक में डीलिवरेजिंग के बाद अब अनुकूल इक्विटी बाजार का लाभ उठाकर फाइनेंशियल स्थिति सुधारने की रणनीति अपनाई जा रही है.
हालांकि, स्टील इंडस्ट्री में कीमतों की अस्थिरता, कोकिंग कोल की लागत, आयात प्रतिस्पर्धा और वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव जैसे जोखिम भी बने हुए हैं. ऐसे में जिन कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत, पूंजी आवंटन अनुशासित और निर्यात प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी वे निवेशकों का ज्यादा भरोसा जीत सकेंगी.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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