सिल्वर ETF में भारी गिरावट, 20 फीसदी तक टूटे ये फंड; जानें- किसमें आई सबसे अधिक बिकवाली

Silver ETF Today: एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को अगला फेड चेयरमैन चुना, तो चांदी की कीमतें गिरने लगीं. निवेशकों ने इस पर नेगेटिव रिएक्शन दिया क्योंकि वॉर्श को पिछले लीडर्स की तुलना में इंटरेस्ट-रेट पॉलिसी पर ज्यादा सख्त माना जाता है

सिल्वर ईटीएफ में भारी गिरावट. Image Credit: @Canva/Money9live

Silver ETF Today: चांदी और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETFs) में सोमवार को भी गिरावट जारी रही, चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट के बीच सोमवार के कारोबार में ये 20 फीसदी तक गिर गए. MCX पर 5 मार्च की डिलीवरी के लिए चांदी का फ्यूचर रेट दोपहर 1:30 बजे 12.51 फीसदी टूटकर 2,31,600 रुपये पर आ गई. यानी चांदी की कीमतों में करीब 34 हजार रुपये प्रति किलो की गिरावट आई. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को अगला फेड चेयरमैन चुना, तो चांदी की कीमतें गिरने लगीं. निवेशकों ने इस पर नेगेटिव रिएक्शन दिया क्योंकि वॉर्श को पिछले लीडर्स की तुलना में इंटरेस्ट-रेट पॉलिसी पर ज्यादा सख्त माना जाता है.

चांदी की कीमतों में आई गिरावट का असर ETF पर भी दिखा. दोपहर 1.30 बजे कई पॉपुलर ईटीएफ फंड में भारी गिरावट दर्ज की गई.

किस फंड में आई कितनी गिरावट?

निवेश का आसान जरिया

गोल्ड ETF और सिल्वर ETF उन लोगों के लिए निवेश का आसान जरिया बन गए, जो एक साल पहले शुरू हुई तेजी में हिस्सा लेना चाहते हैं. ग्लोबल निवेशक सतर्क रहे, लेकिन सोने और चांदी की कीमतों को लेकर आशावादी बने रहे, क्योंकि भू-राजनीतिक और आर्थिक माहौल अस्थिर बना हुआ है. कीमती धातुओं में बिकवाली नए फेडरल रिजर्व गवर्नर केविन वॉर्श की नियुक्ति से शुरू हुई, जिनके बारे में उम्मीद है कि वे सख्त रुख अपनाएंगे और फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट को कम करने पर ज्यादा ध्यान देंगे.

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कीमतों में गिरावट के पीछे के फैक्टर

इसके अलावा, मेटल्स की कीमतों में जबरदस्त तेजी के कारण न्यूयॉर्क और लंदन के एक्सचेंजों को कैश मार्जिन की जरूरतों को 30% से 35% तक बढ़ाना पड़ा. जिसके चलते बड़े पैमाने पर पोजीशन खत्म की गईं और कीमतें गिर गईं. एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि कीमती मेटल्स की कीमतों का ठंडा होना इसके लॉन्ग-टर्म बुल रन के लिए एक जरूरी कदम था, क्योंकि चांदी की सप्लाई में कमी और डॉलर की घटती वैल्यू जैसे स्ट्रक्चरल कारण अभी भी बने हुए हैं.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.