Gold-Silver क्रैश के बीच तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट Brent और WTI क्रूड 5% तक लुढ़के; जानें क्या हैं वजह

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक ही दिन में करीब 5 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत माने जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों को लगा कि फिलहाल किसी सैन्य टकराव की आशंका घट रही है.

तेल Image Credit: Getty image

Oil Price Crash: तेल की कीमतें जब अचानक गिरती हैं तो उसका असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता. शेयर बाजार, महंगाई, ट्रांसपोर्ट और सरकारों की नीति तक उस पर नजर टिक जाती है. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक ही दिन में करीब 5 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत माने जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों को लगा कि फिलहाल किसी सैन्य टकराव की आशंका घट रही है. इसी भरोसे ने बाजार में बिकवाली बढ़ा दी और कीमतें कई महीनों के निचले स्तर की ओर फिसल गईं.

तेल की कीमतों में अचानक तेज गिरावट

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड में भारी गिरावट देखी गई. ब्रेंट क्रूड करीब 5.08 फीसदी टूटकर 65.80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया. वहीं अमेरिकी WTI लगभग 5.31 फीसदी गिरकर 61.75 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला गया. यह बीते छह महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है. ये दोनों बेंचमार्क पिछले कुछ हफ्तों में कई महीने के ऊंचे स्तर तक पहुंच गए थे. लेकिन जैसे ही Geopolitical तनाव कम होने की खबर आई, कीमतें तेजी से नीचे आ गईं.

सोर्स: Investing.com

पिछले 5 साल में क्रूड ऑयल की स्थिति

DurationWTI क्रूड ऑयल (%)ब्रेंट क्रूड ऑयल (%)
1 डे-5.32-5.09
1 वीक1.850.32
1 महीना7.738.31
3 महीना1.261.12
1 साल-14.86-14.28
5 साल13.0514.51

अमेरिका और ईरान के बयान बने वजह

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान वॉशिंगटन के साथ बातचीत को लेकर गंभीर है. इसके कुछ ही घंटे पहले ईरान के एक सिनियर ऑफिसर ने भी संकेत दिए थे कि बातचीत की तैयारी चल रही है. इसके साथ ही यह खबर भी सामने आई कि ईरान की नौसेना फिलहाल होर्मुज Strait में कोई लाइव फायर अभ्यास नहीं करने वाली है. इन संकेतों को बाजार ने तनाव घटने के रूप में देखा. एक्सपर्ट का कहना है कि इससे युद्ध या टकराव का डर कम हुआ और तेल पर चढ़ा हुआ जोखिम प्रीमियम घट गया.

डॉलर की मजबूती ने भी दबाव डाला

एक्सपर्ट के मुताबिक अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भी तेल की कीमतों पर असर पड़ा. जब डॉलर मजबूत होता है तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए तेल महंगा पड़ता है. इससे मांग पर दबाव आता है और कीमतें नीचे जाती हैं. जनवरी के दौरान ईरान को लेकर बनी चिंताओं ने तेल को सहारा दिया था. लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं.

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