जापान बनेगा अडानी ग्रुप का फंडिंग सेंटर! इस सेक्टर में आएगी मजबूती, 2 अरब डॉलर जुटाने की तैयारी में समूह

अडानी ग्रुप जापान के डेट मार्केट में एंट्री की तैयारी कर रहा है और येन में करीब 2 अरब डॉलर जुटाने की योजना बना रहा है. इस फंडिंग का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा, जिसमें 20 से 30 साल की लंबी अवधि के कर्ज पर फोकस रहेगा. जानें पूरी डिटेल्स.

अडानी समूह. Image Credit: Getty image

Adani Group and Japan Debt Market: अडानी ग्रुप अब जापान के डेट मार्केट में कदम रखने की तैयारी कर रहा है. समूह की योजना जापानी मुद्रा येन में करीब 2 अरब डॉलर (लगभग 16,000 करोड़ रुपये) जुटाने की है. इसके लिए अडानी समूह जापान की बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स से लंबी अवधि का फंड लेने पर फोकस कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फंडिंग का इस्तेमाल अडानी समूह के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को मजबूत करने में किया जाएगा. इसकी अवधि काफी लंबी होगी, जो लगभग 20 से 30 साल के बीच रहने की उम्मीद है.

इन कंपनियों के जरिए जुटेगा पैसा

बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह फंडिंग अगले कुछ महीनों में जुटाई जा सकती है. इसके लिए अडानी समूह की तीन प्रमुख कंपनियां आगे लाई जाएंगी:

  • Adani Ports and Special Economic Zone
  • Adani Green Energy
  • Adani Energy Solutions

जापान की रेटिंग एजेंसी ने दी अच्छी रेटिंग

हाल ही में जापान की बड़ी Japan Credit Rating Agency (JCR) ने इन तीनों कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग शुरू की है. अडानी पोर्ट्स को ‘A-’ रेटिंग दी गई है, जो भारत की सॉवरेन रेटिंग से भी ऊपर मानी जाती है. वहीं अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस को ‘BBB+’ रेटिंग मिली है, जो भारत की सॉवरेन रेटिंग के बराबर है. इस बेहतर रेटिंग से अडानी समूह के लिए जापान में फंडिंग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है.

जापानी बैंकों से पहले से जुड़ा है समूह

अडानी समूह पहले से ही जापान के तीन बड़े बैंकों के साथ काम कर रहा है. इसमें- MUFG, Sumitomo Mitsui Financial Group और Mizuho Financial Group शामिल हैं. अब नई रेटिंग और लंबी अवधि के कर्ज विकल्पों से समूह को और मजबूत फंडिंग सपोर्ट मिलने की उम्मीद है.

जापान से फंडिंग बढ़ाने की रणनीति

फिलहाल अडानी समूह के कुल 32 अरब डॉलर के कर्ज में जापान की हिस्सेदारी सिर्फ 1.5 फीसदी है. लेकिन समूह की योजना इसे तेजी से बढ़ाने की है. ग्रुप चाहता है कि अगले 2 साल में 5 फीसदी और 2030 तक 10 फीसदी तक पहुंच जाए.

जापान क्यों बना पसंदीदा बाजार?

रिपोर्ट की मानें तो जापानी डेट मार्केट में जाने की तीन बड़ी वजहें हैं:

  • लंबी अवधि का कर्ज (20–30 साल)
  • कम ब्याज दर
  • कर्ज जोखिम को अलग-अलग बाजारों में बांटना

रिपोर्ट में एक सोर्स के हवाले से लिखा है कि “हम ऐसे बाजारों से कर्ज लेना चाहते हैं जहां बहुत लंबी अवधि की फंडिंग उपलब्ध हो. जापान इस मामले में बेहद मजबूत बाजार है.” जापान अमेरिका के बाद उन गिने-चुने देशों में शामिल है, जहां 20 से 30 साल की मैच्योरिटी वाले कर्ज की मांग और उपलब्धता दोनों है. इससे इतर, ग्रुप की बात करें तो पिछले तीन वर्षों में अडानी समूह ने अपने कर्ज की औसत अवधि को 6 साल से बढ़ाकर 7 साल कर लिया है. यह कदम समूह की फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी को और स्थिर बनाता है. आने वाले वर्षों में अडानी समूह का निवेश काफी बड़ा रहने वाला है:

  • FY30 तक 100 अरब डॉलर का कैपेक्स अनुमान
  • मौजूदा वित्त वर्ष में ही 17 अरब डॉलर का निवेश

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