5 साल में 2000% उछले शेयर, 105 फीसदी CAGR रिटर्न, मिसाइल और ड्रोन नहीं बल्कि उनका दिमाग बनाती है यह डिफेंस कंपनी
Apollo Micro Systems हथियार नहीं बनाती, बल्कि उन्हें सोचने और फैसला लेने की क्षमता देती है. कंपनी के embedded electronics और control systems मिसाइल, ड्रोन और रडार को real time में काम करने लायक बनाते हैं. यही अदृश्य दिमाग डिफेंस सिस्टम को सटीक और भरोसेमंद बनाता है.
Apollo Micro Systems: जब भी डिफेंस सेक्टर की बात होती है तो आंखों के सामने मिसाइल, फाइटर जेट, युद्धपोत और ड्रोन की तस्वीरें आती हैं. लेकिन इन सभी हथियारों के पीछे जो सबसे अहम चीज काम करती है, वह है उनका दिमाग. यानी वह इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जो तय करता है कि मिसाइल कब मुड़े, ड्रोन हवा में संतुलन कैसे बनाए और रडार किस टारगेट को ट्रैक करे. Apollo Micro Systems वही कंपनी है जो हथियार नहीं बनाती, बल्कि उन्हें सोचने की ताकत देती है.
टेक्नोलॉजी बनाने वाली कंपनी
Apollo Micro Systems का काम प्लेटफॉर्म बनाना नहीं है. कंपनी embedded electronics और control systems तैयार करती है, जो डिफेंस सिस्टम को रियल टाइम फैसले लेने में सक्षम बनाते हैं. ये सिस्टम सेंसर से मिलने वाले डेटा को प्रोसेस करते हैं और उसे तुरंत कमांड में बदलते हैं. यही वजह है कि Apollo के प्रोडक्ट मिसाइल सिस्टम, रडार, UAV और फायर कंट्रोल यूनिट्स का अहम हिस्सा होते हैं.
काम करने वाला दिमाग
डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स का सबसे बड़ा चैलेंज होता है भरोसेमंद रहना. Apollo के सिस्टम ऐसे माहौल में काम करने के लिए बनाए जाते हैं जहां सामान्य इलेक्ट्रॉनिक्स तुरंत फेल हो जाए. तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड, तेज कंपन, समुद्री नमी और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस जैसे हालात में भी ये सिस्टम बिना रुके काम करते हैं. यही Apollo को बाकी कंपनियों से अलग बनाती है.
एक बार सिस्टम में घुसे तो बाहर होना मुश्किल
Apollo का सबसे बड़ा फायदा उसका इंटीग्रेशन मॉडल है. जब किसी डिफेंस प्रोजेक्ट में कंपनी का कंट्रोल सिस्टम शामिल हो जाता है, तो उसे बदलना आसान नहीं होता. इसके लिए दोबारा टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और सालों का समय लगता है. यही वजह है कि Apollo को बार- बार दोबारा ऑर्डर मिलते हैं और उसकी कमाई लंबे समय तक बनी रहती है.
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आंकड़े बताते हैं असली कहानी
वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का रेवेन्यू 562 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के 372 करोड़ के मुकाबले 51 की मजबूत बढ़त दिखाता है। इसी दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट करीब 58 करोड़ रहा. वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में कंपनी ने 225 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जो सालाना आधार पर करीब 40 की बढ़त है, जबकि नेट प्रॉफिट 33 करोड़ रहा और इसमें 108 की सालाना ग्रोथ देखने को मिली.
पिछले 3 साल में मुनाफा 58 की कंपाउंड दर से बढ़ा है और इसी अवधि में शेयर ने 105 की सीएजीआर से रिटर्न दिया है. कंपनी के शेयर शुक्रवार को 1.49 फीसदी की गिरावट के साथ 271 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे. इसने अपने निवेशकों को पिछले 5 साल में 2000 फीसदी का रिटर्न दिया है.
डिफेंस का भविष्य और Apollo की भूमिका
आधुनिक युद्ध अब सिर्फ हथियारों की ताकत पर नहीं, बल्कि डिजिटल इंटेलिजेंस पर निर्भर है. नेटवर्क बेस्ड वारफेयर, ऑटोनोमस सिस्टम और स्मार्ट कमांड कंट्रोल आने वाले समय की जरूरत हैं. इन सभी के केंद्र में embedded electronics और decision systems होते हैं. Apollo Micro Systems इसी बदलाव के बीच खड़ी कंपनी है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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