Goldman Sachs: RIL की Buy रेटिंग बरकरार, टारगेट प्राइस को इतना घटाया
ब्रोकरेज फर्म Goldman Sachs ने रिलायंस के शेयरों को लेकर रिपोर्ट जारी की है. फर्म ने RIL के शेयरों को लेकर अपनी टारगेट प्राइस को घटा दिया है लेकिन रेटिंग बरकरार रखी है. जानें क्या है रिलायंस के मौजूदा शेयरों का हाल.
Goldman Sachs on RIL Share: मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों को लेकर बड़ा अपडेट आया है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयरों को लेकर अपने टारगेट प्राइस को कम कर दिया है. हालांकि उसने ऑयल से लेकर टेलीकॉम सेक्टर तक के ग्रुप के लिए ‘बाय’ रेटिंग जारी रखी है. इसी के साथ ब्रोकरेज फर्म ने रिलायंस के शेयरों को लेकर नया टारगेट प्राइस भी जारी किया है. ब्रोकरेज का कहना है कि आने वाले समय में रिलायंस के शेयरों में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
कितना दिया टारगेट प्राइस
ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने गुरुवार, 9 जनवरी को जारी अपनी रिपोर्ट में रिलायंस के शेयरों के पिछले टारगेट प्राइस को 1,630 रुपये से घटाकर 1,595 रुपये प्रति शेयर कर दिया है. फर्म की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के शेयर की कीमत 1,264.70 रुपये है. फर्म ने जारी किए रिपोर्ट के आधार पर 26.1 फीसदी की बढ़त की संभावना जताई है.
फर्म को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2024-25 के तीसरी तिमाही के नतीजों में QoQ के आधार पर RIL के EBITDA में 5 फीसदी की बढ़ोतरी आ सकती है. हालांकि साल-दर-साल के आधार पर EBITDA फ्लैट रह सकता है. फर्म का मानना है कि टेलीकॉम इनकम में हुई बढ़ोतरी की भरपाई एनर्जी और सुस्त रिटेल ग्रोथ से हो सकती है.
इस वित्त वर्ष को लेकर फर्म आशावादी
गोल्डमैन सैक्स वित्त वर्ष 2025-26 में RIL के रिटर्न को लेकर आशावादी हैं. फर्म को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 के दौरान निवेश की गई पूंजी पर नकद रिटर्न या CROCI में 110 आधार अंकों की तेजी होगी. इसके साथ ब्रोकरेज ने उन बिंदुओं को भी चिन्हित किया जो RIL के पक्ष में नहीं दिखते हैं. फर्म का कहना है कि रिटर्न इन्फ्लेक्शन थीसिस को हमारी अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है.
क्या है शेयरों के हाल?
गुरुवार, 9 जनवरी को RIL के शेयर लाल निशान में कारोबार करते हुए बंद हुए. NSE पर कंपनी के शेयरों में 0.85 फीसदी की मामूली गिरावट देखने को मिली है जिसकी कीमत 10.75 रुपये प्रति शेयर होती है. कंपनी के शेयर 1,254.75 रुपये पर कारोबार करते हुए बंद हुए हैं. पिछले एक साल में कंपनी ने अपने निवेशकों को 3.32 फीसदी यानी 43.20 रुपये का नुकसान दिया है. वहीं 6 महीने की अवधि में नुकसान बढ़कर 21 फीसदी के आस-पास पहुंच जाता है.
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