इंफ्रास्ट्रक्चर से डिफेंस तक, L&T कैसे बनी देश की सबसे अहम रक्षा कंपनी, 39 हजार करोड़ के ऑर्डर बुक से कर रही तेज ग्रोथ

Larsen & Toubro अब सिर्फ सड़क, मेट्रो और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं रही. इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूत इंजीनियरिंग आधार के दम पर L&T ने डिफेंस सेक्टर में खुद को एक रणनीतिक पावरहाउस के रूप में स्थापित किया है.

L&T भारत की सैन्य ताकत को मजबूत करने वाली प्रमुख कंपनी है. Image Credit: money9live

L&T Defence: लार्सन एंड टूब्रो (L&T) लंबे समय तक भारत में सड़कों, मेट्रो, पावर प्लांट्स और इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट्स की पहचान रही है. लेकिन बीते कुछ वर्षों में कंपनी ने खुद को सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी तक सीमित नहीं रखा. आज L&T भारत की सैन्य ताकत को मजबूत करने वाली प्रमुख प्राइवेट कंपनियों में शामिल हो चुकी है और डिफेंस सेक्टर में इसकी भूमिका लगातार रणनीतिक होती जा रही है.

इंफ्रास्ट्रक्चर से डिफेंस तक का सफर

L&T का डिफेंस सेक्टर में इंट्री अचानक नहीं हुआ. भारी इंजीनियरिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और जटिल सिस्टम्स को समय पर डिलीवर करने का दशकों का अनुभव कंपनी के पास पहले से मौजूद था. यही क्षमताएं डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन के लिए सबसे जरूरी होती हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर में बनी यही मजबूत नींव L&T को डिफेंस क्षेत्र में आगे ले गई.

थल सेना के लिए एडवांस सैन्य प्लेटफॉर्म

भारतीय थल सेना के लिए L&T ने कई अहम सिस्टम और प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं. इसमें K9 Vajra जैसी एडवांस आर्टिलरी गन, मिसाइल लॉन्च सिस्टम और कमांड एंड कंट्रोल सॉल्यूशन शामिल हैं. ये सिस्टम युद्ध के मैदान में तेज बेहतर सटीकता और ऑपरेशनल बढ़त प्रदान करते हैं, जिससे सेना की मारक क्षमता बढ़ती है.

नौसेना में बढ़ती रणनीतिक मौजूदगी

L&T ने भारतीय नौसेना के लिए भी खुद को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित किया है. कंपनी पनडुब्बियों के स्ट्रक्चर, नेवल गन सिस्टम और एंटी-सबमरीन वारफेयर प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है. पनडुब्बी मैन्युफैक्चर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्राइवेट कंपनी की यह भूमिका भारत की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को नई ऊंचाई देती है.

वायुसेना और स्पेस सेक्टर में फोकस

L&T की मौजूदगी केवल जमीन और समुद्र तक सीमित नहीं है. कंपनी वायुसेना के लिए रडार सिस्टम, एयर डिफेंस कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से जुड़े साल्यूशन विकसित कर रही है. इसके साथ ही ISRO के लिए क्रिटिकल स्पेस कंपोनेंट्स बनाकर L&T ने यह साबित किया है कि वह हाई-प्रिसिजन और हाई-टेक प्रोजेक्ट्स संभालने में सक्षम है.

R&D और सिस्टम इंटीग्रेशन की ताकत

L&T की डिफेंस स्ट्रैटेजी की सबसे बड़ी ताकत उसका इन-हाउस रिसर्च एंड डेवलपमेंट है. कंपनी सिर्फ इक्विपमेंट बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को डिजाइन, डेवलप और इंटीग्रेट करती है. DRDO और भारतीय सेनाओं के साथ को-डेवलपमेंट मॉडल अपनाकर L&T स्वदेशी टेक्नोलॉजी और IP पर लगातार काम कर रही है.

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मजबूत ऑर्डर बुक और लॉन्ग टर्म ग्रोथ

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनी ने कुल ₹1,31,662 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया, जिसमें सबसे बड़ा योगदान इंफ्रास्ट्रक्चर से करीब 46 फीसदी रहा. डिफेंस से जुड़ा PES बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है, जिसने पिछले साल ₹6,060 करोड़ का रेवेन्यू दिया, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में यह 53 फीसदी की सालाना बढ़त के साथ ₹3,760 करोड़ तक पहुंच गया.

सितंबर 2025 तक हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट का ऑर्डर बुक ₹39,100 करोड़ रहा. कंपनी के शेयर शुक्रवार को 0.24 फीसदी की तेजी के साथ3856 पर बंद हुए. इसने अपने निवेशकों को पिछले 5 साल में 186 फीसदी का रिटर्न दिया है.

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