1 महीने में 10% टूट चुका RIL का शेयर, 3 महीने के निचले स्तर पर स्टॉक, क्या यहीं से बन रही है खरीदारी की रणनीति?
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में हालिया गिरावट ने बाजार में नई बहस छेड़ दी है. एक महीने में तेज करेक्शन और मल्टी-मंथ लो के बीच निवेशक असमंजस में हैं. क्या यह कमजोरी खतरे का संकेत है या लंबी अवधि के निवेशकों के लिए रणनीतिक मौका? बाजार और ब्रोकरेज संकेत कुछ और ही कहानी कहते हैं.
RIL Target Price: देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार Reliance Industries Limited के शेयर इन दिनों निवेशकों की चिंता का कारण बने हुए हैं. महीनेभर में RIL का शेयर करीब 10 फीसदी गिर चुका है और सोमवार को यह 1,409 रुपये के स्तर पर आ गया, जो पिछले तीन महीनों का निचला स्तर है. एक तरफ शेयर में लगातार कमजोरी दिख रही है, तो दूसरी तरफ बड़ी-बड़ी ब्रोकरेज फर्म अब भी इस स्टॉक को लेकर सकारात्मक नजर आ रही हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गिरावट निवेश का मौका बन सकती है?
Q3 नतीजों के बाद क्यों टूटा शेयर
सोमवार को बाजार खुलते ही RIL के शेयरों में करीब 3 फीसदी की गिरावट देखी गई. वजह रही कंपनी के दिसंबर तिमाही (Q3FY26) के नतीजे, जो बाजार के अनुमानों से थोड़े कमजोर रहे. कंपनी का कंसॉलिडेटेड EBITDA 50,932 करोड़ रुपये रहा, जो तिमाही आधार पर लगभग स्थिर और अनुमान से कम था. इसका सबसे बड़ा कारण रिलायंस रिटेल का कमजोर प्रदर्शन रहा.
रिटेल सेगमेंट में ग्रॉस रेवेन्यू ग्रोथ सिर्फ 8 फीसदी के आसपास रही और EBITDA ग्रोथ महज 1–2 फीसदी तक सिमट गई. यही बात बाजार को खटकी और निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी.
हालांकि पूरी तस्वीर सिर्फ नकारात्मक नहीं है. डिजिटल बिजनेस यानी जियो का प्रदर्शन मजबूत रहा. डिजिटल EBITDA सालाना आधार पर 16 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 19,303 करोड़ रुपये पर पहुंचा. तिमाही के दौरान 89 लाख नए सब्सक्राइबर जुड़े और ARPU भी 213 रुपये के आसपास रहा.
वहीं ऑयल-टू-केमिकल (O2C) बिजनेस में भी EBITDA में दो अंकों की बढ़त दर्ज की गई, जहां रिफाइनिंग मार्जिन ने पेट्रोकेमिकल कमजोरी की भरपाई की.
रिटेल कमजोरी, अस्थायी या बड़ा खतरा?
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि रिटेल में मौजूदा सुस्ती अस्थायी है और आने वाले समय में डबल डिजिट ग्रोथ की वापसी होगी. क्विक कॉमर्स में आक्रामक विस्तार के चलते मार्जिन पर दबाव जरूर है, लेकिन इसे भविष्य के लिए जरूरी निवेश माना जा रहा है. कई ब्रोकरेज भी इसे “क्लियरिंग इवेंट” मान रही हैं.
ब्रोकरेज की राय क्या कहती है?
वैश्विक ब्रोकरेज Morgan Stanley ने RIL पर ओवरवेट रेटिंग बनाए रखी है और टारगेट प्राइस 1,803 रुपये रखा है. Jefferies और Citi ने भी खरीदारी की सलाह बरकरार रखी है, भले ही उन्होंने टारगेट थोड़े घटाए हों. CLSA, Goldman Sachs, JPMorgan, Kotak Institutional Equities और Macquarie जैसी संस्थाओं का भी मानना है कि रिटेल की कमजोरी के बावजूद जियो, O2C और न्यू एनर्जी जैसे बिजनेस आने वाले वर्षों में ग्रोथ को सहारा देंगे.
एक अहम बात यह है कि कंपनी ने फिलहाल मोबाइल टैरिफ बढ़ाने की कोई जल्दी नहीं दिखाई है. इसका मतलब है कि जियो में ARPU ग्रोथ धीरे-धीरे होगी और ब्रॉडबैंड जैसे सेगमेंट ज्यादा अहम बनेंगे. बाजार को इससे थोड़ी निराशा जरूर हुई, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्थिर और टिकाऊ ग्रोथ का संकेत भी माना जा सकता है.
| ब्रोकरेज फर्म | रेटिंग | टारगेट प्राइस (₹) |
|---|---|---|
| Morgan Stanley | Overweight | 1,803 |
| Jefferies | Buy | 1,795 |
| CLSA | Outperform | 1,650 |
| Goldman Sachs | Buy | 1,820 |
| JPMorgan | Overweight | 1,675 |
| Kotak Institutional Equities | Add | 1,620 |
| Macquarie | Outperform | 1,650 |
| Citi | Buy | 1,815 |
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क्या यह खरीदारी का मौका है?
RIL का शेयर अपने ऑल टाइम हाई 1,611 रुपये से करीब 12 फीसदी नीचे है. कई ब्रोकरेज का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद वैल्यूएशन अब ज्यादा आरामदायक हो गए हैं. जियो की संभावित लिस्टिंग, भविष्य में टैरिफ बढ़ोतरी और सोलर-बैटरी जैसे न्यू एनर्जी प्रोजेक्ट्स लंबे समय के बड़े ट्रिगर माने जा रहे हैं. हालांकि, रिटेल सेगमेंट में रिकवरी की रफ्तार और क्विक कॉमर्स से मार्जिन पर पड़ने वाला दबाव अभी भी जोखिम बना हुआ है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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