TCS vs Infosys: Q3 रिजल्ट में किस IT दिग्गज ने मारी बाजी, कहां दिखी रफ्तार और सुस्ती; क्या है शेयरों का हाल?

Q3 FY26 में IT सेक्टर ट्रांजिशन फेज से गुजरता दिखा. जहां TCS पर लेबर कोड और लीगल खर्चों का दबाव रहा और मुनाफा 14 फीसदी गिरा, वहीं Infosys ने रेवेन्यू ग्रोथ, मजबूत डील पाइपलाइन और बेहतर गाइडेंस के दम पर अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन किया. दोनों कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की प्रतिक्रिया भी अलग-अलग रही.

TCS vs Infosys के तिमाही नतीजे Image Credit: @Canva/Money9live

TCS vs Infosys Q3 Result IT Sector: तीसरी तिमाही में देश की दो सबसे बड़ी आईटी कंपनियों- Tata Consultancy Services (TCS) और Infosys के नतीजों ने साफ कर दिया कि सेक्टर अब एक ट्रांजिशन फेज में है. ग्लोबल अनिश्चितताओं, लागत दबाव और नए रेगुलेटरी बदलावों का असर दोनों कंपनियों के प्रदर्शन पर दिखा. हालांकि, जहां TCS को बड़े पैमाने पर एक्सेप्शनल खर्चों ने झटका दिया, वहीं Infosys ने रेवेन्यू ग्रोथ और डील पाइपलाइन के दम पर अपेक्षाकृत बेहतर संतुलन दिखाया. आइए दोनों आईटी कंपनियों के हालिया रिजल्ट्स को जानते हैं.

TCS का क्या है हाल?

TCS के लिए Q3 FY26 मुनाफे के लिहाज से चुनौतीपूर्ण साबित हुई. कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14 फीसदी घटकर 10,657 करोड़ रुपये रह गया. इसकी सबसे बड़ी वजह बिजनेस स्लोडाउन नहीं, बल्कि वे खर्च रहे जो सामान्य ऑपरेशंस से अलग थे. कंपनी ने साफ कहा कि इस तिमाही में मुनाफे पर अस्थायी लेकिन भारी दबाव पड़ा है. भारत में लागू हुए नए लेबर कोड्स ने TCS की लागत स्ट्रक्चर को सीधा प्रभावित किया. कंपनी को कुल 2,128 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा, जिसे उसने स्टैच्यूटरी इम्पैक्ट के रूप में दर्ज किया. इस राशि में ग्रेच्युटी से जुड़ी नई लागत और लॉन्ग-टर्म लीव बेनिफिट्स शामिल हैं. वेज डेफिनिशन में बदलाव के कारण कर्मचारियों से जुड़े खर्च अचानक बढ़ गए, जिसका असर सीधे नेट प्रॉफिट पर पड़ा.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कंपनी पर दबाव

घरेलू मोर्चे के अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी TCS को दबाव झेलना पड़ा. अमेरिका में Computer Sciences Corporation से जुड़े एक लीगल मामले में कंपनी ने 1,010 करोड़ रुपये का एक्सेप्शनल खर्च दर्ज किया. हालांकि, TCS का दावा है कि उसके पास इस केस में मजबूत कानूनी आधार है और वह फैसले को चुनौती देगी. फिलहाल, इस लीगल प्रोविजन ने तिमाही नतीजों को कमजोर बना दिया.

कहां दिखी बेहतरी?

री-स्ट्रक्चरिंग के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी बेहतर रही. पिछली तिमाहियों में बड़े पैमाने पर छंटनियों और संगठनात्मक बदलावों के बाद Q3 में री-स्ट्रक्चरिंग कॉस्ट घटकर 253 करोड़ रुपये रह गई. यह पिछली तिमाही की तुलना में करीब 77 फीसदी कम है, जिससे संकेत मिलता है कि लागत नियंत्रण की प्रक्रिया अब स्थिर हो रही है. भविष्य की रणनीति पर बात करें तो TCS का फोकस तेजी से AI-फर्स्ट मॉडल की ओर बढ़ रहा है. कंपनी के पास अब 2.17 लाख से अधिक ऐसे कर्मचारी हैं, जिनके पास एडवांस्ड AI स्किल्स हैं. इसके साथ ही, हाई-स्किल फ्रेश ग्रेजुएट्स की भर्ती बढ़ाकर कंपनी लॉन्ग टर्म ग्रोथ के लिए मजबूत टैलेंट पूल तैयार कर रही है.

शेयर बाजार के मोर्चे पर?

शु्क्रवार, 16 जनवरी को TCS के शेयर 2.27 फीसदी की तेजी के साथ 3,206.70 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुए. महीने भर के दौरान स्टॉक 2.73 फीसदी तक टूटा है. वहीं, साल भर के दौरान भी स्टॉक में तकरीबन 22.65 फीसदी तक गिरावट आई है. हफ्ते भर में स्टॉक के मार्केट कैप में 470 करोड़ रुपये की गिरावट आई जिसके बाद वह 11,60,212 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.

Infosys का हाल?

अब अगर Infosys की बात करें, तो Q3 FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 2.2 फीसदी घटकर 6,654 करोड़ रुपये रह गया. यह गिरावट अपेक्षाकृत मामूली रही, लेकिन बाजार अनुमानों से थोड़ा कमजोर जरूर साबित हुई. इसके बावजूद, Infosys के नतीजों में पूरी तरह सुस्ती नहीं दिखी. Infosys की सबसे बड़ी ताकत इस तिमाही में उसका रेवेन्यू प्रदर्शन रहा. कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 8.9 फीसदी बढ़कर 45,479 करोड़ रुपये पहुंच गया. हालांकि, ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव बना रहा और यह घटकर 18.4 फीसदी रह गया. बढ़ती लागत और लेबर कोड से जुड़े प्रावधानों ने मार्जिन को प्रभावित किया, लेकिन एडजस्टेड आधार पर कंपनी ने 21.2 प्रतिशत का मार्जिन बनाए रखा.

पाइपलाइन में क्या है?

डील पाइपलाइन के मोर्चे पर Infosys ने मजबूती दिखाई. तिमाही के दौरान कंपनी ने 4.8 अरब डॉलर की बड़ी डील्स हासिल कीं, जिनमें से 57 फीसदी नई डील्स थीं. इससे आने वाले क्वार्टर्स के लिए रेवेन्यू विजिबिलिटी बेहतर हुई और निवेशकों का भरोसा भी कुछ हद तक कायम रहा. गाइडेंस के लिहाज से Infosys ने सकारात्मक संकेत दिए. कंपनी ने FY26 के लिए कॉन्सटैंट करेंसी में रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 3 से 3.5 फीसदी कर दिया, जबकि ऑपरेटिंग मार्जिन आउटलुक को 20 से 22 फीसदी के दायरे में बरकरार रखा. यह दर्शाता है कि मैनेजमेंट को आगे के बिजनेस ट्रेंड्स पर भरोसा है.

वर्कफोर्स इंडिकेशन में बेहतरी

वर्कफोर्स संकेतकों में भी Infosys के लिए अच्छी खबर रही. कंपनी का वॉलंटरी एट्रीशन रेट घटकर 12.3 फीसदी पर आ गया, जो पिछले साल के मुकाबले बेहतर स्थिति को दर्शाता है. हालांकि, सैलरी बढ़ोतरी को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट टाइमलाइन नहीं दी गई है और कंपनी आगे की स्थिति को देखकर फैसला लेगी.

Infosys के शेयरों का हाल?

शुक्रवार, 16 जनवरी को इन्फोसिस के शेयरों में भी 5.63 फीसदी की तेजी देखी गई. कंपनी का स्टॉक प्रति शेयर 90 रुपये बढ़कर 1,689.80 रुपये पर बंद हुआ. 3 महीने के दौरान इसमें 16.24 फीसदी की तेजी आई है. वहीं, साल भर के दौरान स्टॉक का भाव 7.30 फीसदी तक टूटा है. कंपनी का मार्केट कैप 6,84,997 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.

एक नजर में…

अगर दोनों कंपनियों की तुलना करें तो Q3 में Infosys ने स्थिर ग्रोथ और मजबूत डील्स के दम पर बढ़त बनाई, जबकि TCS इस तिमाही में लागत समायोजन और स्ट्रक्चरल बदलावों के दौर से गुजरती नजर आई. शेयर बाजार के नजरिए से देखें तो TCS पर शॉर्ट टर्म दबाव बना रह सकता है, वहीं Infosys को बेहतर गाइडेंस और डील फ्लो का कुछ सपोर्ट मिल सकता है.

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