सिंगापुर सरकार का बड़ा दांव, हेल्थकेयर और पावर सेक्टर के इन स्टॉक्स में बढ़ाई हिस्सेदारी; रिटर्न के मोर्चे पर भी आगे

दिसंबर तिमाही में सिंगापुर सरकार ने इन दो कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर भारत के हेल्थकेयर और पावर सेक्टर पर लंबी अवधि का भरोसा जताया है. यह निवेश भारतीय अर्थव्यवस्था और मजबूत कंपनियों पर वैश्विक विश्वास को दर्शाता है. जानें किन कंपनियों में बढ़ी हिस्सेदारी?

सिंगापुर सरकार ने बढ़ाई हिस्सेदारी Image Credit: @Canva/Money9live

Singapore Government Increase Stake: सॉवरेन वेल्थ फंड्स का भारतीय शेयर बाजार पर भरोसा अब भी मजबूत बना हुआ है. दिसंबर तिमाही में सिंगापुर सरकार ने भारत की दो बड़ी कंपनियों- Apollo Hospitals और Power Finance Corporation (PFC) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. यह कदम इस बात का संकेत देता है कि वैश्विक निवेशक भारत के हेल्थकेयर और पावर फाइनेंसिंग सेक्टर को लेकर लंबे समय की ग्रोथ संभावनाएं देख रहे हैं, भले ही बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ हो.

Apollo Hospitals में हिस्सेदारी बढ़ी

देश की सबसे बड़ी प्राइवेट हेल्थकेयर कंपनियों में से एक Apollo Hospitals Enterprise Ltd में सिंगापुर सरकार ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. यह कंपनी अस्पतालों, क्लीनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर्स और फार्मेसी नेटवर्क के साथ-साथ डिजिटल हेल्थ और प्रिवेंटिव केयर में भी मजबूत पकड़ रखती है. Apollo भारत में प्राइवेट हेल्थकेयर की लीडिंग कंपनियों में गिनी जाती है.

कितनी बढ़ी हिस्सेदारी?

दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) में सिंगापुर सरकार ने Apollo Hospitals में अपनी हिस्सेदारी 1.37 फीसदी से बढ़ाकर 2.34 फीसदी कर दी. यानी शेयरहोल्डिंग में 0.97 फीसदी का इजाफा हुआ. मौजूदा कीमतों के हिसाब से इस निवेश की वैल्यू करीब 2,442.4 करोड़ रुपये है. कंपनी का मार्केट कैप लगभग 1,04,041 करोड़ रुपये है. हालिया कारोबार में Apollo Hospitals का शेयर 7,235.90 रुपये पर बंद हुआ, जिसमें हल्की गिरावट देखने को मिली. कंपनी के स्टॉक के प्रदर्शन की बात करें तो पिछले 1 महीने में इसमें 4.49 फीसदी की तेजी आई है. वहीं, साल भर के दौरान स्टॉक का भाव 5 फीसदी तक बढ़ा है. 3 साल और 5 साल में कंपनी के शेयर की कीमत में क्रमश: 67 फीसदी और 178 फीसदी की तेजी आई है.

अपडेटेड शेयरहोल्डिंग पैटर्न

शेयरहोल्डिंग पैटर्न पर नजर डालें तो कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 28.02 फीसदी है. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की हिस्सेदारी 44.20 फीसदी से घटकर 43.54 फीसदी रह गई, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की हिस्सेदारी 21.12 फीसदी से बढ़कर 21.50 फीसदी हो गई है. पब्लिक होल्डिंग भी इस दौरान बढ़ी है.

Power Finance Corporation पर भी भरोसा

सिंगापुर सरकार ने सरकारी कंपनी Power Finance Corporation Ltd में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है. PFC भारत के पावर सेक्टर की एक अहम फाइनेंशियल संस्था है, जो बिजली प्रोडक्शन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजेक्ट्स को फंडिंग उपलब्ध कराती है. देश की पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी रिफॉर्म्स में PFC की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है.

कितनी बढ़ी हिस्सेदारी?

Q3 FY26 में सिंगापुर सरकार ने PFC में अपनी हिस्सेदारी 1.08 फीसदी से बढ़ाकर 1.16 फीसदी कर दी. यानी इसमें 0.08 फीसदी का इजाफा हुआ. इस निवेश की कुल वैल्यू करीब 1,369.1 करोड़ रुपये बताई जा रही है. PFC का मार्केट कैप लगभग 1,23,902 करोड़ रुपये है. हालिया सत्र में कंपनी का शेयर 375.45 रुपये पर बंद हुआ, जिसमें करीब 1 फीसदी की तेजी देखने को मिली. शेयर के प्रदर्शन की बात करें तो महीने भर में इसमें 11.18 फीसदी की तेजी आई है. हालांकि, साल भर के दौरान स्टॉक का भाव 14 फीसदी तक टूटा है. लेकिन लॉन्ग टर्म में स्टॉक के भाव में 212 फीसदी और 5 साल में 284 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है.

अपडेटेड शेयरहोल्डिंग पैटर्न

PFC में प्रमोटर होल्डिंग 55.99 फीसदी है. वहीं FII और DII की हिस्सेदारी में हल्की गिरावट आई है जिसके बाद वह क्रमश: 18.84 फीसदी से 18.33 फीसदी और 16.04 फीसदी से 15.48 फीसदी हो गई. जबकि पब्लिक होल्डिंग 9.13 फीसदी से बढ़कर 10.18 फीसदी हो गई है.

भारत में सिंगापुर सरकार का निवेश

सिंगापुर सरकार फिलहाल भारतीय शेयर बाजार में सार्वजनिक रूप से 56 कंपनियों में निवेश कर चुकी है. इन निवेशों की कुल वैल्यू 1,95,658 करोड़ रुपये से ज्यादा है. इसके बड़े होल्डिंग्स में HDFC Bank, ICICI Bank, Bharti Airtel, Bajaj Finance, Larsen & Toubro और Shriram Finance जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं. यह साफ दिखाता है कि सिंगापुर सरकार भारत को एक स्ट्रांग लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के तौर पर देखती है.

क्या संकेत देता है यह निवेश?

Apollo Hospitals और PFC में हिस्सेदारी बढ़ाना यह दिखाता है कि सिंगापुर सरकार भारत के हेल्थकेयर और पावर सेक्टर को लेकर पॉजिटिव बनी हुई है. यह निवेश भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और बढ़ती हेल्थकेयर डिमांड पर वैश्विक भरोसे को भी मजबूत करता है. ऐसे कदम घरेलू निवेशकों के लिए भी यह संकेत हो सकते हैं कि मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में लंबी अवधि के लिए मौके मौजूद हैं.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.