बिक्री दोगुनी, नुकसान भी बढ़ा, फिर भी भरोसा कायम… जानिए इस फार्मा शेयर में पैसा लगाने की असली वजह
सरकार ने यूनियन बजट 2026-27 में दवाइयों और रिसर्च से जुड़े उद्योग को खास तरजीह दी है. नई योजनाओं और हजारों करोड़ रुपये के निवेश से उम्मीद है कि यह सेक्टर और तेजी से आगे बढ़ेगा. इसी माहौल में एक ऐसी कंपनी चर्चा में आ गई है, जो अभी घाटे में है, लेकिन उस पर विदेशी और घरेलू बड़े निवेशकों ने करीब 350 करोड़ रुपये का दांव लगा दिया.
Zota Healthcare Limited: देश के फार्मा सेक्टर में इस समय जबरदस्त हलचल है. सरकार ने यूनियन बजट 2026-27 में दवाइयों और रिसर्च से जुड़े उद्योग को खास तरजीह दी है. नई योजनाओं और हजारों करोड़ रुपये के निवेश से उम्मीद है कि यह सेक्टर और तेजी से आगे बढ़ेगा. इसी माहौल में एक ऐसी कंपनी चर्चा में आ गई है, जो अभी घाटे में है, लेकिन उस पर विदेशी और घरेलू बड़े निवेशकों ने करीब 350 करोड़ रुपये का दांव लगा दिया. यह कंपनी है Zota Healthcare Limited. सवाल यह है कि आखिर निवेशक क्यों भरोसा दिखा रहे हैं. क्या इसकी सस्ती जेनेरिक दवाइयां वजह हैं या फिर तेजी से फैलता इसका रिटेल नेटवर्क. आइए विस्तार से पूरी कहानी समझते हैं.
फार्मा सेक्टर को सरकार का सहारा
बजट में बायोफार्मा शक्ति जैसी योजनाओं के जरिए रिसर्च सेंटर और क्लीनिकल ट्रायल बढ़ाने पर जोर दिया गया है. भारत पहले ही दुनिया में जेनेरिक दवाइयों का बड़ा सप्लायर है. IBEF के मुताबिक, वैश्विक बाजार में भारत की अच्छी हिस्सेदारी है. तीसरी तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू निवेशकों दोनों ने जोटा हेल्थ में हिस्सेदारी बढ़ाई. यह बढ़ोतरी कंपनी के क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के जरिए जुटाए गए 350 करोड़ रुपये के कारण हुई.
1 साल में दिया 31% का रिटर्न

Davaindia मॉडल बना आकर्षण
कंपनी का बड़ा कारोबार Davaindia नाम के जेनेरिक फार्मेसी नेटवर्क से आता है. यह नेटवर्क कम कीमत पर दवाइयां बेचता है. यहां ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 30 से 90 फीसदी तक सस्ती दवाइयां मिलती हैं. इसकी वजह है सीधा मॉडल, जिसमें सिर्फ निर्माता, स्टोर और ग्राहक होते हैं. बीच में डिस्ट्रीब्यूटर या रिटेलर नहीं होते. कंपनी तेजी से नए स्टोर खोल रही है और यही निवेशकों को उम्मीद दे रहा है.
क्रॉनिक बीमारियों से जुड़ा मौका
भारत में डायबिटीज, दिल की बीमारी और कैंसर जैसी लंबी चलने वाली बीमारियां बढ़ रही हैं. PIB के अनुसार करोड़ों लोग इससे प्रभावित हैं. जोटा हेल्थ की आमदनी का बड़ा हिस्सा इसी से जुड़ा है, जिससे उसे लंबे समय तक ग्राहक मिलने की संभावना रहती है.
शेयर होल्डिंग पैटर्न

बिक्री बढ़ी, घाटा भी
कंपनी की बिक्री एक साल में लगभग दोगुनी हो गई, लेकिन घाटा भी बढ़ा है. इसका कारण तेजी से विस्तार और कर्मचारियों पर बढ़ता खर्च बताया जा रहा है. हालांकि ऑपरेटिंग स्तर पर कंपनी मुनाफे में है. आगे की राह जोटा हेल्थ तेजी से बढ़ रही है, लेकिन मुनाफा अभी दूर है. निवेशक मान रहे हैं कि अगर विस्तार सही रहा तो कंपनी भविष्य में फायदे में आ सकती है. अब देखना होगा कि यह भरोसा कितना सही साबित होता है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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