कार की स्क्रीन बन रही खतरा, मोबाइल से भी ज्यादा भटका रही ध्यान; ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड ने लिया बड़ा फैसला

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की कार सुरक्षा एजेंसी ने कहा है कि नई कारों में जरूरी फीचर्स के लिए अब असली बटन और नॉब्स देना अनिवार्य होगा. इसमें एसी कंट्रोल, म्यूजिक सिस्टम और दूसरे जरूरी काम शामिल हो सकते हैं. अभी बाजार में नई कारों में बड़ी और चमकदार टचस्क्रीन लगाने का चलन बढ़ रहा है.

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लग्जरी की पहचान बन चुकी कारों की बड़ी-बड़ी टचस्क्रीन अब सवालों के घेरे में हैं. चमकदार डिस्प्ले, म्यूजिक बदलने के लिए स्लाइड करना, AC का टेम्परेचर सेट करना या मेन्यू में ऑप्शन ढूंढना देखने में आसान लगता है, लेकिन यही काम ड्राइविंग के दौरान जानलेवा साबित हो सकता है. नई रिसर्च बताती है कि कार की टचस्क्रीन इस्तेमाल करने से ड्राइवर की रिएक्शन टाइम 50 प्रतिशत तक धीमी हो जाती है. यानी अचानक ब्रेक लगाने की जरूरत पड़े तो ड्राइवर देर कर सकता है. इसी खतरे को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की कार सुरक्षा एजेंसी ने फैसला किया है कि इस साल से कंपनियों को कारों में जरूरी कामों के लिए फिजिकल बटन देने होंगे.

ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड का बड़ा फैसला

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की कार सुरक्षा एजेंसी ने कहा है कि नई कारों में जरूरी फीचर्स के लिए अब असली बटन और नॉब्स देना अनिवार्य होगा. इसमें एसी कंट्रोल, म्यूजिक सिस्टम और दूसरे जरूरी काम शामिल हो सकते हैं. अभी बाजार में नई कारों में बड़ी और चमकदार टचस्क्रीन लगाने का चलन बढ़ रहा है. इसे स्टाइल और आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाता है. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि यही स्क्रीन ड्राइविंग के दौरान जोखिम बढ़ा रही हैं.

मोबाइल से भी ज्यादा खतरनाक

गाड़ी चलाते समय टचस्क्रीन से गाना बदलना या AC सेट करना मोबाइल पर मैसेज करने से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है. मेलबर्न यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में पाया गया कि स्क्रीन के मेन्यू में उलझने से ड्राइवर की रिएक्शन स्पीड करीब 50 फीसदी तक कम हो जाती है. तुलना करें तो तेज रफ्तार में ड्राइव करते समय रिएक्स 35 फीसदी धीमी होती है और फोन पर बात करने से यह 46 फीसदी तक गिर जाती है. इसका मतलब है कि खतरा आने पर ब्रेक लगाने में ज्यादा समय लगेगा.

मसल मेमोरी नहीं बनती स्क्रीन से

DB के हवाले से डॉ. हघानी का कहना है कि मैनुअल बटन और नॉब्स को ड्राइवर बिना देखे भी चला सकता है. बार-बार इस्तेमाल करने से दिमाग और हाथों को याद हो जाता है कि कौन-सा बटन कहां है. इसे मसल मेमोरी कहा जाता है. इससे आंखें सड़क पर रहती हैं और ध्यान नहीं भटकता. लेकिन टचस्क्रीन में हर बार नजर डालकर सोचना पड़ता है कि कौन-सा विकल्प चुनना है. यही सबसे बड़ा खतरा है.

मेलबर्न यूनिवर्सिटी के डॉ. मिलाद बताते हैं कि टचस्क्रीन तीन तरह से ध्यान भटकाती है. पहली, आंखें सड़क से हटती हैं. दूसरी, हाथ स्टीयरिंग छोड़कर स्क्रीन पर जाते हैं. तीसरी, दिमाग मेन्यू ढूंढने में उलझ जाता है. यह तीनों चीजें मिलकर हादसे की आशंका कई गुना बढ़ा देती हैं.

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