चीनी स्मार्टफोन का पहली बार घटा क्रेज, Oppo से लेकर Realme को झटका, Apple-Samsung का बढ़ा मार्केट शेयर
भारत के स्मार्टफोन बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पिछले वित्त वर्ष में पहली बार चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है. एंट्री और मिड-रेंज फोन्स की मांग घटने और प्रीमियम स्मार्टफोन्स की बढ़ती लोकप्रियता से बाजार का रुख बदल गया है, जिससे एप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियों को फायदा हुआ है.
भारत के स्मार्टफोन बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. पिछले वित्त वर्ष (FY25) में पहली बार चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है. एंट्री और मिड-रेंज फोन्स की मांग घटने और प्रीमियम स्मार्टफोन्स की ओर ग्राहकों के झुकाव के कारण यह स्थिति बनी है. भारत में काम कर रही नौ बड़ी चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों की कुल आय में 4.5% की कमी आई है.
Xiaomi, Oppo, OnePlus और Realme को झटका
इन प्रमुख चीनी ब्रांड्स की बिक्री में पिछले वित्त वर्ष गिरावट दर्ज की गई. खासकर 20,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स की मांग कम होने से इन कंपनियों पर असर पड़ा है. Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, इसका सबसे ज्यादा असर उस प्राइस सेगमेंट पर पड़ा है, जहां प्रतिस्पर्धा सबसे ज्यादा है और जहां चीनी ब्रांड्स की पकड़ मजबूत रही है. 2023 में जहां 20,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन्स की हिस्सेदारी 38% थी, वहीं 2025 में यह घटकर 29% रह गई है.
Apple और Samsung को फायदा
45,000 रुपये से ज्यादा कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन्स की मांग तेजी से बढ़ी है. 2023 में इस सेगमेंट की वैल्यू शेयर 36% थी, जो 2025 में बढ़कर 47% हो गई. रिपोर्ट के अनुसार, प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में मजबूत ग्रोथ देखने को मिली है, जिसका फायदा एप्पल और सैमसंग को हुआ है. FY25 में एप्पल की भारत में बिक्री 18% बढ़कर 79,378 करोड़ रुपये हो गई, जबकि सैमसंग की बिक्री 12% बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई.
कीमतों में बढ़ोतरी से और दबाव
इंडस्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार, मेमोरी चिप्स की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और रुपये की कमजोरी के कारण स्मार्टफोन की लागत बढ़ रही है. इसका असर रिटेल कीमतों पर दिखने लगा है. काउंटरपॉइंट के तरुण पाठक ने Economic Times को बताया कि बढ़ती कीमतों से खासकर कम बजट वाले स्मार्टफोन्स की मांग और घट सकती है. इसका सबसे ज्यादा असर उन चीनी ब्रांड्स पर पड़ेगा, जिनकी मजबूत पकड़ इसी सेगमेंट में है.
Vivo ने दिखाई मजबूती
जहां अधिकतर चीनी कंपनियों की बिक्री घटी, वहीं वीवो ने बेहतर प्रदर्शन किया. कंपनी की आय में 11% की बढ़ोतरी हुई. बिजनेस इंटेलिजेंस कंसल्टेंसी AltInfo के संस्थापक मोहित यादव ने Economic Times से कहा, “बाजार अब प्रीमियम और ऑफलाइन रिटेल की ओर बढ़ रहा है, और वीवो ही ऐसा चीनी ब्रांड है जिसकी ग्रोथ इस बदलाव के साथ तालमेल बैठाती दिख रही है.”
हालांकि कुल मिलाकर भारतीय उपभोक्ताओं ने FY25 में इन नौ बड़ी चीनी कंपनियों के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर करीब 1.65 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जो पिछले साल के 1.72 लाख करोड़ रुपये से कम है.
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