हर अकाउंट में एक जैसा पासवर्ड, जेब पर पड़ सकता है भारी, जानें ठगी को कैसे अंजाम दे रहे साइबर ठग, ऐसे रहें सेफ
डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं. एक छोटी-सी लापरवाही, जैसे संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना या एक ही पासवर्ड का बार-बार उपयोग, लोगों को बड़े वित्तीय नुकसान और निजी जानकारी की चोरी का शिकार बना सकती है. ऐसे में सतर्कता और सही समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी है.
Cyber Fraud: आज के डिजिटल दौर में लोग दर्जनों वेबसाइट्स और ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में यूजर्स हर जगह एक ही पासवर्ड रख लेते हैं. यही आदत साइबर अपराधियों के लिए सबसे आसान रास्ता बनती जा रही है. अगर किसी एक प्लेटफॉर्म पर डेटा लीक हो जाए, तो उसी पासवर्ड के जरिए आपके बाकी अकाउंट्स तक भी पहुंच बनाई जा सकती है. इसी खतरे को लेकर हाल ही में Ministry of Home Affairs के तहत काम करने वाली एजेंसियों ने लोगों को सतर्क किया है.
एक डेटा ब्रीच, कई अकाउंट्स पर सीधा असर
जब आप एक ही पासवर्ड को ई-मेल, सोशल मीडिया, बैंकिंग या शॉपिंग ऐप्स में इस्तेमाल करते हैं, तो किसी एक जगह हुआ डेटा ब्रीच आपके सभी अकाउंट्स को जोखिम में डाल देता है. साइबर अपराधी लीक हुए ई-मेल और पासवर्ड को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर आजमाते हैं, जिसे “क्रेडेंशियल स्टफिंग” कहा जाता है. इससे निजी जानकारी चोरी होने, अकाउंट हैक होने और वित्तीय नुकसान का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
कैसे पता करें कि आपका डेटा लीक हुआ है या नहीं
सरकार से जुड़े साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म्स लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे समय-समय पर अपने ई-मेल आईडी की जांच करें. इसके लिए Have I Been Pwned जैसी सेवाएं यह बताती हैं कि आपका ई-मेल किसी ज्ञात डेटा ब्रीच का हिस्सा रहा है या नहीं. अगर जांच में ब्रीच दिखता है, तो बिना देरी किए संबंधित अकाउंट का पासवर्ड बदलना बेहद जरूरी है.
सेफ रहने के लिए क्या करें?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और Indian Cyber Crime Coordination Centre की सलाह है कि हर अकाउंट के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड रखा जाए. पासवर्ड में अक्षर, अंक और विशेष चिन्ह शामिल हों और जहां संभव हो वहां टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) चालू किया जाए. इसके अलावा संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने और अनजान ऐप्स में लॉग-इन करने से बचना भी ऑनलाइन सुरक्षा के लिए जरूरी कदम हैं. डिजिटल सुविधा के साथ सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है क्योंकि एक छोटी-सी लापरवाही बड़ा साइबर नुकसान बन सकती है.
ठगी के बाद क्या करना चाहिए?
ठगी होने की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती समय में की गई कार्रवाई से नुकसान कम किया जा सकता है. सबसे पहले राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, ताकि संबंधित एजेंसियां समय रहते कार्रवाई कर सकें. इसके साथ ही अपने बैंक या पेमेंट ऐप को तुरंत जानकारी देकर अकाउंट, कार्ड या UPI को ब्लॉक करवाएं. यदि ठगी में ई-मेल या सोशल मीडिया अकाउंट शामिल हो, तो सभी पासवर्ड तुरंत बदलें और सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें. साथ ही ठगी से जुड़े सभी सबूत जैसे कॉल डिटेल, मैसेज, लिंक और ट्रांजैक्शन जानकारी सुरक्षित रखें, क्योंकि ये आगे की जांच में काम आते हैं.
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