खाड़ी देशों के बर्बाद हुए 6.5 लाख करोड़, जानें सऊदी अरब, कुवैत से लेकर UAE को कितने अरब का नुकसान
कच्चे तेल पर निर्भर दुनिया में ईरान-अमेरिका युद्ध ने बड़ा आर्थिक भूचाल ला दिया है. Strait of Hormuz पर बढ़ते तनाव से तेल सप्लाई बाधित हुई, जिससे खाड़ी देशों को भारी नुकसान झेलना पड़ा. वहीं, इस संकट में रूस, नॉर्वे और कनाडा जैसे देश फायदे में नजर आ रहे हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा समीकरण बदलते दिख रहे हैं.

Iran War Impact on Gulf Countries: कच्चे तेल को यूं ही “ब्लैक गोल्ड” नहीं कहा जाता – और जब इसके रास्ते में युद्ध आ जाए, तो दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल जाती है. तेल और गैस पर टिकी खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था को ईरान-अमेरिका युद्ध ने गहरा झटका दिया है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz जैसे समुद्री रास्ते पर असर पड़ने से तेल सप्लाई बाधित हुई और हालात तेजी से बिगड़े. कतर, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा, जिनकी आय का बड़ा हिस्सा ऊर्जा निर्यात पर निर्भर है. रिफाइनरियों को हुए नुकसान और घटते उत्पादन ने संकट को और बढ़ा दिया. यह युद्ध खाड़ी देशों के लिए सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक झटका साबित हो रहा है.
किसने क्या पाया, क्या खोया?
ईरान-अमेरिका युद्ध में खाड़ी देशों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है. वे देश, जिनके राजस्व का अधिकांश हिस्सा तेल और गैस के निर्यात पर टिका था, उन्हें 28 फरवरी के बाद जोर का झटका लगा है. इस युद्ध में कतर सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, वहीं सऊदी अरब के 10 अरब डॉलर डूब गए हैं. दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध में खाड़ी देशों को अपनी GDP का लगभग 2 फीसदी नुकसान हुआ है. सऊदी अरब, कतर और UAE को करीब 70 अरब डॉलर यानी 6.46 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इस युद्ध में सबसे अधिक क्षति कतर को हुई है. कतर अपनी कुल आय का लगभग 80 फीसदी हिस्सा तेल और गैस के निर्यात से कमाता है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से उसे सबसे अधिक नुकसान हुआ है. कतर को 20 अरब डॉलर के घाटे का अनुमान है.
| देश/क्षेत्र | नुकसान (डॉलर में) | अन्य प्रभाव |
|---|---|---|
| कतर | लगभग 20 अरब डॉलर | कुल आय का 80% तेल-गैस से |
| सऊदी अरब | लगभग 10 अरब डॉलर | तेल उत्पादन 1.04 करोड़ बैरल से घटकर 80 लाख बैरल प्रतिदिन |
| यूएई-बहरीन, कुवैत और अन्य | 40 अरब डॉलर | कुल नुकसान में हिस्सेदारी |
| खाड़ी देश | लगभग 70 अरब डॉलर (6.46 लाख करोड़ रुपये) | GDP का लगभग 2% नुकसान |
| खाड़ी रिफाइनरियां | भारी नुकसान | ठीक होने में 3–5 साल लगेंगे |
हालात ठीक करने में लगेंगे 5 साल
अमेरिका के हमले में खाड़ी देशों की रिफाइनरियों को काफी नुकसान हुआ है. अनुमान लगाया जा रहा है कि क्षतिग्रस्त हुई इन रिफाइनरियों को ठीक करने में कम से कम 3 से 5 साल लगेंगे. इस युद्ध में सऊदी अरब का तेल उत्पादन 1.04 करोड़ बैरल से घटकर 80 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जिससे उसे 10 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. रिकवरी में लंबा समय लगेगा, क्योंकि बंद हुए कुओं को फिर से चालू करने, स्टोरेज खाली करने और रिफाइनिंग प्रक्रिया बहाल करने में महीनों से लेकर वर्षों तक का समय लग सकता है.
ईरान युद्ध के विजेता कौन?
पश्चिम एशिया में चले 1 महीने से अधिक ईरान युद्ध में अमेरिका, इजरायल और ईरान ने भले ही युद्ध के मैदान में लड़ाई लड़ी, लेकिन कारोबारी बाजार में इन तीनों देशों ने दांव हारा ही है. इस बीच नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे देशों ने बाजी मारी है. ईरान से जुड़े हालिया संघर्ष और ऊर्जा संकट में कुछ देश बड़े विजेता बनकर उभर रहे हैं. तेल और गैस पर दुनिया की निर्भरता अभी भी बहुत ज्यादा है, इसलिए जैसे ही पश्चिम एशिया खासकर Strait of Hormuz में तनाव बढ़ा और आपूर्ति प्रभावित हुई, तेल की कीमतें बढ़ गईं. इसका नुकसान कतर और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों को हुआ, लेकिन नॉर्वे और कनाडा जैसे देश फायदे में आ सकते हैं क्योंकि ग्राहक अब वैकल्पिक स्रोत ढूंढ रहे हैं.
2022 में Russia-Ukraine War के बाद भी नॉर्वे ने उत्पादन बढ़ाकर फायदा उठाया था. कनाडा खुद भी अवसर का फायदा उठाना चाह रहा है. ईरान युद्ध का सबसे बड़ा फायदा रूस को हो सकता है. BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा नियमों में ढील देने से रूस का तेल भारत को निर्यात 50% बढ़ गया है और उसे अरबों डॉलर की अतिरिक्त कमाई हो सकती है. इसके अलावा, जब कुछ देश कोयले का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं, तो इंडोनेशिया जैसे बड़े कोयला निर्यातकों को भी फायदा मिल सकता है. इस तरह, इस संकट में नॉर्वे, कनाडा और खासकर रूस जैसे देश विजेता बनकर सामने आ रहे हैं.
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