गैस संकट में रूस की नई चाल! दक्षिण एशिया देशों को 40% सस्ती LNG का ऑफर, भारत के पास क्या रास्ता?
वैश्विक गैस संकट के बीच रूस ने भारत और बांग्लादेश को 40% सस्ती LNG की पेशकश की है. Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ऑफर प्रतिबंधों से बचने के लिए इंटरमीडियरी कंपनियों के जरिए दिया जा रहा है, जिससे ऊर्जा बाजार में नई हलचल शुरू हो गई है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई टूटने के बीच अब रूस ने एक नई रणनीति अपनाई है. वैश्विक गैस संकट में मौका तलाशते हुए हुए रूस दक्षिण एशिया के देशों, खासतौर पर भारत और बांग्लादेश को सस्ती LNG बेचने की कोशिश कर रहा है. Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस अपनी गैस करीब 40% छूट पर ऑफर कर रहा है, ताकि नए खरीदार जोड़े जा सकें.
40% डिस्काउंट पर गैस, लेकिन शर्तें पेचीदा
Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, रूस अपनी LNG खेप स्पॉट प्राइस से करीब 40% सस्ते दाम पर ऑफर कर रहा है.
यह डील सीधे नहीं, बल्कि चीन और रूस की कुछ इंटरमीडियरी कंपनियों के जरिए पेश की जा रही है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन शिपमेंट्स के साथ ऐसे दस्तावेज दिए जा सकते हैं, जिससे यह दिखे कि गैस ओमान या नाइजीरिया जैसे देशों से आई है, इसका मकसद प्रतिबंधों से बचना है.
क्यों बना गैस संकट?
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने और कतर के LNG प्लांट पर हमलों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है. Bloomberg के मुताबिक, इससे दुनिया की करीब 20% गैस सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में तेजी आ गई है. कतर से सप्लाई रुकने के बाद भारत और बांग्लादेश जैसे देशों को महंगे स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ रही है.
बांग्लादेश और भारत पर दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश अपनी करीब 60% LNG जरूरत कतर से पूरी करता था, लेकिन अब उसे दोगुनी कीमत तक चुकानी पड़ रही है. स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि भारत और बांग्लादेश दोनों को उर्वरक (fertilizer) सेक्टर में गैस सप्लाई कम करनी पड़ी है.
भारत आमतौर पर प्रतिबंधित (sanctioned) ऊर्जा सौदों से दूरी बनाए रखता है. सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि वह ब्लैकलिस्टेड प्रोजेक्ट्स से रूसी LNG नहीं खरीदेगी. Bloomberg के मुताबिक, फिलहाल चीन ही एक ऐसा देश है जो इन प्रतिबंधित रूसी प्रोजेक्ट्स से गैस खरीद रहा है.
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रूस की बड़ी रणनीति
रूस अपने Arctic LNG 2 और Portovaya जैसे प्रोजेक्ट्स से निर्यात बढ़ाना चाहता है, लेकिन खरीदारों की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है. ऐसे में दक्षिण एशिया जैसे नए बाजार रूस के लिए अहम बन गए हैं.
यह स्थिति भारत जैसे देशों के लिए एक संतुलन का मामला है, एक तरफ सस्ती गैस की सहूलियत, दूसरी तरफ अमेरिकी प्रतिबंधों का डर. यानी, आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि भारत इस ऑफर को ठुकराता है या वैश्विक संकट के बीच कोई नया रास्ता निकालता है.
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