दुनिया का नक्शा क्यों बदलना चाहते हैं ट्रंप? सिर्फ पॉलिटिक्स ही नहीं… अरबों डॉलर का है खेल
हाल ही में ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे के अपने विचार को खूब हवा दी है. इसके अलावा वो पनामा नहर पर फिर से अमेरिकी अधिकार चाहते हैं और कनाडा को अमेरिका में शामिल करने को लेकर उनके बयान ने पूरी दुनिया को हैरान किया है.
डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के व्हाइट हाउस लौटने में अब महज कुछ दिन बचे हैं. ट्रंप अपनी टिप्पणियों के चलते लगातार सुर्खियों में हैं, लेकिन ये टिप्पणियां उनके कैबिनेट या फिर उनके चुनावी अभियान के एजेंडे जैसे मुद्दों से कहीं इतर हैं. ट्रंप सुर्खियों में अमेरिका के लिए अधिक ग्लोबल टेरिटरी हासिल करने की वकालत जैसे बयानों से हैं. हाल ही में ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे के अपने विचार को खूब हवा दी है. इसके अलावा वो पनामा नहर पर फिर से अमेरिकी अधिकार चाहते हैं और कनाडा को अमेरिका में शामिल करने को लेकर उनके बयान ने पूरी दुनिया को हैरान किया है. जहां एक तरफ वो ग्रीनलैंड और पनामा नहर पर अमेरिकी नियंत्रण पाने के लिए सेना के इस्तेमाल का विकल्प खुल रख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कनाडा को अमेरिका में शामिल करने के लिए ‘आर्थिक बल’ प्रयोग की बात कर रहे हैं. ट्रंप के बयान पर पनामा, डेनमार्क और कनाडा के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और उनकी इच्छाओं को खारिज कर दिया है. लेकिन सवाल तो यही है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप इस तरह की टिप्पणियों से क्या हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
इस मामले को जानने और समझने वाले जानकारों के ट्रंप के इस रवैये पर अलग-अलग विचार हैं. कुछ लोगों का मानना है कि ट्रंप की अमेरिका के पुराने सहयोगियों को भड़काने और अप्रत्याशित मांगें, घरेलू और वैश्विक स्तर पर उनके द्वारा किए जाने वाले बदलाव की झलक देती है. एनबीसी न्यूज ने डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों के हवाले से लिखा कि ट्रंप की हाल की कुछ डिमांड गंभीर हैं. कुछ एजेंडे ऐसे हैं, जिनका लाभ वो दूसरे तरीके से उठाना चाहते हैं.
ट्रंप के लिए क्यों जरूरी है ग्रीनलैंड?
ग्रीनलैंड की मांग ट्रंप के लिए कोई नई नहीं है. उन्होंने अपने पहले कार्यकाल के दौरान रक्षा कारणों से ग्रीनलैंड खरीदने की कोशिश की थी, लेकिन वो सफल नहीं हो पाए थे. अब अपने दूसरे कार्यकाल से पहले उन्होंने फिर से इस मुद्दे को हवा दी है. एक्सपर्ट का कहना है कि ट्रंप को लगता है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का प्रयास लोगों को उत्साहित करता है. हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप के सबसे बड़े बेटे डोनाल्ड ट्ंप जूनियर ने नुउक की यात्रा की थी, जो लगभग 57,000 लोगों की आबादी वाले द्वीप पर सबसे बड़ा जनसंख्या केंद्र है.
रणनीतिक रूप से ग्रीनलैंड
ग्रीनलैंड कनाडा के उत्तर-पूर्व में स्थित है और यह काफी हद तक आइस शीट से ढका हुआ है. यह डेनमार्क साम्राज्य का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, जिसकी अपनी चुनी हुई सरकार है. अमेरिका, रूस और यूरोप के बीच स्थित होने के कारण यह आर्थिक और रक्षा दोनों ही उद्देश्यों के लिए रणनीतिक है. खासकर इसलिए क्योंकि पिघलती समुद्री बर्फ ने आर्कटिक के जरिए नए शिपिंग रूट के लिए संभावनाएं खोल दी हैं. इसके अलावा यह सबसे नॉर्थ अमेरिकी सैन्य बेस भी है. ग्रीनलैंड में ऑयल, नेचुरल गैस और अत्यधिक मांग वाले मिनिरल्स भी हैं. एक अनुमान के मुताबिक तकरीबन 50 बिलियन बैरल तेल और गैस का भंडार ग्रीनलैंड में है. ग्रीनलैंड के लोगों को डेनमार्क की पूरी नागरिकता प्राप्त है.
ग्रीनलैंड कोपेनहेगन की तुलना में न्यूयॉर्क के ज्यादा नजदीक है और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने कुछ समय के लिए इस पर कब्जा कर लिया था. हाल के वर्षों में चीन ने इस द्वीप पर पैठ बनाने की कोशिश की है. ट्रंप चीन के इस कदम से चौकन्ने हो गए हैं और उसे बैकफुट पर धकेलने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे की बात कर रहे हैं. इसलिए संभवत: उन्होंने इस काम के लिए के लिए सैन्य इस्तेमाल के विकल्प खुले रखे हैं.
एनबीसी न्यूज से बात करते हुए ट्रंप की पूर्व एंबेसडर कार्ला सैंड्स ने कहा कि डेनमार्क के पास सही तरीके से आइलैंड की रक्षा करने की क्षमता नहीं है. दूसरी तरफ ग्रीनलैंड के साथ चीन के बढ़ते संबंधों ने अमेरिकी अधिकारियों को अलर्ट पर रखा है.
आर्थिक दबाव अभियान
ट्रंप की पनामा नहर पर कब्जे की मांग को उनके आर्थिक दबाव अभियान के रूप में इस्तेमाल करने के नजरिए से देखा जा सकता है. वो इसपर कब्जे की बात तो कर रहे हैं, लेकिन इससे हासिल करने वाले मकसद कुछ और भी हैं. ट्रंप को लगता है कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर को पनामा नहर को पनामा को वापस नहीं करना चाहिए था. पनामा नहर पर कब्जे का मुद्दा नया है. इससे पहले ट्रंप ने कभी भी इसको लेकर कब्जे या अमेरिका में शामिल करने की बात नहीं की थी. उनके पहले कार्यकाल में पनामा नहर पर कब्जा करना उनकी इच्छाओं में शामिल नहीं था. लेकिन अब चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए यह मुद्दा ट्रंप के लिए अहम बन गया है.
चीनी अतिक्रमण
रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों की जानकारी रखने वालों का कहना है कि ट्रंप के सहयोगियों ने नव-निर्वाचित राष्ट्रपति को कुछ डेटा दिखाए हैं, जिसमें वेस्टर्न हेमिस्फीयर में चीनी अतिक्रमण को लेकर तर्क दिया गया है. साथ ही यह भी आरोप है कि पनामा में अमेरिकी शिपिंग के बजाय चीन को प्राथमिकता देने की क्षमता है. वहीं, दूसरे पक्ष कहना है कि नहर पर कब्जा करने की ट्रंप की धमकी पनामा को अमेरिकी शिपमेंट के लिए अधिक अनुकूल ट्रिटमेंट दिलाने के लिए बातचीत का एक ‘हथियार’ है. पनामा नहर की बात करें तो ट्रंप ने अपना ध्यान अमेरिकी जहाजों पर केंद्रित किया है, जिन्हें जलमार्ग का उपयोग करने के लिए अधिक शुल्क देना पड़ रहा है. उनका मानना है कि चीनी जहाजों को अधिक तरजीह दी जा रही है. ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को ‘आर्थिक सुरक्षा’ के लिए पनामा नहर की आवश्यकता है.
पनामा के राष्ट्रपति ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
पनामा के राष्ट्रपति जोस राउल मुलिनो ने दिसंबर में कहा था कि नहर का प्रत्येक वर्ग मीटर पनामा का है और आगे भी रहेगा. उन्होंने पिछले महीने इस बात से इनकार किया था कि चीन का इस जलमार्ग पर प्रभाव है, जिसका प्रशासन पनामा नहर प्राधिकरण करता है. हालांकि, पनामा नहर की सर्विस करने वाले पांच बंदरगाहों में से दो का संचालन हांगकांग स्थित एक कंपनी करती है. चीन ने अपने 2020 के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के जरिए हांगकांग पर अपना प्रभाव बढ़ाया है.
पनामा नहर से क्या चाहते हैं ट्रंप?
ट्रेड पब्लिकेन कार्गोनाउ के अनुसार, मौजूदा समय में अमेरिकी कंटेनर शिपिंग का लगभग 40 फीसदी पनामा नहर के जरिए से यात्रा करता है. यह नहर प्रशांत महासागर और कैरेबियन सागर तथा उसके आगे अटलांटिक महासागर के बीच शॉर्टकट का काम करती है. यह नहर एशिया से पूर्वी अमेरिका के बंदरगाहों तक शिपिंग मार्गों को छोटा करती है. रिपोर्ट के अनुसार, पनामा नहर से हर साल करीब 270 अरब डॉलर के गुड्स भेजे जाते हैं, जो वैश्विक समुद्री व्यापार का करीब 5 फीसदी है.
पनामा नहर का निर्माण अमेरिका ने 1904 और 1914 के बीच किया था. इसे दशकों तक अमेरिकी सरकार ने मैनेज किया था. 1970 के दशक में अमेरिका और पनामा ने नहर की स्थायी तटस्थता पर सहमति जताते हुए एक संधि पर हस्ताक्षर किए. अमेरिका ने नहर का नियंत्रण छोड़ने के लिए प्रतिबद्धता जताई और 1999 में पूरी तरह से कंट्रोल छोड़ दिया.
कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना
कनाडा को अमेरिका में मिलाने की ट्रंप टिप्पणी को एक कटाक्ष के रूप में ज्यादातर एक्सपर्ट देख रहे हैं. उनका मानना है कि ट्रंप को लगता है कि इस तरह के बयान से कुछ पॉलिसियां उनके रास्ते में आ सकती हैं और बातचीत में मदद मिल सकती है. पिछले महीने कनाडाई अधिकारियों ने सीमा सुरक्षा पर खर्च बढ़ाने की योजना की घोषणा की थी, जो पिछले साल रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के प्राथमिक अभियान का केंद्र बिंदु था.
ट्रंप ने जस्टिन ट्रूडो ट्रूडो से फ्लोरिडा स्थित उनके घर मार-ए-लागो में मुलाकात के बाद कई हफ्तो तक कनाडाई सरकार का मजाक उड़ाया है. इस मुलाकात में उन्होंने कनाडा के सामानों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की संभावना पर चर्चा की थी. उन्होंने ट्रूडो को ‘गवर्नर ट्रूडो’ कहा है और सुझाव दिया है कि कनाडाई अमेरिका 51वां राज्य बनना पसंद करेंगे.
टैरिफ गेम
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को कहा था कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने के बारे में नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टिप्पणियां, टैरिफ धमकियों के परिणामों से ध्यान भटकाने के लिए एक मात्र प्रयास भर हैं. नवंबर में ट्रंप ने अपने प्रशासन के पहले दिन से ही मेक्सिको, कनाडा और चीन से आने वाले सामानों पर टैरिफ में भारी बढ़ोतरी का वादा किया था. यह पॉलिसी अमेरिकी बिजनेस और उपभोक्ताओं के लिए लागत में तेजी से वृद्धि कर सकती है. कनाडा, मेक्सिको और चीन अमेरिका के सबसे बड़े बिजनेस पार्टनर हैं.
ट्रंप समझ रहे हैं खेल
टैरिफ में इजाफे से बढ़ने वाले लागत दबाव ट्रंप समझ रहे हैं. शायद इसीलिए वो पनामा नहर पर कब्जे की टिप्पणी से दबाव बनाकर जहाजों पर लगने वाले शुल्क को कम करने की कोशिश कर रहे हैं. इससे विदेशी वस्तुओं पर लगाए जाने वाले टैरिफ के बाद प्रोडक्ट की लागत में होने वाली अनुमानित वृद्धि को कम करने में भी मदद मिल सकती है.
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