छोटी कारों पर CO2 नॉर्म्स में राहत को लेकर विवाद तेज, मारुति ने चेताया- ‘अगर ऐसा हुआ तो छोटी कारें बंद करनी पड़ेंगी’
भारत में छोटी कारों पर CO2 उत्सर्जन मानकों में ढील को लेकर विवाद तेज हो गया है. मारुति सुजुकी का कहना है कि अगर वजन आधारित छूट हटाई गई, तो छोटी कम-उत्सर्जन कारों का उत्पादन असंभव हो जाएगा. वहीं टाटा और महिंद्रा इस राहत का विरोध कर रहे हैं, जिससे उद्योग में मतभेद गहराए हैं.
Maruti Suzuki and CO2 CAFE Norms: छोटी कारों के लिए कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन मानकों में ढील दी जाए या नहीं, इस मुद्दे पर ऑटो सेक्टर में मतभेद तेज हो गए हैं. मारुति सुजुकी इंडिया ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) के प्रस्तावित नए मानकों में वजन आधारित राहत नहीं दी, तो छोटी कारों को बाजार से हटाना पड़ सकता है. कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (कॉर्पोरेट अफेयर्स) राहुल भारती ने पोस्ट-अर्निंग कॉल में कहा कि CAFE के नए ड्राफ्ट में तय किए गए लक्ष्य छोटी कारों के लिए “अवैज्ञानिक” हो जाते हैं. उन्होंने कहा, “समस्या कारों में नहीं है, समस्या टारगेट सेट करने के तरीके में है. ये लक्ष्य छोटी कारों के लिए व्यावहारिक नहीं रह जाते.”
क्या है विवाद की जड़?
ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) ने सितंबर में CAFE-3 का ड्राफ्ट जारी किया था, जो 2027-28 से पांच साल के लिए लागू होगा. नई गाइडलाइन में 909 किलो वजन तक की कारों को CO2 उत्सर्जन में 3 ग्राम प्रति किमी की राहत दी गई है. मारुति ने स्पष्ट किया कि 909 किलो की यह सीमा कंपनी ने नहीं, बल्कि रेगुलेटर ने तय की है.
Tata और Mahindra का विरोध
टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियां इस वजन आधारित छूट का विरोध कर रही हैं. उनका कहना है कि इस नियम से उन कंपनियों को फायदा मिलेगा जिनकी गाड़ियों का बड़ा हिस्सा 909 किलो से नीचे है. टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के MD & CEO शैलेश चंद्र ने कहा, “CAFE नियमों का उद्देश्य है कि सभी कंपनियां पूरे पोर्टफोलियो में ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाएं. हर कंपनी को अपने बेड़े के हिसाब से लक्ष्य पूरे करने चाहिए.”
क्या है मारुति का तर्क?
मारुति सुजुकी का कहना है कि, छोटी कारें अपने आप कम उत्सर्जन करती हैं. वजन आधारित छूट दुनिया के 90 फीसदी बाजारों में लागू है. चीन, यूरोप, अमेरिका, जापान और कोरिया में भी छोटे वाहनों को राहत मिलती है. कंपनी का दावा है कि यह राहत मनमानी नहीं, बल्कि व्यावहारिक है.
छोटी कारें बंद होने की चेतावनी
राहुल भारती ने कहा कि अगर वजन आधारित छूट हटा दी गई, तो छोटे मॉडल बनाना नियमों के हिसाब से असंभव हो जाएगा. उन्होंने कहा, “ऐसी छोटी कारें, जो सबसे कम CO2 उत्सर्जन करती हैं, उन्हें भी CAFE नियमों के दबाव में बंद करना पड़े, यह सही नहीं है. इसलिए लक्ष्य मुश्किल हो, लेकिन यथार्थवादी भी हों.”
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