Budget 2026: 12 लाख पर जीरो टैक्स की तरह क्या इस बार TDS पर मिलेगा तोहफा, 6 स्लैब और 20% तक रेट से मिडिल क्लास परेशान
1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट से मिडिल क्लास को एक बार फिर बड़ी राहत की उम्मीद है. टैक्स फ्री आय सीमा बढ़ाने और GST कटौती के बाद अब नजरें टीडीएस स्लैब पर टिकी हैं. सरकार से अपेक्षा है कि टीडीएस दरों और नियमों को सरल बनाकर आम टैक्स पेयर्स की उलझन कम की जाएगी.
TDS Rate Cut Expected in Budget 2026: 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश करने वाली हैं. पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री करके मिडिल क्लास को बड़ी राहत दी थी. इसके साथ ही सितंबर-अक्टूबर में GST दरों में कटौती कर एक और तोहफा दिया गया था.
अब आम जनता को टीडीएस के जटिल जाल से मुक्ति की उम्मीद है. इस वित्त वर्ष में लोगों की सरकार से यही अपेक्षा है कि टीडीएस स्लैब को सरल और कम किया जाए. मौजूदा समय में विभिन्न प्रकार के लेन-देन पर भारत के नागरिकों को छह तरह के टीडीएस देने पड़ते हैं. यदि बजट में इसे सरल बनाने को लेकर कोई घोषणा होती है, तो इससे न केवल दरें कम होंगी, बल्कि इसे समझना भी आसान हो जाएगा.
TDS की दरें 6 से घटाकर दो करने का प्रस्ताव
फिलहाल आयकर कानून में भारत के निवासी के लिए टीडीएस की छह अलग-अलग दरें लागू हैं. ये 0.1%, 1%, 2%, 5%, 10% और 20% हैं. इन दरों की वजह से कई बार भ्रम होता है और गलत दर लगाने की शिकायतें आती हैं. सुझाव है कि इन सबको हटाकर केवल दो दरें रखी जाएं – 1% और 5%. बाकी सभी मामलों में इन्हीं दरों को लागू किया जाए, जिससे नियम आसान हो जाए और विवाद कम हों.
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यहां जानें – कहां लगती है TDS की कितनी दर
विवाद वाली सीमाओं को एक समान रखने की मांग
कई टीडीएस नियमों में अलग-अलग थ्रेशोल्ड लिमिट होने से यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि कौन सी दर लगेगी. इससे टैक्सपेयर और विभाग के बीच अक्सर मतभेद हो जाता है. इसलिए जिन मामलों में दर तय करने को लेकर ज्यादा विवाद होते हैं, उन सभी के लिए एक ही सीमा रखी जाए. इससे गलतियां कम होंगी और नियमों का पालन आसान हो जाएगा.
ई-लेजर सिस्टम लाने का सुझाव
एक और महत्वपूर्ण सिफारिश यह है कि GST की तरह ही टीडीएस और टीसीएस के क्रेडिट को साल-दर-साल ई-लेजर में दर्ज किया जाए. इस व्यवस्था से एडवांस टैक्स, टीडीएस/टीसीएस का पूरा हिसाब एक जगह दिखेगा. अगर किसी साल टैक्स से ज्यादा क्रेडिट बचेगा, तो उसे अगले साल इस्तेमाल किया जा सकेगा या रिफंड मिल सकेगा. इससे टैक्सपेयर और विभाग के बीच काम तेजी से चलेगा.
क्या है ई-लेजर सिस्टम?
ई-लेजर सिस्टम एक डिजिटल लेखा-जोखा व्यवस्था है, जिसमें सभी वित्तीय लेन-देन जैसे क्रेडिट और डेबिट को कंप्यूटर या ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से दर्ज और सुरक्षित किया जाता है. यह पारंपरिक कागजी बही-खाते का आधुनिक रूप है, जिसमें तारीख के साथ साल-दर-साल रिकॉर्ड रखना आसान होता है.
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