GST के बाद अब कस्टम ड्यूटी बदलेगी मोदी सरकार! सस्ता होगा आयात, घटेंगे मुकदमे, बजट में हो सकता है ऐलान
GST दरों में बदलाव के बाद केंद्र सरकार कस्टम्स ड्यूटी सिस्टम को सरल बनाने की तैयारी में है. 8 स्लैब्स को घटाकर 5 या 6 करने की योजना से आयातित सामान सस्ता हो सकता है. इससे न केवल आम लोगों की जेब पर असर पड़ेगा, बल्कि व्यापारिक विवाद कम होंगे और इज ऑफ डूइंग बिजनेस को भी बढ़ावा मिलेगा.
Customs Duty Slab: GST रेट में बदलाव के बाद केंद्र सरकार कस्टम्स ड्यूटी सिस्टम को सरल बनाने की योजना पर काम कर रही है. जिस तरह GST के चार स्लैब को घटाकर दो कर दिए गए उसी तरह के बदलाव यहां भी दिख सकते हैं. फिलहाल कस्टम्स ड्यूटी में 8 अलग-अलग स्लैब्स हैं, जिन्हें घटाकर 5 या 6 स्लैब्स करने पर विचार किया जा रहा है. इसका असर आपकी जेब पर भी पड़ेगा. विदेश से आने वाले सामान पर कम टैक्स लगने से उसकी कीमत बाजार में कम होगी, जिससे सामान सस्ते होंगे. साथ ही कस्टम से जुड़े विवादों को सुलझानें में भी सरकार को मदद मिलेगी. वित्त वर्ष 2026-27 के पेश होने वाले बजट में इसका ऐलान हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 3-4 महीनों से इस दिशा में प्रयास जारी हैं.
सुधार की जरूरत क्यों महसूस की गई?
इस सुधार का मुख्य उद्देश्य कस्टम्स क्लासिफिकेशन से जुड़े विवादों को कम करना, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को दुरुस्त करना और अनावश्यक छूटों को खत्म करना है. बीते दो वर्षों से सरकार कस्टम्स फ्रेमवर्क को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दे रही है, जिसमें स्लैब्स की संख्या घटाना और गैर-जरूरी छूटों को हटाना शामिल है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले बजट में कस्टम्स ड्यूटी में बड़े बदलाव किए गए थे और अब स्लैब्स को और घटाकर 5–6 करने की गुंजाइश देखी जा रही है.
व्यापार समझौते और डिजिटल सिस्टम की भूमिका
भारत कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत कर रहा है और कुछ देशों के साथ समझौते पहले ही हो चुके हैं. ऐसे में कस्टम्स ड्यूटी में सुधार इस बात का संकेत है कि सरकार व्यापार वार्ताओं में किसी तरह की बाधा नहीं आने देना चाहती. सेंट्रल बोर्ड ऑफ इंडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) नई GST व्यवस्था के साथ कस्टम्स ड्यूटी को जोड़कर एक सरल और डिजिटल सिस्टम विकसित करने पर काम कर रहा है. साथ ही, सरकार व्यापारियों की शिकायतों को दूर करने के लिए भी प्रयास कर रही है.
SEZ और मुकदमेबाजी से जुड़े सुधार
सरकार स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स (SEZ) और घरेलू क्षेत्रों के बीच ड्यूटी स्ट्रक्चर को नए सिरे से परिभाषित करने की योजना बना रही है. यह प्रस्तावित बदलाव व्यापक SEZ सुधारों का हिस्सा है. कस्टम्स क्लासिफिकेशन से जुड़े विवाद मुकदमेबाजी का बड़ा कारण हैं, जिन्हें कम करना सरकार की प्राथमिकता है. संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 तक 75,592 कस्टम्स मामले लंबित थे, जिनमें लगभग 24,016.20 करोड़ रुपये की वसूली बाकी थी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने संकेत दिया था कि कस्टम्स ड्यूटी को आसान बनाना सरकार के अगले बड़े सुधार एजेंडे का अहम हिस्सा होगा.
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