पेमेंट सेक्टर में नहीं उतरेगी Groww, लाइसेंस किया सरेंडर; मुख्य कारोबार पर करेगी फोकस
बेंगलुरु की इस फिनटेक कंपनी ने बिना किसी औपचारिक घोषणा के अपना PA लाइसेंस वापस ले लिया. यह कदम पेमेंट इंटरमीडियरी के तौर पर काम करने से हटकर एक रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है.
Groww PA Licence: स्टॉक ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म Groww ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मंजूरी मिलने के दो साल बाद, अपना पेमेंट एग्रीगेटर (PA) लाइसेंस सरेंडर करके पेमेंट सेक्टर से बाहर निकलने का फैसला किया है. ‘The Head and Tale’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु की इस फिनटेक कंपनी ने बिना किसी औपचारिक घोषणा के अपना PA लाइसेंस वापस ले लिया. यह कदम पेमेंट इंटरमीडियरी के तौर पर काम करने से हटकर एक रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है.
कब मिली थी मंजूरी?
इस फैसले के पीछे की खास वजह अभी साफ नहीं है, क्योंकि Groww ने सार्वजनिक तौर पर यह नहीं बताया है कि उसने ऐसा कदम क्यों उठाया. इस स्टॉकब्रोकर को अप्रैल 2024 में RBI से अपनी पेमेंट ब्रॉन्च, Groww Pay के लिए मंजूरी मिली थी, जिससे उसे मर्चेंट्स को जोड़ने और एक पेमेंट एग्रीगेटर के तौर पर सीधे ट्रांजेक्शन प्रोसेस करने की अनुमति मिल गई थी.
Groww का ध्यान अब अपने मुख्य कारोबार पर होगा
Groww ने 2023 में एक UPI ऐप के साथ पेमेंट्स सेक्टर में कदम रखा. इस ऐप की मदद से ग्राहक अपने बिलों का भुगतान, रिचार्ज और क्रेडिट कार्ड के बिल चुका सकते हैं. Groww के इस नए कदम से यह भी संकेत मिलता है कि अब उसका ध्यान फिर से अपने मुख्य ब्रोकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार पर केंद्रित हो गया है, जिसमें उसने पिछले कुछ सालों में तेजी से तरक्की की है.
लाइसेंस के लिए जरूरी नेटवर्थ
भारत में फिनटेक कंपनियों के लिए डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए पेमेंट एग्रीगेटर (PA) लाइसेंस होना जरूरी है. इसके लिए कम से कम 25 करोड़ रुपये की नेट वर्थ, RBI की मंजूरी और KYC/AML मानकों का सख्ती से पालन करना जरूरी है.
Groww, जिसकी पेरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures Ltd है, 12 नवंबर 2025 को आधिकारिक तौर पर पब्लिक हो गई और दोनों स्टॉक एक्सचेंजों- NSE और BSE पर लिस्ट हुई. 6,632.3 करोड़ रुपये का यह IPO 4 नवंबर से 7 नवंबर 2025 तक पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था, जिसका प्राइस बैंड 95–100 रुपये प्रति शेयर था. आखिरकार इसकी शुरुआत प्रीमियम पर हुई.
कई कंपनियों ने सरेंडर किया है लाइसेंस
Groww अकेली ऐसी कंपनी नहीं है जिसने PA या वॉलेट लाइसेंस छोड़ा है. इससे पहले 2024 में, फूड डिलीवरी की दिग्गज कंपनी Zomato ने भी अपना पेमेंट एग्रीगेटर और वॉलेट लाइसेंस सरेंडर कर दिया था.
Zomato, जिसकी पेरेंट कंपनी Eternal है, को 2022 में RBI से मंजूरी मिल गई थी, लेकिन उसने कोई खास वजह बताए बिना इस सेगमेंट से बाहर निकलने का फैसला किया, क्योंकि वह फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स बिजनेस पर अपना फ़ोकस बढ़ा रहा थी.
रेगुलेटरी माहौल में आ रहा बदलाव
ये सभी घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहे हैं जब पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए रेगुलेटरी माहौल में बदलाव आ रहे हैं. 2021 और 2023 के बीच, RBI ने अधिक सख़्त रवैया अपनाया, जब कई आवेदनों में देरी हुई या कंप्लायंस में कमियों के कारण उन्हें वापस भेज दिया गया. हालांकि, रेगुलेटर ने 2025 में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी दिखाई है, मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाया है और ज्यादा कंपनियों को पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए रेगुलेटरी फ़्रेमवर्क में काम करने की अनुमति दी है.
Entrackr की एक रिपोर्ट के अनुसार, तब से सेंट्रल बैंक ने मंजूरी की प्रक्रिया तेज कर दी है और Paytm, Razorpay, PayU, Pine Labs, Easebuzz और Airpay जैसे प्लेयर्स को ऑनलाइन, ऑफलाइन और क्रॉस-बॉर्डर कैटेगरी में लाइसेंस दिए हैं.
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