IDBI बैंक के प्राइवेटाइजेशन में तेजी, सरकार ने शुरू की फाइनेंशियल बिड; मार्च 2026 तक हो सकता है बड़ा ऐलान
IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया में तेजी आ गई है. केंद्र सरकार ने बैंक में हिस्सेदारी बेचने के लिए फाइनेंशियल बिड इनवाइट की हैं. सरकार और LIC मिलकर 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की योजना पर काम कर रही हैं. इसकी अनुमानित वैल्यू करीब 72000 करोड़ रुपये है. सरकार मार्च 2026 तक सफल बोलीदाता का ऐलान कर सकती है.
IDBI Bank Disinvestment: IDBI बैंक के प्राइवेटाइजेशन की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. केंद्र सरकार ने बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए फाइनेंशियल बिड आमंत्रित कर दी हैं. लंबे समय से अटकी इस प्रक्रिया में अब तेजी दिखाई दे रही है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक सभी जरूरी रेगुलेटरी और सुरक्षा मंजूरी पूरी हो चुकी हैं. सरकार मार्च 2026 तक सफल बोली लगाने वाले के नाम का ऐलान कर सकती है. यह सौदा भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े डिसइनवेस्टमेंट सौदों में शामिल माना जा रहा है.
सरकार कितनी हिस्सेदारी बेचेंगी
प्रस्तावित डिसइनवेस्टमेंट योजना के तहत केंद्र सरकार IDBI बैंक में अपनी 30.48 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री के लिए रखेगी. मौजूदा बाजार भाव के आधार पर इसकी कीमत करीब 36000 करोड़ रुपये आंकी जा रही है. इसके साथ ही जीवन बीमा निगम यानी LIC भी बैंक में अपनी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी. इस तरह कुल मिलाकर 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री पर होगी. दोनों हिस्सेदारियों की कुल वैल्यू लगभग 72000 करोड़ रुपये मानी जा रही है.
कौन हैं IDBI बैंक के प्रमुख दावेदार
IDBI बैंक के लिए कुछ बड़े और मजबूत निवेशकों की दौड़ मानी जा रही है. फेयरफैक्स फाइनेंशियल जिसके प्रमुख प्रेम वत्सा हैं इस सौदे के प्रमुख दावेदारों में शामिल है. इसके अलावा प्राइवेट सेक्टर का बड़ा बैंक कोटक महिंद्रा बैंक भी इस रेस में आगे माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार इन दोनों की ओर से सौदे को लेकर गंभीर रुचि दिखाई गई है. हालांकि अंतिम फैसला फाइनेंशियल बोली और शर्तों के आधार पर किया जाएगा.
एमिरेट्स NBD को क्यों माना जा रहा है बाहर
एमिरेट्स NBD ने हाल ही में RBL बैंक में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने का इरादा जताया है. इस सौदे की वैल्यू करीब 27000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बड़े सौदे के बाद एमिरेट्स NBD का IDBI बैंक में निवेश करना मुश्किल हो सकता है. एक साथ दो बड़े बैंक सौदों में शामिल होना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा. इसी वजह से एमिरेट्स NBD को अब इस रेस से बाहर माना जा रहा है.
कब शुरू हुई थी डिसइनवेस्टमेंट प्रक्रिया
IDBI बैंक के डिसइनवेस्टमेंट की प्रक्रिया 7 जनवरी 2023 को शुरू हुई थी. उस समय निवेश और पब्लिक प्रॉपटी मैनेजमेंट डिपॉर्टमेंट को कई संभावित निवेशकों से रुचि पत्र मिले थे. इसके बाद मामला जांच और रेगुलेटरी मंजूरियों के चरणों से गुजरा. प्रक्रिया में समय जरूर लगा लेकिन अब यह अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. फाइनेंशियल बिड इनवाइट होना इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
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कितनी आमदनी की उम्मीद
केंद्र सरकार ने डिसइनवेस्टमेंट से जुड़ा कोई अलग लक्ष्य तय नहीं किया है. अब हिस्सेदारी बिक्री से होने वाली इनकम को अन्य कैपिटल रिसीट के तहत जोड़ा जाता है. चालू वित्त वर्ष में अब तक सरकार को डिसइनवेस्टमेंट से करीब 8768 करोड़ रुपये मिले हैं. IDBI बैंक का यह सौदा पूरा होने पर यह आंकड़ा काफी बढ़ सकता है. इसलिए यह सौदा सरकार के लिए वित्तीय और रणनीतिक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है.
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