टैरिफ झटकों के बीच भारत पर बढ़ा IMF का भरोसा, FY2026 में 7.3% की रफ्तार से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था
वैश्विक ट्रेड टेंशन और टैरिफ अनिश्चितताओं के बावजूद IMF ने भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत बताते हुए 2025 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.3 फीसदी कर दिया है. बेहतर कॉरपोरेट कमाई, निवेश में सुधार और AI सेक्टर से मिल रहे सपोर्ट को इसकी बड़ी वजह माना गया है.
IMF India Growth Outlook: वैश्विक व्यापार तनाव और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने मजबूत भरोसा जताया है. IMF ने फिसकल 2025-26 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अक्टूबर के अनुमान को 0.7 पर्सेंट पॉइन्ट से बढ़ाकर 7.3 फीसदी कर दिया है. यह संशोधन मुख्य रूप से कॉरपोरेट सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन, तीसरी तिमाही में उम्मीद से ज्यादा मुनाफे और चौथी तिमाही में मजबूत आर्थिक गतिविधियों के संकेतों को देखते हुए किया गया है.
बेहतर हुई स्थिति?
IMF की ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले साल जिन दबावों का सामना किया था, उनमें अब धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिख रहे हैं. वर्ष 2024 के दौरान कॉरपोरेट आय में आई सुस्ती ने शेयर बाजार और निवेशकों की धारणा पर असर डाला था. विदेशी निवेशकों की निकासी, ऊंचे मार्केट वैल्यूएशन और अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के चलते निर्यात को लेकर चिंता बनी हुई थी. इन सभी कारणों से आर्थिक माहौल पर दबाव बढ़ा था.
कॉरपोरेट कमाई में दिखी बढ़ोतरी
हालांकि अब स्थिति बदलती नजर आ रही है. IMF का मानना है कि कॉरपोरेट कमाई में दोबारा मजबूती आने से अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल रही है. मुनाफे में सुधार के संकेत निवेशकों का भरोसा लौटाने में मदद करेंगे, जिससे बाजार में स्थिरता आएगी और आने वाले समय में विदेशी पूंजी के दोबारा प्रवाह की संभावनाएं बढ़ेंगी. IMF ने इसे भारत की अर्थव्यवस्था में उभरती “ग्रीन शूट्स” यानी सुधार के शुरुआती संकेत बताया है.
AI का भी अहम रोल
IMF ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्लोबल लेवल पर अर्थव्यवस्था ने टैरिफ झटकों के शुरुआती असर को काफी हद तक झेल लिया है. संस्था के अनुसार, साल 2025 में वैश्विक आर्थिक विकास दर 3.3 फीसदी पर बनी रह सकती है, जो पहले के अनुमानों से बेहतर है. इसमें अमेरिका और चीन की अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका अहम मानी जा रही है. वर्ष 2027 के लिए वैश्विक ग्रोथ का अनुमान फिलहाल स्थिर रखा गया है. रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भी वैश्विक आर्थिक मजबूती का एक बड़ा कारण बताया गया है.
IMF के मुताबिक, तकनीक और आईटी सेक्टर में हो रहा निवेश वैश्विक अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है. अमेरिका में आईटी निवेश का स्तर वर्ष 2001 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है, जिससे बिजनेस इनवेस्टमेंट और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बल मिला है. इसका फायदा एशियाई देशों, खासकर टेक्नोलॉजी एक्सपोर्ट करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को भी मिल रहा है.
महंगाई को लेकर भी राहत की खबर!
IMF का कहना है कि दुनियाभर में कंपनियों की ओर से AI के विकास में बढ़ता पूंजी निवेश आर्थिक लचीलापन बनाए रखने में मदद कर रहा है. इसके साथ ही व्यापारिक तनावों में कमी, अपेक्षा से ज्यादा सरकारी प्रोत्साहन, अनुकूल वित्तीय हालात और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बेहतर नीतिगत ढांचे ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभालकर रखा है. महंगाई को लेकर भी IMF ने राहत की बात कही है.
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर हेडलाइन महंगाई दर 2025 में करीब 4.1 फीसदी रहने के बाद 2026 में घटकर 3.8 फीसदी और 2027 में 3.4 फीसदी तक आ सकती है. वहीं भारत में महंगाई दर में भी 2025 के बाद साफ गिरावट देखने की उम्मीद है, खासतौर पर खाद्य कीमतों के नरम रहने से यह लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है.
रिस्क भी हैं शामिल
हालांकि IMF ने कुछ रिस्क की ओर भी इशारा किया है. संस्था ने चेताया है कि AI सेक्टर में ऊंचे वैल्यूएशन और मुनाफे को लेकर अगर निराशा बढ़ती है तो निवेशकों की भावना पर नेगेटिव असर पड़ सकता है. इसके अलावा, अमेरिकी शेयर बाजार में तेज गिरावट आने की स्थिति में वैश्विक स्तर पर संपत्ति में कमी, खपत में गिरावट और उभरते तथा गरीब देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है.
IMF ने यह भी कहा है कि अगर व्यापार, घरेलू या जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ते हैं, साथ ही राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक कर्ज ऊंचा बना रहता है, तो इससे वैश्विक अनिश्चितता लंबी खिंच सकती है. इसका असर वित्तीय बाजारों, सप्लाई चेन और कमोडिटी कीमतों पर पड़ेगा, जिससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर नेगेटिव असर पड़ सकता है.
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