इंडिया-EU क्यों कर रहे हैं मदर ऑफ ऑल डील्स, कितनी है GDP, कितने कमाते हैं लोग और कौन हैं दिग्गज कंपनियां

भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित FTA को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है. भारत की मजबूत GDP, बड़ा कंज्यूमर मार्केट, मैन्युफैक्चरिंग ताकत और दिग्गज कंपनियां EU के लिए बड़े निवेश और ट्रेड अवसर पैदा करती हैं.

India-EU डील को “Mother of All Deals” कहा जा रहा है. Image Credit: CANVA

Mother of All Deals: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 27 फरवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) होने की उम्मीद है. इस डील को ग्लोबल लेवल पर ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है. अमेरिका के टैरिफ दबाव के बीच हो रही इस डील से दोनों पक्षों को बड़ा फायदा मिलने की संभावना है. भारत के पास $4.13 ट्रिलियन की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, बड़ा कंज्यूमर मार्केट, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग बेस और भविष्य की जबरदस्त ग्रोथ क्षमता है. वहीं $22.52 ट्रिलियन GDP वाला यूरोपीय संघ भारत को एक ऐसे रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है, जहां लॉन्ग-टर्म निवेश, एक्सपोर्ट और टेक्नोलॉजी सहयोग के बड़े अवसर मौजूद हैं.

टॉप-5 इकोनॉमी में जगह

भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. साल 2024 में भारत की कुल GDP करीब $ 4.13 रही. वहीं, प्रति व्यक्ति GDP लगभग 2,695 डॉलर है. वहीं EU की पर कैपिटा जीडीपी 39,710 यूरो (लगभग 41,000-49,000 अमेरिकी डॉलर के बीच) है. भले ही भारत की पर कैपिटा इनकम विकसित देशों से कम हो, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था का कुल साइज और तेज ग्रोथ रेट EU के लिए इसे बेहद आकर्षक बनाता है. यही कारण है कि यूरोपीय कंपनियां भारत को भविष्य के बड़े बाजार के रूप में देख रही हैं.

EU के लिए भरोसे का संकेत

2025 में भारत की महंगाई दर करीब 4.2% रही. यह स्तर न तो बहुत ज्यादा है और न ही अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक माना जाता है. अगर इसकी तुलना करें तो उसी साल EU में औसत महंगाई लगभग 2.4%, जबकि अमेरिका में 2.7% रही. भारत में कंट्रोल महंगाई यह दिखाती है कि देश की आर्थिक नीतियां स्थिर हैं, जो किसी भी बड़े ट्रेड एग्रीमेंट के लिए जरूरी शर्त मानी जाती है.

कम कॉस्ट प्रोडक्शन से फायदा

भारत में औसतन 221 डॉलर प्रति व्यक्ति (2023-24) मासिक इनकम है, जो अमेरिका जैसे देशों से काफी कम है. हालांकि, भारत में कंज्यूमर गुड्स की कीमतें अमेरिका की तुलना में करीब 76% कम हैं. इसके बावजूद, आंकड़ों के अनुसार कम आय की पूरी भरपाई सस्ते दाम नहीं कर पाते. यही वजह है कि EU के लिए भारत एक ऐसा देश है, जहां कम लागत पर प्रोडक्शन और बड़ा कंज्यूमर बेस दोनों फायदे एक साथ मिलते हैं.

उभरता स्टार्टअप इकोसिस्टम

Global Innovation Index 2025 में भारत 38वें स्थान पर रहा, जिसमें उसे 38.2 अंक मिले. यह रैंकिंग दिखाती है कि भारत अब सिर्फ लो-कॉस्ट इकॉनमी नहीं रहा, बल्कि टेक्नोलॉजी, रिसर्च और इनोवेशन में भी लगातार आगे बढ़ रहा है. EU के लिए यह बड़ा कारण है कि वह भारत के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट वेंचर को बढ़ावा देना चाहता है.

EU के लिए मजबूत बिजनेस पार्टनर

Forbes Global 2000 लिस्ट में भारत की 70 कंपनियां शामिल हैं. Reliance Industries, HDFC Bank, State Bank of India, LIC, ICICI Bank, ONGC, Bharti Airtel, Tata Motors और NTPC जैसी कंपनियां एनर्जी, बैंकिंग, टेलीकॉम और ऑटो सेक्टर में ग्लोबल लेवल पर सक्रिय हैं. ये कंपनियां EU के साथ बड़े पैमाने पर ट्रेड और निवेश को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.

भारत की टॉप ग्लोबल कंपनियां (Forbes Global 2000)

रैंककंपनी का नाममुख्यालय (शहर)कर्मचारीरेवेन्यू (USD)मार्केट वैल्यू (USD)
45Reliance IndustriesMumbai114.10 bn205.91 bn
53HDFC BankMumbai55.70 bn171.09 bn
55State Bank of IndiaMumbai236,22677.53 bn83.43 bn
83Life Insurance Corp. of India (LIC)Mumbai98,661107.19 bn58.60 bn
115ICICI BankMumbai34.84 bn117.09 bn
220Oil & Natural Gas (ONGC)New Delhi26,35278.61 bn36.27 bn
292Axis BankMumbai18.44 bn42.25 bn
317Bharti AirtelNew Delhi77,61919.45 bn121.07 bn
336Tata MotorsMumbai58,44252.95 bn28.22 bn
368NTPCNew Delhi144,93422.22 bn40.44 bn

बड़े सेक्टर में निवेश का अवसर

भारत के प्रमुख आर्थिक सेक्टरों में Textiles, Chemicals, Food Processing, Steel, Cement, Mining, Petroleum, Machinery, Software और Pharmaceuticals शामिल हैं. खासतौर पर Pharma, IT, Green Energy और Auto सेक्टर ऐसे सेक्टर हैं, जहां EU और भारत के हित सबसे ज्यादा मिलते हैं. FTA के जरिए इन सेक्टर्स में टैरिफ कम होने से दोनों पक्षों को बड़ा फायदा हो सकता है.

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ट्रेड, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट से बड़ा फायदा

2024 में भारत का कुल इंपोर्ट करीब 923.6 अरब डॉलर रहा. EU चाहता है कि FTA के जरिए भारत के बाजार में उसकी पहुंच आसान हो और सप्लाई चेन को चीन पर निर्भरता से बाहर लाया जाए. वहीं भारत के लिए यह डील नए एक्सपोर्ट मार्केट, निवेश और रोजगार के अवसर खोल सकती है.

‘Mother of All Deals’ से क्या मतलब

India-EU डील को “Mother of All Deals” इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह सिर्फ ट्रेड एग्रीमेंट नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी है. EU को भारत में भविष्य की ग्रोथ दिखती है, जबकि भारत को EU से टेक्नोलॉजी, कैपिटल और ग्लोबल मार्केट एक्सेस मिलता है. यही कारण है कि यह डील दोनों पक्षों के लिए विन-विन मानी जा रही है.