केरल के इस शहर को कहते हैं ‘गोल्ड कैपिटल ऑफ इंडिया’, पूरे देश में है यहां के गहनों की मांग; जानें कैसे हासिल किया यह मुकाम
भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड कंज्यूमर देशों में शामिल है और इस मांग को पूरा करने में केरल का त्रिशूर सबसे अहम भूमिका निभाता है. सैकड़ों साल पुरानी कारीगरी, हजारों ज्वेलरी वर्कशॉप्स और मजबूत ट्रेड नेटवर्क के चलते त्रिशूर को भारत की गोल्ड कैपिटल कहा जाता है. यहां बनी ब्राइडल और टेंपल ज्वेलरी पूरे दक्षिण भारत में सप्लाई होती है और शहर की अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है.
Gold Capital of India: भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड कंज्यूमर देशों में शामिल है. हर साल देश में 700–800 टन सोने की मांग रहती है, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी ज्वेलरी की होती है. ऐसे में सवाल उठता है कि भारत में सोने की ज्वेलरी का सबसे बड़ा केंद्र कौन-सा है? इसका जवाब है केरल का त्रिशूर (Thrissur), जिसे देशभर में ‘Gold Capital of India’ कहा जाता है. यहां से बनी ज्वेलरी न सिर्फ पूरे दक्षिण भारत बल्कि देश के कई हिस्सों में सप्लाई की जाती है.
क्यों कहलाता है गोल्ड कैपिटल?
त्रिशूर भारत का सबसे बड़ा गोल्ड ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड हब माना जाता है. अनुमान के मुताबिक, भारत में बनने वाली गोल्ड ज्वेलरी का बड़ा हिस्सा केरल से आता है, और इसमें त्रिशूर की भूमिका सबसे अहम है. शहर में सैकड़ों ज्वेलरी वर्कशॉप्स, होलसेल यूनिट्स और हजारों रिटेल शोरूम सक्रिय हैं, जो इसे गोल्ड ट्रेड का पावर सेंटर बनाते हैं.
कारीगरों की पीढ़ियों पुरानी विरासत
त्रिशूर की पहचान यहां के हाई-स्किल्ड कारीगरों से जुड़ी है. कई सुनार परिवार पीढ़ियों से सोने की कारीगरी कर रहे हैं. खासतौर पर ब्राइडल ज्वेलरी, टेंपल ज्वेलरी, पारंपरिक केरल डिजाइन की डिमांड देशभर में रहती है. यहीं की ज्वेलरी को उसकी फिनिशिंग, शुद्धता और डिजाइन के लिए जाना जाता है.
केरल के बीचों-बीच लोकेशन
त्रिशूर केरल के सेंट्रल हिस्से में स्थित है, जिससे पूरे राज्य में गोल्ड की सप्लाई आसान हो जाती है. अच्छी कनेक्टिविटी, मजबूत ट्रेड नेटवर्क और सोने के प्रति सांस्कृतिक लगाव ने इस शहर को नेचुरल गोल्ड हब बना दिया है.
गोल्ड इंडस्ट्री शहर की रीढ़
त्रिशूर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा गोल्ड इंडस्ट्री पर निर्भर है. अनुमान के अनुसार,10 हजार लोग सीधे इस सेक्टर में काम करते हैं. कारीगर, डिजाइनर, ट्रेडर, सेल्स और सपोर्ट स्टाफ को रोजगार मिलता है. यह सेक्टर न सिर्फ लोकल इकॉनमी बल्कि नेशनल गोल्ड ट्रेड में भी बड़ा योगदान देता है.
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ज्वेलरी के लिए मशहूर है त्रिशूर?
त्रिशूर खासतौर पर शादी की भारी ज्वेलरी, मंदिरों में इस्तेमाल होने वाली टेंपल ज्वेलरी,
ट्रेडिशनल साउथ इंडियन डिजाइन और मॉडर्न गोल्ड ऑर्नामेंट्स के लिए फेमस है.शादी और त्योहारों के सीजन में यहां से ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ जाती है.
कैसे बना त्रिशूर गोल्ड ट्रेड का केंद्र?
त्रिशूर का गोल्ड से जुड़ाव सैकड़ों साल पुराना है. पहले यहां पारंपरिक गोल्डस्मिथ कम्युनिटी बसी. बाद में 20वीं सदी में को-ऑपरेटिव बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों के विस्तार ने ज्वेलर्स को लोन और क्रेडिट सपोर्ट दिया. इससे यहां का गोल्ड कारोबार बड़े पैमाने पर फैल गया.
गोल्ड मार्केट में त्रिशूर की भूमिका
दक्षिण भारत के कई बड़े ज्वेलरी ब्रांड और शोरूम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग के लिए त्रिशूर पर निर्भर हैं. भारत दुनिया के टॉप गोल्ड कंज्यूमर देशों में है और इस मांग को पूरा करने में त्रिशूर की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. त्रिशूर सिर्फ केरल का ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के सबसे बड़े गोल्ड ज्वेलरी सेंटर्स में से एक है. यहां की डिज़ाइन ज्वेलरी ट्रेंड तय करती हैं और देशभर के खरीदारों को आकर्षित करती हैं.
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