‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के बीच गणतंत्र दिवस पर चीफ गेस्ट EU के दो खास मेहमान, अंडर में 27 देश और $22 ट्रिलियन की इकोनॉमी; क्या करेंगे ट्रंप
26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाले समारोह में यूरोपीय संघ यानी EU के दो शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे. इसे भारत और यूरोप के रिश्तों में एक बड़े कूटनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है. पहली बार ऐसा होगा जब EU का शीर्ष नेतृत्व एक साथ भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होगा.
Republic Day Chief Guest: भारत का 77वां गणतंत्र दिवस इस बार सिर्फ सैन्य परेड और सांस्कृतिक झांकियों तक सीमित नहीं रहेगा. 26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाले समारोह में यूरोपीय संघ यानी EU के दो शीर्ष नेता मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे. European Commission की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) और European Council के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा (Antonio Costa) भारत आएंगे.
इसे भारत और यूरोप के रिश्तों में एक बड़े कूटनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है. पहली बार ऐसा होगा जब EU का शीर्ष नेतृत्व एक साथ भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होगा. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत और EU के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत तेज हो रही है.
गणतंत्र दिवस के इतिहास में पहली बार
अब तक भारत ने कई देशों के Heads of State और प्रधानमंत्रियों को गणतंत्र दिवस पर बुलाया है. लेकिन 2026 पहली बार होगा जब यूरोपीय संघ का शीर्ष नेतृत्व एक साथ मुख्य अतिथि बनेगा. इससे साफ होता है कि भारत अब EU को अलग-अलग देशों के समूह के बजाय एक बड़े रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है.
इतनी हैं GDP
IMF के आंकड़ों के मुताबिक EU की कुल GDP लगभग 22.52 ट्रिलियन डॉलर है.

भारत-EU रिश्तों के लिए क्यों अहम
इन दोनों नेताओं की मौजूदगी को भारत और यूरोप के रिश्तों में नई मजबूती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. हाल ही में दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-EU व्यापार समझौते को सबसे बड़ा सौदा बताया था. इससे संकेत मिलता है कि दोनों पक्षों के बीच एक बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो सकता है. इस कंट्रोल से यह संदेश भी जाता है कि दोनों पक्ष आर्थिक, तकनीकी, जलवायु, रक्षा और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं.
पुरानी परंपरा है मुख्य अतिथि बुलाने की
साल 1950 से भारत हर साल गणतंत्र दिवस पर किसी विदेशी नेता को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाता रहा है. यह परंपरा भारत की विदेश नीति की दिशा दिखाती है. Cold War के दौर में Non-aligned देशों के नेता आमंत्रित किए जाते थे. हाल के सालों में रणनीतिक साझेदार देशों के प्रमुखों को बुलाया गया है. फ्रांस के राष्ट्रपति साल 2024 में मुख्य अतिथि थे. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा साल 2015 में आए थे. साल 2018 में आसियान देशों के नेताओं को एक साथ बुलाया गया था. साल 2023 में मिस्र के राष्ट्रपति ने समारोह में हिस्सा लिया था.
| साल | मुख्य अतिथि | देश / संस्था |
|---|---|---|
| 1950 | राष्ट्रपति सुकर्णो | इंडोनेशिया |
| 1951 | राजा त्रिभुवन बीर बिक्रम शाह | नेपाल |
| 1954 | राजा जिग्मे दोरजी वांगचुक | भूटान |
| 1955 | गवर्नर जनरल मलिक गुलाम मोहम्मद | पाकिस्तान |
| 1956 | आर. ए. बटलर, कोतारो तनाका | ब्रिटेन, जापान |
| 1957 | मार्शल जॉर्जी झूकोव | सोवियत संघ |
| 1958 | मार्शल ये जियानयिंग | चीन |
| 1959 | प्रिंस फिलिप | ब्रिटेन |
| 1960 | राष्ट्रपति क्लिमेंट वोरोशिलोव | यूएसएसआर |
| 1961 | महारानी एलिजाबेथ द्वितीय | ब्रिटेन |
| 1962 | प्रधानमंत्री विगो कैंपमैन | डेनमार्क |
| 1963 | राजा नोरोदम सिहानूक | कंबोडिया |
| 1964 | लॉर्ड लुई माउंटबेटन | ब्रिटेन |
| 1965 | राना अब्दुल हमीद | पाकिस्तान |
| 1967 | राजा मोहम्मद जाहिर शाह | अफगानिस्तान |
| 1968 | प्रधानमंत्री अलेक्सी कोसिगिन, राष्ट्रपति टीटो | यूएसएसआर, यूगोस्लाविया |
| 1969 | प्रधानमंत्री तोडोर झिवकोव | बुल्गारिया |
| 1970 | राजा बौदुआँ | बेल्जियम |
| 1971 | राष्ट्रपति जूलियस न्येरेरे | तंजानिया |
| 1972 | प्रधानमंत्री शिवसागर रामगुलाम | मॉरीशस |
| 1973 | राष्ट्रपति मोबुतु सेसे सेको | जायरे |
| 1974 | टीटो, सिरिमावो भंडारनायके | यूगोस्लाविया, श्रीलंका |
| 1975 | राष्ट्रपति केनेथ कौंडा | जाम्बिया |
| 1976 | प्रधानमंत्री जैक्स शिराक | फ्रांस |
| 1977 | एडवर्ड गिएरेक | पोलैंड |
| 1978 | राष्ट्रपति पैट्रिक हिलेरी | आयरलैंड |
| 1979 | प्रधानमंत्री मैल्कम फ्रेजर | ऑस्ट्रेलिया |
| 1980 | राष्ट्रपति वैलेरी गिस्कार द’एस्तां | फ्रांस |
| 1981 | राष्ट्रपति जोस लोपेज पोर्तिल्लो | मेक्सिको |
| 1982 | राजा जुआन कार्लोस प्रथम | स्पेन |
| 1983 | राष्ट्रपति शेहू शगारी | नाइजीरिया |
| 1984 | राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक | भूटान |
| 1985 | राष्ट्रपति राउल अल्फोंसिन | अर्जेंटीना |
| 1986 | प्रधानमंत्री एंड्रियास पापांद्रेउ | ग्रीस |
| 1987 | राष्ट्रपति एलन गार्सिया | पेरू |
| 1988 | राष्ट्रपति जूनियस जयवर्धने | श्रीलंका |
| 1989 | गुयेन वान लिन्ह | वियतनाम |
| 1990 | प्रधानमंत्री अनेरूद जुगनौथ | मॉरीशस |
| 1991 | राष्ट्रपति ममून अब्दुल गयूम | मालदीव |
| 1992 | राष्ट्रपति मारियो सोआरेस | पुर्तगाल |
| 1993 | प्रधानमंत्री जॉन मेजर | ब्रिटेन |
| 1994 | प्रधानमंत्री गोह चोक टोंग | सिंगापुर |
| 1995 | राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला | दक्षिण अफ्रीका |
| 1996 | राष्ट्रपति फर्नांडो हेनरिक कार्डोसो | ब्राजील |
| 1997 | प्रधानमंत्री बसेदेव पांडे | त्रिनिदाद और टोबैगो |
| 1998 | राष्ट्रपति जैक्स शिराक | फ्रांस |
| 1999 | राजा बीरेंद्र | नेपाल |
| 2000 | राष्ट्रपति ओलुसेगुन ओबासांजो | नाइजीरिया |
| 2001 | राष्ट्रपति अब्देलअजीज बुतफ्लिका | अल्जीरिया |
| 2002 | राष्ट्रपति कास्सम उतीम | मॉरीशस |
| 2003 | राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी | ईरान |
| 2004 | राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा | ब्राजील |
| 2005 | राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक | भूटान |
| 2006 | राजा अब्दुल्ला बिन अब्दुलअजीज | सऊदी अरब |
| 2007 | राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन | रूस |
| 2008 | राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी | फ्रांस |
| 2009 | राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव | कजाखस्तान |
| 2010 | राष्ट्रपति ली म्युंग-बक | दक्षिण कोरिया |
| 2011 | राष्ट्रपति सुसिलो बंबांग युधोयोनो | इंडोनेशिया |
| 2012 | प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा | थाईलैंड |
| 2013 | राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक | भूटान |
| 2014 | प्रधानमंत्री शिंजो आबे | जापान |
| 2015 | राष्ट्रपति बराक ओबामा | अमेरिका |
| 2016 | राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद | फ्रांस |
| 2017 | क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद | यूएई |
| 2018 | आसियान देश | ASEAN |
| 2019 | राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा | दक्षिण अफ्रीका |
| 2020 | राष्ट्रपति जाइर बोल्सोनारो | ब्राजील |
| 2021 | प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (रद्द) | ब्रिटेन |
| 2023 | राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी | मिस्र |
| 2024 | राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों | फ्रांस |
| 2025 | राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो | इंडोनेशिया |
| 2026 | उर्सुला वॉन डेर लेयेन, एंतोनियो कोस्टा | यूरोपीय संघ |
अब क्या करेंगे ट्रंप
अब सवाल यह है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती नजदीकियों के बीच अमेरिका की अगली चाल क्या होगी. खास तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर सबकी नजर टिकी है. अब तक ट्रंप भारत को एक अहम साझेदार बताते रहे हैं और बेहतर व्यापार समझौते के संकेत भी दे चुके हैं. लेकिन अगर भारत-EU के बीच बड़ी ट्रेड डील आगे बढ़ती है तो अमेरिका अपनी शर्तों और बातचीत की गति पर दोबारा विचार कर सकता है.
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ को हटाने का रास्ता अब खुल सकता है. उनके इस बयान से भारतीय कारोबारियों और सरकार दोनों के लिए उम्मीद जगी है. अभी भारत पर कुल मिलाकर 50 फीसदी तक का अमेरिकी टैरिफ लागू है, जो डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूस से व्यापार करने वाले देशों पर लगाया था.
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