सितंबर से बदलेगा एनर्जी गेम, भारत में शुरू हो सकता है कार्बन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, PPA की सुस्ती को मिलेगी तेजी?
भारत में कार्बन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म सितंबर तक शुरू होने की संभावना है, जिससे रिन्यूएबल एनर्जी को नई गति मिल सकती है. सरकार का मानना है कि इससे PPA की सुस्ती दूर होगी और खासकर कमर्शियल व इंडस्ट्रियल सेगमेंट में ग्रीन एनर्जी को अपनाने में तेजी आएगी.
भारत में रिन्यूएबल एनर्जी को रफ्तार देने के लिए सरकार अब एक नया और अहम रास्ता खोलने जा रही है. कार्बन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, जिसे लंबे समय से ऊर्जा बदलाव का जरूरी औजार माना जा रहा है, इस साल सितंबर तक देश में शुरू होने की संभावना है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न सिर्फ ग्रीन एनर्जी को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि उन अड़चनों को भी दूर किया जा सकेगा, जो अभी पावर परचेज एग्रीमेंट यानी PPA की धीमी रफ्तार की वजह से सामने आ रही हैं.
सितंबर तक शुरू हो सकता है कार्बन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने इंडिया एनर्जी समिट में कहा कि कार्बन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तय समय पर आगे बढ़ रहा है और इसके सितंबर तक चालू होने की पूरी संभावना है. उन्होंने बताया कि यह प्लेटफॉर्म खासतौर पर कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेगमेंट में रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देगा. इससे कंपनियों को कार्बन क्रेडिट के जरिए अतिरिक्त आमदनी का रास्ता मिलेगा, जो ग्रीन प्रोजेक्ट्स को ज्यादा व्यवहारिक बना सकता है.
PPA की सुस्ती बनी बड़ी चुनौती
घनश्याम प्रसाद ने साफ कहा कि फिलहाल रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए PPA साइन नहीं हो रहे हैं. ऐसे में अगर केवल पारंपरिक ढांचे पर भरोसा किया गया, तो बड़े स्तर पर नई क्षमता जोड़ना मुश्किल होगा. इसी वजह से सरकार ऐसे मार्केट-आधारित मॉडल तलाश रही है, जिसमें बाजार खुद ज्यादा और बड़ी क्षमता को सपोर्ट कर सके. कार्बन ट्रेडिंग इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते हिस्से के साथ ग्रिड को संतुलित रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है. CEA चेयरमैन ने बताया कि सरकार एक ऐसी योजना पर काम कर रही है, जिसमें कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपने प्लांट लोड फैक्टर यानी क्षमता उपयोग घटाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा. इसका मकसद यह है कि जब रिन्यूएबल एनर्जी ज्यादा हो, तो थर्मल प्लांट्स लचीले तरीके से उत्पादन घटा सकें और ग्रिड संतुलित रहे.
सरकार का लंबी अवधि का रोडमैप
इस मौके पर ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने कहा कि भारत का ऊर्जा बदलाव अब सिर्फ सपना नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बन चुका है. उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता और 2070 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखा है. फिलहाल देश की कुल बिजली क्षमता 520 गीगावॉट से ज्यादा हो चुकी है, जिसमें आधे से अधिक हिस्सा गैर-फॉसिल स्रोतों से आता है.
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मंत्री ने कहा कि अब सिर्फ क्षमता जोड़ना काफी नहीं है. ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना, एनर्जी स्टोरेज को बढ़ाना, ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी और डिस्कॉम की वित्तीय सेहत सुधारना जरूरी है. साथ ही नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के जरिए भारत वैश्विक स्तर पर नई भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है.
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