नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 9.4% बढ़कर 19.43 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा, जानें- कॉरपोरेट Tax का आंकड़ा

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के बुधवार को जारी डेटा से पता चला कि नेट कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन 14.51 फीसदी बढ़कर 8.90 लाख करोड़ रुपये हो गया. इस फाइनेंशियल ईयर में 10 फरवरी तक ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 4.09 फीसदी बढ़कर 22.78 लाख करोड़ रुपये हो गया.

टैक्स कलेक्शन. Image Credit: tv9Marathi

चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 10 फरवरी तक साल-दर-साल 9.4 फीसदी बढ़कर 19.43 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल इसी समय की तुलना में रेवेन्यू जुटाने में लगातार बढ़ोतरी दिखाता है. यह बढ़ोतरी चालू फाइनेंशियल ईयर के दौरान टैक्स कम्प्लायंस और इकोनॉमिक एक्टिविटी में लगातार तेजी का संकेत देती है.

कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के बुधवार को जारी डेटा से पता चला कि नेट कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन 14.51 फीसदी बढ़कर 8.90 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि नॉन-कॉर्पोरेट, जिसमें लोग और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) शामिल हैं, से टैक्स 5.91 परसेंट बढ़कर लगभग 10.03 लाख करोड़ रुपये हो गया.

सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स

1 अप्रैल से 10 फरवरी के बीच सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स कलेक्शन 50,279 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी समय के मुकाबले लगभग फ्लैट है. इस दौरान टैक्स रिफंड 18.82 फीसदी गिरकर 3.34 लाख करोड़ रुपये हो गया.

ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन

इस फाइनेंशियल ईयर में 10 फरवरी तक ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 4.09 फीसदी बढ़कर 22.78 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसमें ग्रॉस कॉर्पोरेट टैक्स और नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन क्रमशः 10.88 लाख करोड़ रुपये और 11.39 लाख करोड़ रुपये शामिल हैं. चालू फाइनेंशियल ईयर (2025-26) के रिवाइज्ड एस्टिमेट्स (RE) में सरकार ने अपने डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के 24.84 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है.

जीएसटी कलेक्शन

जनवरी के महीने में देश के GST कलेक्शन में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली थी. सरकार के आंकड़े के अनुसार, जनवरी में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 6.2 फीसदी बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया. इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह इंपोर्ट से होने वाली टैक्स इनकम में तेज इजाफा बताया गया.

हालांकि, इस दौरान रिफंड की रकम में कमी दर्ज की गई है. जनवरी में कुल जीएसटी रिफंड 3.1 फीसदी घटकर 22,665 करोड़ रुपये रह गया. रिफंड कम रहने का असर नेट जीएसटी रेवेन्यू पर सकारात्मक रूप से दिखा.

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