10 लाख करोड़ रुपये से बदलेगा देश के सड़क का नक्शा, 30000 किलोमीटर सड़कें बनेंगी फोर लेन: गडकरी
भारत में जल्द ही एक ऐसा बदलाव देखने को मिलेगा, जो न केवल सफर आसान बनाएगा बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था का चेहरा बदल सकता है. सरकार ने एक विशाल योजना पर काम शुरू किया है, जिसकी रकम सुनकर आप भी चौंक जाएंगे. पूरा प्लान जानिए इस रिपोर्ट में...
भारत को मजबूत आर्थिक शक्ति बनाने की दिशा में बुनियादी ढांचे का विस्तार सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और यही सोच केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार 8 मई को एक कार्यक्रम में साझा की. उन्होंने ऐलान किया कि सरकार ने 25,000 से 30,000 किलोमीटर की दो लेन राष्ट्रीय राजमार्गों को फोर लेन में बदलने का फैसला लिया है जिस पर लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा.
इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से बनेगा आर्थिक आधार
गडकरी ने कहा, “मेरा सपना है कि हर साल 5-6 लाख करोड़ रुपये की सड़कों का निर्माण हो.” उन्होंने जोर देकर कहा कि बुनियादी ढांचा न सिर्फ कनेक्टिविटी, बल्कि आर्थिक विकास का इंजन है. नई परियोजनाएं देश को लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खड़ा करेंगी.
गडकरी ने यह भी बताया कि सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) मॉडल को बढ़ावा देगी ताकि भारतीय निवेशकों से पैसे जुटाकर सड़क परियोजनाओं में लगाया जा सके. यह मॉडल म्यूचुअल फंड की तरह होता है जिसमें निवेशकों का पैसा लंबे समय तक रिटर्न देने वाली परिसंपत्तियों में लगाया जाता है.
BOT मॉडल में बड़ा बदलाव
सड़क निर्माण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले BOT मॉडल (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) में सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है. अब सरकार खुद 15 साल तक टोल वसूलेगी और वार्षिक किश्तों (Annuity) में निर्माणकर्ताओं को भुगतान करेगी. साथ ही इन सड़कों का रखरखाव भी 15 साल तक ठेकेदारों द्वारा किया जाएगा.
गडकरी ने कहा कि EPC मॉडल से बनी सड़कों की गुणवत्ता BOT मॉडल की तुलना में कमजोर होती है, इसलिए इस पुराने मॉडल को नए फॉर्म में अपनाया जा रहा है.
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टोल दरों पर सरकार की सख्ती
आयोजन के दौरान गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर टोल 10 फीसदी से अधिक बढ़ता है, तो अतिरिक्त टोल का 50 फीसदी सरकार को शेयर करना होगा. उन्होंने ठेकेदारों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि प्रोजेक्ट्स में “कार्टेल बनाकर ठेके लेने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”
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