पश्चिम एशिया में तनाव के बीच Zepto और PhonePe अपने IPO प्लान पर कायम, गिरते मार्केट में कर रहीं ये काम

निवेशकों के साथ ये बैठकें ऐसे समय में हो रही हैं, जब वैश्विक और घरेलू शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रही है. गिरते बाजार में IPO मार्केट में सुस्ती देखने को मिल रही है. कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से ही भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है.

फोनपे आईपीओ Image Credit: @Money9live

क्विक-कॉमर्स कंपनी Zepto और Walmart के मालिकाना हक वाली फिनटेक कंपनी PhonePe जैसी बड़ी भारतीय कंज्यूमर-टेक कंपनियों ने विदेशी संस्थागत निवेशकों से बातचीत शुरू कर दी है. मनीकंट्रोल ने इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले बताया कि ये कंपनियां अपने-अपने IPO के लिए निवेशकों की मांग का अंदाजा लगाना चाहती हैं.

घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव

निवेशकों के साथ ये बैठकें ऐसे समय में हो रही हैं, जब वैश्विक और घरेलू शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रही है. इसकी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष है, जिसके कारण कच्चे तेल, गैस और अन्य जरूरी चीजों के परिवहन के लिए अहम समुद्री रास्ते बंद हो गए हैं. इस संघर्ष का असर कई अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ भारत में भी सप्लाई चेन में रुकावट और महंगाई बढ़ने की आशंकाएं बढ़ गई हैं.

विदेशी इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के साथ बैठकें

सूत्रों ने बताया कि इन दोनों कंपनियों ने सिंगापुर, हांगकांग, UK और USA जैसे दुनिया के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों के साथ पहले ही बैठकें कर ली हैं. उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भी ये बातचीत जारी रहेगी, क्योंकि कंपनियां निवेशकों की मांग का अंदाजा लगाने के लिए बाजार का मिजाज टटोल रही हैं.

कब आ सकता है पब्लिक ऑफर?

सूत्रों ने आगे बताया कि ये कंपनियां मई या जून के आसपास अपने IPO लाने की योजना बना रही हैं. उन्होंने यह भी कहा कि IPO लाने का समय पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की स्थिति पर निर्भर करेगा. ऊपर बताए गए लोगों में से एक ने कहा कि Zepto जून में अपना IPO लाने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

कंपनी अपने IPO प्लान पर पूरी तेजी से काम कर रही है और इस डील को लॉन्च करने के लिए जून का समय देख रही है. निवेशकों से बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है, यह भी बताया गया कि Zepto अपने कॉम्पिटिटर की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है, उनसे मार्केट शेयर हासिल कर रहा है, और पिछले दो क्वार्टर में इसकी ग्रोथ असल में और तेज हुई है, जो इसे अपने लिस्टेड कॉम्पिटिटर से अलग बनाती है.

मामले की जानकारी रखने वाले दूसरे व्यक्ति ने कहा कि खाड़ी देशों के निवेशक भारतीय IPO में बहुत छोटा हिस्सा होते हैं, इसलिए Zepto और PhonePe जैसे बड़े भारतीय IPO पर उनका संभावित असर सीमित ही रहता है.

खाड़ी देशों में संघर्ष का असर

एक-दो सॉवरेन वेल्थ फंड को छोड़कर, खाड़ी देशों से ऐसे बहुत ज्यादा बड़े निवेशक नहीं हैं जो भारतीय IPO में बहुत अधिक निवेश करते हों. आजकल खाड़ी देशों के अधिकतर निवेशकों के साथ मीटिंग आमतौर पर वीडियो कॉल के जरिए ही होती हैं. इसलिए, इस विवाद का भारतीय IPO की मांग पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ रहा है. ज्यादा अहम बात यह होगी कि यह विवाद कितने समय तक चलता है और इसका ग्लोबल इकोनॉमी पर क्या असर पड़ता है.

कितना बड़ा हो सकता है IPO का साइज?

PhonePe और Zepto के IPO का साइज 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा होने की उम्मीद है. हालांकि, फंड जुटाने की आखिरी रकम और समय-सीमा लॉन्च के समय बाजार के हालात पर निर्भर करेगी. जहां PhonePe को अपने IPO के लिए मार्केट रेगुलेटर, सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से मंजूरी मिल गई है, वहीं Zepto को अभी रेगुलेटर से मंजूरी मिलना बाकी है.

गिरते बाजार में IPO मार्केट में सुस्ती देखने को मिल रही है. कैलेंडर वर्ष की शुरुआत से ही भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है. सेकेंडरी मार्केट में नकारात्मक माहौल का असर प्राइमरी मार्केट पर भी पड़ रहा है.

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