जो फंड ‘धीमे’ माने जाते थे वही बने रिटर्न मशीन, 76% रिटर्न, 14 लाख करोड़ AUM, पैसिव MF क्यों बने निवेशकों की पसंद
कैलेंडर ईयर 2025 में पैसिव म्यूचुअल फंड्स ने जबरदस्त प्रदर्शन किया. कुल 438 पैसिव फंड्स में से 341 फंड्स ने पॉजिटिव रिटर्न दिया. कुछ फंड्स ने तो 76 फीसदी तक का रिटर्न दिया. मेटल, माइनिंग और इंटरनेशनल इक्विटी से जुड़े फंड्स टॉप पर रहे.
Passive mutual funds: साल 2025 में म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए एक नया ट्रेंड साफ दिखा. जिन स्कीम्स को अब तक लोग “धीमी लेकिन सुरक्षित” मानते थे, वही पैसिव म्यूचुअल फंड अचानक चर्चा में आ गए. कुछ पैसिव फंड्स ने 2025 में 70 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया. खासकर गोल्ड, सिल्वर और विदेशी शेयर बाजारों से जुड़े फंड्स ने निवेशकों को चौंकाया.
कम खर्च और बाजार को सीधे ट्रैक करने की वजह से पैसिव फंड्स में निवेश लगातार बढ़ा. नतीजा यह हुआ कि इन फंड्स का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट कई गुना बढ़ गया और करोड़ों नए निवेशक इससे जुड़े. अब सवाल यह है कि जो शानदार रिटर्न 2025 में मिला, क्या वही कहानी 2026 में भी दोहराई जा सकती है. या फिर सिर्फ बीते साल के रिटर्न देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है.
2025 में पैसिव फंड्स का दमदार प्रदर्शन
कैलेंडर ईयर 2025 में पैसिव म्यूचुअल फंड्स ने जबरदस्त प्रदर्शन किया. कुल 438 पैसिव फंड्स में से 341 फंड्स ने पॉजिटिव रिटर्न दिया. कुछ फंड्स ने तो 76 फीसदी तक का रिटर्न दिया. मेटल, माइनिंग और इंटरनेशनल इक्विटी से जुड़े फंड्स टॉप पर रहे. गोल्ड और सिल्वर आधारित ईटीएफ ने भी निवेशकों को अच्छा फायदा पहुंचाया. वहीं भारत के बड़े इंडेक्स जैसे निफ्टी 50 को ट्रैक करने वाले कई फंड्स ने सिंगल डिजिट या सीमित रिटर्न दिया.
कहां हुआ नुकसान
हर पैसिव फंड ने कमाल नहीं किया. रियल्टी सेक्टर से जुड़े पैसिव फंड्स 2025 में सबसे कमजोर रहे. इन फंड्स में 16 से 17 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली. इसके अलावा कुछ मोमेंटम और आईटी-टेलीकॉम आधारित इंडेक्स फंड्स ने भी नेगेटिव रिटर्न दिया. यानी पैसिव फंड सुरक्षित जरूर हैं, लेकिन हर सेक्टर में एक जैसा फायदा नहीं देते.
निवेशकों का भरोसा क्यों बढ़ा
2025 में पैसिव फंड्स में निवेश तेजी से बढ़ा. इन फंड्स का कुल एयूएम बढ़कर करीब 14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. कुछ साल पहले यह आंकड़ा बहुत छोटा था. निवेशकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी और करोड़ों नए फोलियो जुड़े. इसकी सबसे बड़ी वजह कम खर्च, साफ नियम और लंबी अवधि में बाजार के साथ चलने की रणनीति मानी जा रही है.
2026 में क्या रणनीति होनी चाहिए
एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में भी पैसिव निवेश का ट्रेंड बना रह सकता है. भारत में अभी पैसिव फंड्स की हिस्सेदारी कुल म्यूचुअल फंड बाजार में कम है, इसलिए आगे ग्रोथ की गुंजाइश बनी हुई है. हालांकि सिर्फ 2025 के ऊंचे रिटर्न देखकर निवेश करना सही नहीं होगा. हर निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और लक्ष्य को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए. पैसिव फंड्स को पोर्टफोलियो का मजबूत आधार बनाया जा सकता है, लेकिन संतुलन बनाए रखना जरूरी है.
सोर्स: ET
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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