3 महीने बाद लौटी विदेशी खरीदारी, फरवरी में FPIs ने डाली ₹22615 करोड़ की रकम; फिर भी दबाव में बाजार
लगातार तीन महीने तक बिकवाली के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने फरवरी में भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो पिछले 16 महीनों का सबसे बड़ा मासिक इनफ्लो है. हालांकि विदेशी निवेश की वापसी के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी हल्की गिरावट के साथ बंद हुए. आईटी सेक्टर में बिकवाली और वित्तीय व कैपिटल गुड्स में खरीदारी ने सेक्टरवार रुझान में बड़ा अंतर दिखाया.
FPI Net Buyer in Feb: करीब तीन महीने तक लगातार बिकवाली करने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs ने फरवरी में भारतीय शेयर बाजार में दोबारा जोरदार वापसी की. फरवरी के दौरान FPIs शुद्ध खरीदार यानी नेट बायर रहे और उन्होंने भारतीय इक्विटी बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया. यह पिछले 16 महीनों में उनका सबसे बड़ा मासिक निवेश माना जा रहा है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, इससे पहले सितंबर 2024 में विदेशी निवेशकों ने 57,724 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी. उसके बाद से लगातार गिरावट और बिकवाली का दौर चल रहा था, जो अब जाकर फरवरी में टूटा है.
जनवरी-दिसंबर में भारी निकासी के बाद बदला रुख
फरवरी की खरीदारी से पहले विदेशी निवेशकों ने तीन महीनों तक भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाला था-
- जनवरी 2026 में FPIs ने 35,962 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की.
- दिसंबर 2025 में 22,611 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई.
- नवंबर 2025 में भी 3,765 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री हुई थी.
इन लगातार आउटफ्लो ने बाजार की धारणा पर असर डाला था और निवेशकों में सतर्कता बढ़ा दी थी. ऐसे में फरवरी में आई खरीदारी को बाजार के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है.
विदेशी निवेश लौटा, फिर भी बाजार कमजोर
हालांकि विदेशी निवेशकों की वापसी के बावजूद शेयर बाजार का प्रदर्शन उत्साहजनक नहीं रहा. फरवरी के दौरान बीएसई सेंसेक्स में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एनएसई निफ्टी 50 लगभग 0.5 फीसदी फिसल गया. इससे साफ संकेत मिलता है कि बाजार में अभी भी अस्थिरता बनी हुई है और निवेशकों का रुख पूरी तरह भरोसे से भरा नहीं है. वैश्विक आर्थिक हालात, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और जियो पॉलिटिकल टेंशन जैसे कारकों का असर बाजार की चाल पर दिखाई दिया.
सेक्टरवार निवेश में बड़ा अंतर
फरवरी में विदेशी निवेशकों की रणनीति सेक्टर के हिसाब से काफी अलग रही. आईटी सेक्टर में FPIs ने जमकर बिकवाली की. सिर्फ फरवरी के पहले पखवाड़े में ही उन्होंने आईटी कंपनियों के शेयरों में से 10,956 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की. इससे संकेत मिलता है कि टेक सेक्टर को लेकर विदेशी निवेशक अभी सतर्क बने हुए हैं. वहीं दूसरी ओर, वित्तीय सेवाओं और कैपिटल गुड्स सेक्टर में उन्होंने खरीदारी का रुख अपनाया. इन सेक्टरों में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती दिखी, जो यह दर्शाता है कि वे अर्थव्यवस्था से जुड़े कोर और इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित क्षेत्रों में अवसर तलाश रहे हैं.
आगे क्या संकेत?
फरवरी में आई मजबूत विदेशी खरीदारी यह संकेत देती है कि वैश्विक निवेशक भारतीय बाजार को लेकर पूरी तरह नकारात्मक नहीं हैं. हालांकि इंडेक्स का कमजोर प्रदर्शन बताता है कि बाजार में अभी भी चुनौतियां मौजूद हैं. आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या FPIs का यह सकारात्मक रुख बरकरार रहता है या फिर वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों के चलते फिर से उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. फिलहाल, तीन महीने की लगातार बिकवाली के बाद फरवरी की खरीदारी ने बाजार को एक अहम मनोवैज्ञानिक सहारा जरूर दिया है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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