गोल्ड-सिल्वर ETF में तेज उतार-चढ़ाव पर SEBI सख्त, प्राइस बैंड लगाने की तैयारी, रखा प्रस्‍ताव

सोना-चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बाद SEBI ने गोल्ड और सिल्वर ETF पर एक प्राइस बैंड लगाने का प्रस्ताव दिया है. इसमें कूलिंग-ऑफ के साथ चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा सकेगा. नियामक का मकसद बाजार में अस्थिरता कम करना और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

Gold-Silver Price Image Credit: FreePik

Gold and Silver ETF: सोना और चांदी की कीमतों में बीते कुछ समय से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. सबसे ज्‍यादा असर चांदी में देखने को मिला. इसकी कीमतें 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार तक पहुंच गई थी. जिसके चलते सोना-चांदी से जुड़े ETF में भी असर देखने को मिला. निवेशक इसमें दांव लगाने टूट पड़ें. मगर ईटीएफ में हालिया उतार-चढ़ाव के बीच बाजार नियामक SEBI ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी ETF के प्राइस बैंड और सर्किट फिल्टर की समीक्षा शुरू कर दी है. सेबी इसमें प्राइस बैंड लगाने की तैयारी में है.

कितना होगा प्राइस बैंड?

13 फरवरी, शुक्रवार को जारी सात पन्नों के कंसल्टेशन पेपर में SEBI ने गोल्ड और सिल्वर ETF पर ±20% तक का प्राइस बैंड लगाने का प्रस्ताव रखा है. इसके मुताबिक शुरुआती प्राइस बैंड ±6% होगा. अगर यह लिमिट ट्रेडिंग के दौरान पूरी हो जाती है तो 15 मिनट का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू होगा. इसके बाद प्राइस बैंड को 3% के फेज में बढ़ाया जा सकेगा. हालांकि एक दिन में अधिकतम उतार-चढ़ाव ±20% से ज्यादा नहीं हो सकेगा.

कितनी मिलेगी राहत?

SEBI ने यह भी कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अगर सोना-चांदी की कीमतों में 9% से ज्यादा मूवमेंट होता है तो एक्सचेंज 15 मिनट के कूलिंग-ऑफ के साथ चरणबद्ध तरीके से 3% की अतिरिक्त राहत दे सकते हैं, लेकिन कुल दैनिक सीमा ±20% ही रहेगी.

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नियामक ने डेट और इक्विटी इंडेक्स आधारित ETF के लिए भी इसी तरह के ग्रेडेड प्राइस बैंड का प्रस्ताव दिया है. एक दिन में अधिकतम दो बार ही प्राइस बैंड फ्लेक्स किया जा सकेगा. साथ ही बैंड में ढील देने के लिए यह शर्त रखी गई है कि कम से कम 50 ट्रेड पूरे हों, जिनमें 10 यूनिक क्लाइंट कोड और दोनों पक्षों पर तीन ट्रेडिंग मेंबर्स शामिल हों.

क्‍या है मकसद?

SEBI का मानना है कि प्राइस बैंड तय होने से अत्यधिक अस्थिरता के दौर में निवेशकों की सुरक्षा होगी और बाजार में अनुशासन बना रहेगा. इससे निवेशकों के पैसे डूबने का रिस्‍क कम होगा.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.