सोमवार को GST सुधार, H-1B वीजा और अमेरिका के साथ ट्रेड टॉक तय करेंगे बाजार की चाल, IT शेयरों पर रहेगी नजर
Share Market Outlook Monday: लगभग 375 वस्तुओं पर कम जीएसटी दरें लागू होने से सोमवार से रसोई के जरूरी सामान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और उपकरण से लेकर वाहनों तक की कीमतें सस्ती हो जाएंगी. बाजार शुक्रवार देर रात घोषित एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर का वार्षिक शुल्क लगाने के अमेरिकी फैसले पर प्रतिक्रिया देगा.
Share Market Outlook Monday: अमेरिका के एच-1बी वीजा के शुल्क को बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर करने, व्यापार वार्ता और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) दरों में कटौती से सोमवार 22 सितंबर से शुरू होने वाले नए सप्ताह में स्थानीय शेयर बाजार की दिशा तय होगी. इसके अलावा, निवेशक वैश्विक बाजारों के रुझान पर भी नजर रखेंगे. लगभग 375 वस्तुओं पर कम जीएसटी दरें लागू होने से सोमवार से रसोई के जरूरी सामान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और उपकरण से लेकर वाहनों तक की कीमतें सस्ती हो जाएंगी.
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजित मिश्रा ने कहा, ‘इस सप्ताह, बाजार शुक्रवार देर रात घोषित एच-1बी वीजा पर 1,00,000 डॉलर का वार्षिक शुल्क लगाने के अमेरिकी फैसले पर प्रतिक्रिया देगा. जबकि निर्यात पर निर्भर सेक्टर्स पहले से ही शुल्क से संबंधित दबाव का सामना कर रहे हैं. व्यापार वार्ता चल रही है. ऐसे में इस संवेदनशील समय में यह कदम आईटी सेवा निर्यातकों पर और दबाव डाल सकता है.’
एच-1बी वीजा आवेदन शुल्क
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर निवेशक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती के बाद अमेरिकी बाजार के प्रदर्शन पर बारीकी से नजर रखेंगे. भारत के 285 अरब डॉलर के IT सेक्टर्स के लिए अपने सबसे बड़े आउटसोर्सिंग बाजार में मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि अमेरिका ने एच-1बी वीजा आवेदन शुल्क को 1,00,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) तक बढ़ाने का फैसला किया है. आईटी कंपनियों के एपेक्स बॉडी नासकॉम ने चेतावनी दी है कि इससे ‘ऑनशोर’ प्रोजेक्ट के लिए कारोबार की निरंतरता बाधित होगी. ऑनशोर प्रोजेक्ट में संबंधित कंपनी के मुख्य ऑपरेशनल सेक्टर्स में रहकर सेवाएं देनी होती हैं.
बता दें कि एच-1बी वीजा धारकों में 70 फीसदी से अधिक भारतीय टेक प्रोफेशनल हैं.
आईटी कंपनियों के शेयरों में दिख सकती है हलचल
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट प्रवेश गौड़ ने कहा, ‘यह कदम (एच-1बी वीजा आवेदन शुल्क को 1,00,000 डॉलर तक बढ़ाने का अमेरिकी फैसला) अमेरिकी ग्राहकों की लागत में भारी बढ़ोतरी कर सकता है और भारतीय टेक टैलेंट की मांग कम कर सकता है, जिससे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस और विप्रो जैसे बड़े आईटी निर्यातकों की आय पर सीधा असर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि घरेलू मोर्चे पर कारोबारी रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर रखेंगे, जो भारतीय शेयर बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण है.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील
शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 22 सितंबर को आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ व्यापार वार्ता के लिए अमेरिका जाएंगे. इसमें कहा गया है कि प्रतिनिधिमंडल आपसी लाभकारी व्यापार समझौते पर जल्द से जल्द सहमति बनाने के लिए अमेरिकी टीम के साथ चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत करेगा.
16 सितंबर को भारत आए अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अधिकारियों की टीम की पिछली यात्रा के दौरान, व्यापार समझौते के अलग-अलग पहलुओं पर सकारात्मक चर्चा हुई और इस संबंध में प्रयासों को और तेज करने का फैसला किया गया.
उपभोक्ताओं के लिए यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि जीएसटी परिषद ने 22 सितंबर (नवरात्रि के पहले दिन) से जीएसटी दरें कम करने का फैसला किया है.
कारोबारी गतिविधियों पर फोकस
बाजार विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधियों पर भी नजर रखेंगे. एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 390.74 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर खरीदे थे. वैश्विक स्तर पर, अब ध्यान मुख्य रूप से जीडीपी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस पीएमआई और पीसीई प्राइस इंडेक्स जैसे प्रमुख अमेरिकी वृहद आर्थिक आंकड़ों पर रहेगा.
उपभोक्ता मांग पर नजर
पीएल कैपिटल के एडवाइजरी हेड विक्रम कसाट ने कहा, ‘जब भारत त्योहारों के मौसम में प्रवेश कर रहा है, तो सभी की नजर इस बात पर है कि बाजार हालिया जीएसटी दरों में कटौती, उपभोक्ता मांग के बदलते रुझान और आईपीओ की लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया को कैसे देखते हैं, जिसने वैश्विक अस्थिरता के बावजूद प्राइमरी मार्केट की गतिविधियों को मजबूत बनाए रखा है.’
सेंसेक्स और निफ्टी
पिछले सप्ताह, बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 721.53 अंक या 0.88 फीसदी और निफ्टी 213.05 अंक या 0.84 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ.
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