कॉपर में भारी गिरावट, क्या यह सिर्फ कंसोलिडेशन है या बड़ी गिरावट का संकेत? जानिए क्या है एक्सपर्ट की राय
मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर फरवरी कॉन्ट्रैक्ट 1.5 प्रतिशत गिरकर इंट्राडे में 1166 रुपये तक आ गया. मुनाफावसूली तेज होने से गिरावट और बढ़ी. फरवरी कॉपर फ्यूचर्स ने इससे पहले MCX पर 1480.30 रुपये का लाइफटाइम हाई बनाया था.
साल 2025 में जबरदस्त तेजी दिखाने वाला कॉपर अब ठहराव के दौर से गुजर रहा है. अपने हाई से यह धातु करीब 20-21 प्रतिशत फिसल चुकी है. हालांकि बाजार के जानकार इसे ट्रेंड रिवर्सल नहीं, बल्कि अस्थायी कंसोलिडेशन मान रहे हैं. ग्लोबल डिमांड को लेकर चिंता और चीन में लूनर न्यू ईयर की छुट्टियों के चलते कारोबार में सुस्ती ने कीमतों पर दबाव बनाया है. इसके बावजूद लंबी अवधि की तस्वीर अब भी मजबूत बताई जा रही है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
MCX पर फिसला कॉपर
मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर फरवरी कॉन्ट्रैक्ट 1.5 प्रतिशत गिरकर इंट्राडे में 1166 रुपये तक आ गया. मुनाफावसूली तेज होने से गिरावट और बढ़ी. फरवरी कॉपर फ्यूचर्स ने इससे पहले MCX पर 1480.30 रुपये का लाइफटाइम हाई बनाया था. ग्लोबल बाजारों में भी कमजोरी रही. COMEX पर कॉपर 1.6 प्रतिशत गिरा, जबकि लंदन मेटल एक्सचेंज यानी LME पर यह 1.8 प्रतिशत फिसलकर 12813.06 डॉलर प्रति टन पर आ गया.
क्या है एक्सपर्ट की राय
केडिया एडवाइजरी के अमित गुप्ता के मुताबिक, पिछले हफ्ते तांबा (Copper) में 6 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है, क्योंकि COMEX, London Metal Exchange और Shanghai Futures Exchange पर इन्वेंट्री 1 मिलियन टन के ऊपर पहुंच गई, जो 2003 के बाद सबसे ज्यादा है. चीन में मांग कमजोर रहने और अमेरिका में पहले की गई स्टॉकपाइलिंग के कारण मार्केट पर दबाव बना हुआ है.
इंटरनेशनल कॉपर स्टडी ग्रुप ने ग्लोबल सरप्लस बढ़ने की जानकारी दी है, वहीं चीन की अनवर्क्ड कॉपर इम्पोर्ट 2025 में 6.4 फीसदी घट गई, जबकि कंसंट्रेट आयात रिकॉर्ड स्तर पर और रिफाइंड उत्पादन बढ़ा. सप्लाई साइड से चिली और पेरू में माइन प्रोडक्शन कम होना कुछ सपोर्ट देता है. मध्यम अवधि में स्ट्रैटेजिक स्टॉकपाइलिंग और ग्रीन ट्रांज़िशन से बढ़ती मांग पॉजिटिव संकेत देती है, लेकिन निकट अवधि में खपत कम और एक्सचेंज इन्वेंट्री ज्यादा होने से फंडामेंटल दबाव बना हुआ है. तांबा का रुझान कमजोर ही रहेगा जब तक कीमतें 1220 के ऊपर नहीं जातीं. अगर सेलिंग जारी रही तो 1150–1120 का सपोर्ट जोन टेस्ट हो सकता है, जबकि 1220 को पार कर पक्की रूप से ऊपर जाने पर अगला रेसिस्टेंस 1260 होगा.

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