ईरान-इजराइल तनाव से कैसे बदल जाएगा क्रूड ऑयल, गोल्ड-सिल्वर और भारत का शेयर बाजार, जानें डिटेल में
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता युद्ध अब सिर्फ कूटनीतिक संकट नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, सोना-चांदी में तेजी और भारतीय शेयर बाजार में दबाव की आशंकाएं, निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं.
आज, जब मध्य पूर्व में ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष एक खुले युद्ध की शक्ल ले रहा है, जिसमें अमेरिका का समर्थन भी शामिल है. दुनिया के वित्त और कच्चे माल के बाजार झटकों और अनिश्चितता से जूझ रहे हैं. इस भू-राजनीतिक तनाव की लहरें न केवल ऐतिहासिक क्षेत्र तक सिमटी हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल, गोल्ड-सिल्वर की कीमतों और भारत के शेयर बाजार पर भी असर डालेंगी.
अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल- सप्लाई तनाव और कीमतों की बढ़त
भूराजनीतिक जोखिम के कारण कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही ऊपर की ओर बढ़ रही थीं और अब ऐसा माना जा रहा है कि बाजार में जोखिम का प्रीमियम शामिल है. वैश्विक तेल बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 67 प्रति बैरल के आसपास बंद हुई. ब्रेंट क्रूड पहले ही 3 फीसदी उछल चुका है. विश्लेषकों के अनुसार तनाव बढ़ने से कीमतों में और तेज उछाल देखने को मिल सकता है. खासकर अगर खाड़ी में सप्लाई चेन प्रभावित होती है या होर्मुज जलडमरूमध्य से ट्रांसपोर्ट बाधित होती है. कच्चे तेल में तेजी आने से भारतीय बाजार पर भी दबाव बढ़ जाएगा.
भारत जैसे देश, जो अपनी कच्चे तेल की ज़रुरत का लगभग 80-90% आयात मध्य पूर्व से करते हैं, ऐसे में इन कीमतों के बढ़ने का सीधा असर घरेलू पेट्रोल-डीजल पर महंगाई और सरकारी खर्च पर पड़ेगा. हर बार तेल की कीमतों में इजाफा होता है, उसके साथ उपभोक्ता को ईंधन और परिवहन लागत में वृद्धि महसूस होती है, जो आखिरकार महंगाई को भी बढ़ाता है.
गोल्ड-सिल्वर में भी बढ़ेगी तेजी
जैसे-जैसे युद्ध की आशंका बढ़ती है, वैश्विक निवेशक जोखिम से बचने के लिए सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर मुड़ते हैं. सोना और चांदी की कीमतें इस माहौल में तेजी से उभर रही हैं. उदाहरण के तौर पर आज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना लगभग ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा, जबकि चांदी में 3% से अधिक की तेजी देखी गई है.
ऐसे समय में, जब शेयर बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक पूंजी को सेफ-हेवन एसेट्स जैसे गोल्ड और सिल्वर में ले जाने लगते हैं, जिससे इनकी कीमतों में और तेजी आने की संभावना बनी रहती है.
2 मार्च को कैसा रहेगा शेयर बाजार
मिडिल ईस्ट के तनाव का असर सीधे तौर पर भारतीय शेयर बाजारों पर भी दिख सकता है. मार्केट एक्सपर्ट के मुताबिक, निवेशक वैश्विक अस्थिरता के बीच जोखिम भरे निवेशों से बचने का रुख कर सकते हैं, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में दबाव आ सकता है. पिछले ऐसे तनाव के दौर में भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली देखने को मिली थी.
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विशेष रूप से, कच्चे तेल से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बुलिशनेस देखी जा सकती है क्योंकि उच्च तेल कीमतें ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों के लिए रेवेन्यू बढ़ा सकती हैं; वहीं, दूसरी ओर, consumer-oriented और वित्तीय क्षेत्रों में दबाव और बेचैनी बनी रहती है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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