MCX पर चांदी 11000 रुपये प्रति किलो टूटी, 2025 में 147% उछाल के बाद एक दिन में दिखा तेज करेक्शन
बीते साल असाधारण तेजी दिखाने के बाद एक कीमती धातु में अचानक उतार-चढ़ाव बढ़ गया है. मुनाफावसूली, वैश्विक संकेत और तकनीकी स्तरों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों की चाल पर अब सभी की नजर बनी हुई है.
Silver Price Crash: 2025 में रिकॉर्ड तोड़ तेजी दिखाने के बाद चांदी की कीमतों में अब तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. गुरुवार, 8 जनवरी को घरेलू और वैश्विक बाजारों में चांदी पर जबरदस्त बिकवाली का दबाव दिखा. मुनाफावसूली के चलते कीमतें अचानक फिसल गईं और निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई. खास बात यह है कि यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब चांदी बीते साल सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली कमोडिटीज में शामिल रही थी.
MCX पर चांदी में तेज गिरावट
घरेलू बाजार में Multi Commodity Exchange यानी MCX पर चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. 8 जनवरी को चांदी करीब 11,000 रुपये प्रति किलो टूटकर इंट्राडे में 2,40,605 रुपये तक आ गई. मार्च 5 एक्सपायरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स में चार दिन की तेजी का सिलसिला टूट गया और कीमतें 3 फीसदी से ज्यादा गिरकर करीब 2,51,720 रुपये प्रति किलो पर आ गईं. इससे पहले सत्र में चांदी ने 2,59,692 रुपये प्रति किलो का नया ऑल टाइम हाई भी बनाया था.
विदेशी बाजारों में भी चांदी दबाव में दिखी. स्पॉट सिल्वर करीब 2.7 फीसदी गिरकर 76.01 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. हालांकि घरेलू बाजार के मुकाबले गिरावट कुछ कम रही. विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर तकनीकी रुकावट और मुनाफावसूली ने कीमतों पर दबाव बनाया है.
तकनीकी स्तरों पर अटका भाव
बाजार जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 79 डॉलर प्रति औंस के आसपास मजबूत रेजिस्टेंस का सामना कर रही है. इसके ऊपर 82 डॉलर का स्तर अहम माना जा रहा है. जब तक कीमतें इस स्तर के ऊपर टिकती नहीं हैं, तब तक तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. हाल के सत्रों में तेजी और गिरावट की तीव्रता इसी अस्थिरता को दिखाती है.
गौर करने वाली बात यह है कि दिसंबर 2025 के आखिर में चांदी 83.62 डॉलर प्रति औंस के ऑल टाइम हाई तक पहुंच गई थी. पूरे 2025 में चांदी ने करीब 147 फीसदी की जबरदस्त तेजी दिखाई थी. मजबूत औद्योगिक मांग और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी इसकी बड़ी वजह रही. अब उसी तेज उछाल के बाद करेक्शन देखने को मिल रहा है.
सिल्वर ETF में भी सतर्कता
चांदी से जुड़े ETF में भी मिला-जुला रुझान दिखा. कुछ ETF में मामूली बढ़त रही, जबकि कई बड़े सिल्वर ETF में सीमित ही तेजी देखने को मिली. इससे साफ है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं. विश्लेषक लगातार यह चेतावनी देते रहे हैं कि चांदी, सोने के मुकाबले ज्यादा अस्थिर होती है और तेज रैली के बाद इसमें बुलबुले जैसी चाल देखने को मिलती है.
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गिरावट की बड़ी वजह क्या
विशेषज्ञों के अनुसार भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता ने बाजार की चिंता बढ़ाई है. HSBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में चांदी 58 से 88 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकती है. वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump से जुड़ी रूस पर संभावित सख्त पाबंदियों की खबरों ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया है.
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