तोप-मिसाइल-बारूद नहीं, ये 3 कंपनियां भारत को दे रही हैं जंग का नया हथियार; स्टॉक्स पर बनाए रखें नजर

भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से बदल रहा है. हथियारों और तकनीक से आगे अब असली जंग इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर की दुनिया में है. आने वाले वक्त में ऐसी कंपनियां उभर रही हैं, जो देश की सुरक्षा के साथ-साथ रिटर्न में भी कमाल दिखा सकती हैं.

ये 3 भारतीय कंपनियां बदलेंगी युद्ध का खेल Image Credit: Money9 Live

आज जंग सिर्फ जमीन, समुद्र या आसमान पर नहीं लड़ी जाती, बल्कि एक नया रणक्षेत्र खुल चुका है, जो है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम (EMS). यही वह अदृश्य क्षेत्र है जहां दुश्मन के सिग्नल को पकड़ना, बिगाड़ना और नियंत्रित करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उतना ही जरूरी हो गया है जितना किसी मिसाइल, टैंक या लड़ाकू विमान का होना. इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) सिस्टम अब आधुनिक रक्षा का ऐसा हथियार है, जिस पर पूरी दुनिया तेजी से निवेश कर रही है.

भारत के लिए यह चुनौती और भी अहम हो गई है क्योंकि एक तरफ पड़ोसी देश तेजी से अपने रक्षा ढांचे का आधुनिकीकरण कर रहे हैं और दूसरी तरफ नई धमकियां जैसे ड्रोन, हाइपरसोनिक मिसाइलें और साइबर-इलेक्ट्रोमैग्नेटिक हमले उभर कर सामने आ रही हैं. ऐसे में भारतीय सशस्त्र बल अपनी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने में जुटे हैं.

बढ़ते रक्षा निर्यात और नए अवसर

बीते वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे. करीब 210.8 अरब रुपये के निर्यात हुए, जो पिछले साल की तुलना में 32.5% ज्यादा है. छोटे हथियारों से लेकर बख्तरबंद गाड़ियों तक भारतीय रक्षा उद्योग लगातार अपनी पैठ बना रहा है. यही वजह है कि अब इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से जुड़ी कंपनियों में निवेश के बड़े अवसर देखे जा रहे हैं. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में यह सेक्टर कुछ मल्टी-बैगर कंपनियां भी दे सकता है.

ऐसे में आइए जानते हैं तीन प्रमुख भारतीय रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के बारे में, जो इस दौर में निवेशकों और नीति-निर्माताओं की निगाहों में हैं.

Bharat Electronics Ltd (BEL)

    भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) एक सरकारी कंपनी है जो रक्षा और एयरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स के सेक्टर में भारत का प्रमुख चेहरा है. BEL सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और कंपोनेंट्स का निर्माण करती है.

    कंपनी की विशेषज्ञता इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम के चार अहम खंडों में है:

    • रेडार ESM: युद्धपोतों, बड़े विमानों और फाइटर जेट्स के लिए उन्नत सुरक्षा प्रणालियां.
    • ELINT/COMINT/SIGINT: ग्राउंड-बेस्ड मोबाइल सिस्टम, कम्युनिकेशन जैमिंग, सैटेलाइट इंटरसेप्शन और एवियोनिक्स उपकरण.
    • इंटीग्रेटेड EW सिस्टम: युद्धपोतों और बड़े प्लेटफॉर्म्स के लिए संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट.
    • जैमर्स: पोर्टेबल और स्थायी जैमर, जो दुश्मन की संचार प्रणाली को निष्क्रिय करने में सक्षम हैं.

    वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो पिछले पांच वर्षों में BEL की बिक्री 12.9 फीसदी की सालाना औसत दर से बढ़ी है, जबकि मुनाफा 24.2 फीसदी की दर से और तेजी से बढ़ा है. कंपनी का औसत ROE 21.9% और ROCE 29.8% पर स्थिर बना हुआ है.

    21 अगस्त 2025 को BEL ने सेंटरम इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ एक समझौता (MoU) किया है. दोनों मिलकर इलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल्स और सिस्टम तैयार करेंगे, खासकर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और राडार सिस्टम पर फोकस रहेगा. कंपनी के शेयरों ने पांच साल में अपने निवेशकों को 885 फीसदी का मुनाफा दिया है. बीते शुक्रवार यानी 29 अगस्त को कंपनी के शेयर 369 रुपये पर बंद हुए.

    Apollo Micro Systems (AMS)

      अपोलो माइक्रो सिस्टम्स निजी क्षेत्र की एक अग्रणी कंपनी है, जो रक्षा, अंतरिक्ष और होमलैंड सिक्योरिटी के लिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम तैयार करती है.

      AMS की खासियत है रग्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, यानी ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी काम करें. सेना के ग्राउंड-बेस्ड सिस्टम में कंपन, झटके और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रुकावट जैसी चुनौतियां रहती हैं. AMS इन्हें ध्यान में रखकर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर डिजाइन करता है.

      कंपनी का पोर्टफोलियो रग्ड कंप्यूटर, नेटवर्किंग सिस्टम, डेटा स्टोरेज, और सूचना सुरक्षा जैसे समाधान शामिल करता है. 21 अगस्त 2025 को मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी DRDO और अन्य रक्षा पीएसयू से 25.12 करोड़ रुपये के ऑर्डर की सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) बोलीदाता घोषित हुई है. वित्तीय नजरिए से देखें तो AMS की बिक्री पिछले पांच साल में 18% की दर से बढ़ी है और मुनाफा 32.1% की दर से. कंपनी का औसत ROE 5.8% और ROCE 13.7% रहा है.

      कंपनी के शेयरों से बीते पांच साल में निवेशकों ने 1953 फीसदी का मुनाफा दर्ज किया है, वहीं अगर कंपनी के मौजूदा शेयर प्राइस की बात करें तो बीत कारोबारी दिन ये 262 रुपये पर बंद हुआ था.

      Paras Defence And Space

      पारस डिफेंस निजी क्षेत्र की कंपनी है जो रक्षा और अंतरिक्ष के लिए विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक समाधान प्रदान करती है. इसकी विशेषज्ञता हाई-परफॉर्मेंस एम्बेडेड कंप्यूटिंग सिस्टम (HPEC), रग्ड डिस्प्ले, कमान्ड और कंट्रोल कंसोल्स, और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से जुड़े उपकरणों में है.

      इसके प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:

      • मिलिट्री-ग्रेड सिस्टम और कंसोल्स
      • कंप्यूटिंग और डिस्प्ले समाधान
      • मॉड्यूलर हार्डवेयर प्लेटफॉर्म्स
      • सॉफ्टवेयर और प्रोसेसिंग सिस्टम
      • सेंसिंग टेक्नोलॉजीज

      वित्तीय प्रदर्शन के लिहाज से कंपनी की बिक्री 19.9% की औसत दर से बढ़ी है और मुनाफा 25.6% की दर से. ROE 8% और ROCE 13.2% पर स्थिर है.

      26 अगस्त 2025 को पारस डिफेंस को BEL से 45.32 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है. इसमें सिग्नल और डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम तथा मल्टी-सेंसर फ्यूजन सिस्टम की आपूर्ति शामिल है. ये तकनीकें अगली पीढ़ी की एयर डिफेंस क्षमताओं को और मजबूत करेंगी. कंपनी के शेयरों ने बीते पांच साल में 176 फीसदी की कमाई कराई. शुक्रवार को कंपनी के शेयर 648 रुपये पर बंद हुए.

      वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर बाजार 2028 तक 25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र सबसे तेजी से बढ़ रहा है. भारत के लिए यह बड़ा अवसर है क्योंकि सरकार ने 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट इलेक्ट्रॉनिक्स-आधारित आधुनिकीकरण पर रखा है.

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      पिछले एक दशक में भारत के रक्षा निर्यात 30 गुना से अधिक बढ़े हैं और अब 90 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण बेचे जा रहे हैं. ऐसे में BEL, अपोलो माइक्रो सिस्टम्स और पारस डिफेंस जैसी कंपनियां न सिर्फ देश की सुरक्षा को मजबूत कर रही हैं बल्कि निवेशकों के लिए भी नए अवसर खोल रही हैं.

      डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.