21% हिस्सेदारी, 10 साल का भरोसा! Vijay Kedia इस ‘छोटी ऑटो कंपनी’ पर क्यों लगा रहे हैं बड़ा दांव?
दिग्गज निवेशक विजय केडिया की एक कंपनी पर बड़ी हिस्सेदारी ने बाजार का ध्यान खींचा है. केडिया करीब 21 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ Atul Auto पर दांव लगाए हुए हैं. यह कंपनी पहले डीजल तीन पहिया वाहन बनाती थी, लेकिन अब तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रही है.
Autul Auto stake in Vijay Kedia: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों यानी EV का दौर तेजी से बढ़ रहा है. बड़ी कंपनियों के साथ अब छोटी और मिडकैप कंपनियां भी इस बदलाव का हिस्सा बन रही हैं. ऐसे में दिग्गज निवेशक विजय केडिया की एक कंपनी पर बड़ी हिस्सेदारी ने बाजार का ध्यान खींचा है. केडिया करीब 21 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ Atul Auto पर दांव लगाए हुए हैं. यह कंपनी पहले डीजल तीन पहिया वाहन बनाती थी, लेकिन अब तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रही है.
खास बात यह है कि यह कंपनी बड़े शहरों की जगह छोटे शहरों और गांवों पर फोकस कर रही है. यही वजह है कि इसे भारत के “लास्ट माइल डिलीवरी” बाजार में बड़ा खिलाड़ी माना जा रहा है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह कंपनी कैसे EV सेक्टर में बदलाव ला रही है.
केडिया का 10 साल पुराना भरोसा
Vijay Kedia लंबे समय से Atul Auto में निवेश किए हुए हैं. उनकी कुल हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत है. वह ऐसी कंपनियों में निवेश करते हैं जो छोटे आकार की होती हैं लेकिन भविष्य में बड़ा बनने की क्षमता रखती हैं. Atul Auto भी ऐसी ही कंपनी मानी जा रही है. पहले कंपनी का EV बिजनेस अलग कंपनी में था, लेकिन अब उसे मुख्य कंपनी में मिला दिया गया है. इससे कंपनी को फायदा होगा. अब एक ही टीम डीजल और इलेक्ट्रिक दोनों वाहन बेच सकेगी. साथ ही कंपनी को फाइनेंस और खर्च को मैनेज करना आसान होगा.
गांव और छोटे शहरों पर फोकस
Atul Auto का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उसकी पकड़ गांव और छोटे शहरों में मजबूत है. जहां बड़ी कंपनियां कम पहुंच रखती हैं, वहां Atul Auto पहले से मौजूद है. कंपनी दूध, सब्जी और डिलीवरी जैसे कामों के लिए वाहन बनाती है. कंपनी अब ऐसे इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन बना रही है, जो ज्यादा वजन उठा सकते हैं. इसमें मजबूत बैटरी और मोटर का इस्तेमाल किया जा रहा है. कंपनी कोशिश कर रही है कि उसके EV भी उतने ही मजबूत हों जितने उसके पुराने डीजल वाहन थे.
फाइनेंशियल स्थिति और ग्रोथ
कंपनी की बिक्री धीरे-धीरे बढ़ रही है. पिछले कुछ सालों में इसका शेयर करीब 190 रुपये से बढ़कर 500 रुपये तक पहुंच गया है. कंपनी का कर्ज भी कम है, जिससे उसकी फाइनेंशियल स्थिति मजबूत मानी जाती है. हालांकि EV में निवेश की वजह से अभी मुनाफा ज्यादा नहीं है, लेकिन भविष्य में इसके बढ़ने की उम्मीद है.

क्या हैं जोखिम
EV बनाने में बैटरी के लिए लिथियम जैसे महंगे मटेरियल की जरूरत होती है. इनकी कीमत बढ़ने से कंपनी पर असर पड़ सकता है. साथ ही Bajaj और Mahindra जैसी बड़ी कंपनियां भी इस बाजार में मजबूत हैं, जिससे मुकाबला कड़ा है. कंपनी अब भारत के साथ-साथ दूसरे देशों में भी अपने प्रोडक्ट बेचने की योजना बना रही है. इसका लक्ष्य है कि वह टेक्नोलॉजी और बैटरी सिस्टम को बाहर भी बेच सके.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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