ट्रंप के टैरिफ ऐलान से यूरोप में नाराजगी, ग्रीनलैंड विवाद के चलते EU सख्त, ट्रेड डील अटकी!

यूरोपीय यूनियन और अमेरिका के बीच ट्रेड समझौता ग्रीनलैंड विवाद के चलते संकट में है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड का समर्थन करने वाले यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी है. इस पर यूरोप में तीखी प्रतिक्रिया आई है. यूरोपीय संसद के कई नेता अब समझौते को मंजूरी देने के पक्ष में नहीं हैं.

ट्रंप के टैरिफ से भड़का यूरोप. Image Credit: money9live

EU-US Trade Deal: यूरोपीय यूनियन और अमेरिका के बीच हुआ ट्रेड समझौता एक बार फिर विवादों में घिर गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड का समर्थन करने वाले यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद यूरोप में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. यूरोपीय संसद के कई प्रभावशाली नेता अब इस समझौते को मंजूरी देने के पक्ष में नहीं हैं. उनका कहना है कि किसी भी देश की संप्रभुता पर दबाव बनाकर व्यापार नहीं किया जा सकता. इसी कारण EU US ट्रेड डील को फिलहाल रोकने की तैयारी की जा रही है. इसका असर दोनों पक्षों के व्यापारिक रिश्तों पर पड़ सकता है.

ग्रीनलैंड विवाद से बढ़ा तनाव

ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक अर्ध स्वायत्त क्षेत्र है और इसे लेकर ट्रंप के फैसलों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. ट्रंप ने उन यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है जो ग्रीनलैंड के समर्थन में सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा. यूरोपीय नेताओं ने इसे दबाव बनाने की कोशिश बताया है. EU का साफ कहना है कि इस तरह की धमकियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं.

ट्रेड डील रोकने की तैयारी

यूरोपीय संसद के सबसे बड़े राजनीतिक समूह यूरोपियन पीपल्स पार्टी ने इस डील पर आपत्ति जताई है. पार्टी प्रमुख मैनफ्रेड वेबर ने कहा है कि मौजूदा हालात में अमेरिका के साथ ट्रेड समझौते को मंजूरी देना संभव नहीं है. उन्होंने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ घटाने की प्रक्रिया को रोकने की बात कही है. अगर वामपंथी दल भी इसका समर्थन करते हैं तो संसद में पर्याप्त वोट मिल सकते हैं. ऐसे में डील की मंजूरी टलना लगभग तय माना जा रहा है.

ट्रेड डील में क्या शर्तें तय हुई थीं

इस ट्रेड समझौते के तहत अमेरिका ने ज्यादातर यूरोपीय उत्पादों पर 15 फीसदी टैरिफ लगाने पर सहमति जताई थी. इसके बदले यूरोपीय यूनियन ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ खत्म करने का वादा किया था. कुछ कृषि उत्पाद भी इस समझौते में शामिल थे. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ट्रेड वॉर से बचने का रास्ता बताया था. हालांकि कई सांसदों का मानना है कि यह समझौता अमेरिका के पक्ष में ज्यादा झुका हुआ है.

स्टील और एल्युमिनियम टैरिफ से बढ़ी नाराजगी

ट्रेड समझौते के बावजूद अमेरिका ने स्टील और एल्युमिनियम पर 50 फीसदी तक टैरिफ बढ़ा दिया. यह शुल्क सैकड़ों यूरोपीय उत्पादों पर लागू किया गया है. यूरोपीय सांसदों का कहना है कि यह कदम समझौते की भावना के खिलाफ है. इससे यूरोप की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को नुकसान पहुंचा है. इसी वजह से अमेरिका के खिलाफ नाराजगी और गहराती जा रही है.

जवाबी कार्रवाई का विकल्प

यूरोपीय संसद में अब एंटी कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट पर गंभीर चर्चा हो रही है. इसे EU का सबसे मजबूत व्यापारिक हथियार माना जाता है. इसके तहत जवाबी टैरिफ लगाए जा सकते हैं या अमेरिकी टेक कंपनियों पर नए टैक्स लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा निवेश और सरकारी ठेकों पर भी रोक लगाई जा सकती है. अब तक इस हथियार का इस्तेमाल नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात इसके इस्तेमाल की ओर इशारा कर रहे हैं.

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आगे क्या हो सकते हैं हालात

यूरोपीय संसद की ट्रेड कमेटी इस मुद्दे पर जल्द फिर बैठक करने वाली है. ग्रीनलैंड की संप्रभुता को सीधे तौर पर ट्रेड डील से जोड़कर देखा जा रहा है. कई सांसद चाहते हैं कि अमेरिका अपनी टैरिफ धमकियां वापस ले. तभी इस समझौते पर आगे बढ़ा जा सकेगा. फिलहाल EU US ट्रेड डील को लेकर स्थिति अनिश्चित बनी हुई है.