डेडलाइन से पहले ट्रंप की चेतावनी, कहा- आगे नहीं बढ़ेगा सीजफायर; बुधवार तक समझौता नहीं तो ईरान पर फिर होंगे हमले
अमेरिका और ईरान के मध्य बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर तय समयसीमा तक कोई समझौता नहीं होता, तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है. सीजफायर बढ़ाने से इनकार और सख्त रुख ने पश्चिम एशिया की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं.

US Iran Tension and Ceasefire Deadline: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर बुधवार तक कोई समझौता नहीं होता, तो अमेरिका ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वह मौजूदा सीजफायर को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं, जिससे हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं.
ट्रंप ने क्या कहा?
पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वह युद्ध नहीं चाहते, लेकिन ईरान को बातचीत की टेबल पर आना ही होगा. उनके मुताबिक, अगर ईरान समझौता करता है तो वह खुद को फिर से एक मजबूत और स्थिर देश के रूप में स्थापित कर सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर डेडलाइन तक कोई डील नहीं होती, तो अमेरिका हमले फिर से शुरू करने के लिए तैयार है.
ट्रंप का बयान ऐसे समय पर आया है जब दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का दूसरा दौर अनिश्चितता में घिरा हुआ है. इससे पहले अप्रैल के मध्य में हुई पहली बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंच पाते हैं या फिर टकराव और बढ़ेगा.
ईरान को नुकसान पहुंचा चुका है अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि हाल के संघर्ष में अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया है, जिसमें उसकी नौसेना, वायुसेना और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति ने ईरान के अंदर नेतृत्व के स्तर पर बदलाव ला दिया है, जो आगे की बातचीत को अलग दिशा दे सकता है.
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अगर नहीं हुआ समझौता तो?
अगर निर्धारित समय सीमा तक कोई समझौता नहीं होता, तो पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक बाजारों, खासकर तेल की कीमतों और निवेश माहौल पर पड़ेगा. वहीं, अगर किसी तरह की डील होती है, तो यह क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है. फिलहाल, दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस कूटनीतिक और सैन्य टकराव पर टिकी हैं, जहां आने वाले कुछ दिन बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं.