GST 2.0 से पहले 6 लाख कारें फंसी! कंपनियों को बड़े नुकसान का डर, सरकार से लगाई गुहार
देश में जीएसटी में बड़े बदलाव की तैयारी है, लेकिन ऑटो इंडस्ट्री चिंतित है। कंपनियों और डीलरों के पास लगभग 6 लाख अनसोल्ड गाड़ियां हैं, जिन पर अभी 1% से 22% तक का सेस लगता है. अगर यह सेस हटा दिया गया, तो उन्हें भारी नुकसान होगा. इसलिए, वे चाहते हैं कि जीएसटी कानून में बदलाव करके उन्हें क्रेडिट का विकल्प दिया जाए.
GST Revamp: देश में GST रिफॉर्म की कवायद तेज हो गई है. इसे लेकर एक ओर अनेक इंडस्ट्री और उपभोक्ता आशावादी रवैया अपनाए हुए हैं तो वहीं जीएसटी में बदलाव को लेकर ऑटो इंडस्ट्री में चिंता है. ET की रिपोर्ट के अनुसार कंपनियों और डीलरों के पास लगभग 6 लाख अनसोल्ड गाड़ियां हैं. यानी ये गाड़ियां बिकी नहीं है, जिन पर अभी 1 से 22 फीसदी तक का कंपेंसेशन सेस लगता है. अगर यह सेस हटा दिया जाता है, तो कंपनी को भारी नुकसान होगा. इसलिए, इंडस्ट्री चाहती है कि जीएसटी कानून में बदलाव करके उन्हें इस नुकसान की भरपाई के लिए क्रेडिट का इंतजाम किया जाए. जीएसटी काउंसिल की बैठक में 3-4 सितंबर को इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है. कंपनियों को उम्मीद है कि जीएसटी में सुधार से त्योहारी सीजन में मांग बढ़ेगी.
डीलरों के अनुमान के अनुसार, वर्तमान में पैसेंजर वाहनों का स्टॉक में करीब 6,00,000 से ज्यादा गाड़ियां मौजूद हैं. जिनकी इंवेंट्री 55 दिन पहुंच चुकी है. इंडस्ट्री के अनुसार औसतन हर महीने करीब 3,27,419 वाहन बेचे जाते हैं,
परेशानी की क्या है वजह?
GST की मौजूदा व्यवस्था में कारों पर 1 फीसदी से लेकर 22 फीसदी तक कंपेंसेशन सेस लगता है. जिस जीएसटी रिफॉर्म की बात सरकार कह रही है उसमें अब तक इससे संबंधित कोई बातें साफ नहीं हुई है कि आगे यह लगेगा भी या नहीं. इसलिए कंपनियों को डर है कि कंपेंसेशन सेस खत्म होने के बाद कंपनी को भारी नुकसान होगा.
कितनी घट सकती है GST की दर?
3-4 सितंबर को जीएसटी काउंसिल की होने वाली बैठक में इन सारे मुद्दों पर बातचीत हो सकती है. इसमें छोटे कारों पर टैक्स 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी किया जा सकता है, जबकि बड़ी कारों और एसयूवी पर टैक्स स्पेशल रेट यानी 40 फीसदी के अनुसार लगेगा. जीएसटी 2.0 में दो टैक्स स्लैब होंगे, एक 5 फीसदी और दूसरा 18 फीसदी. पुराने टैक्स को खत्म करके 12 और 28 फीसदी का टैक्स लगाया जाएगा. साथ ही टैक्स में कुछ छूट और अतिरिक्त टैक्स भी होंगे. महंगी गाड़ियों और लग्जरी सामानों पर 40 फीसदी टैक्स लगाया जा सकता है.
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की क्या है मांग?
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने सरकार से मांग की है कि वे जीएसटी (GST) और अन्य टैक्स के असंतुलन को ठीक करने के लिए कदम उठाएं. कंपनियों का कहना है कि जीएसटी में एडजस्टमेंट और फुल रिफंड की व्यवस्था होनी चाहिए. इसके अलावा, वे चाहते हैं कि केंद्र सरकार एक सिस्टम बनाए जो इंडस्ट्री को पूरी तरह से मुआवजा दे सके और संतुलन बनाए रखे.
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