डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड लो पर रुपया, 53 पैसा टूटकर 92.35 पर बंद; कच्चे तेल में उछाल और मिडिल ईस्ट टेंशन का असर

भारतीय रुपया सोमवार को डॉलर के मुकाबले अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण रुपया 53 पैसे टूटकर 92.35 प्रति डॉलर पर बंद हुआ.

डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो पर रुपया Image Credit: @Money9live

Rupees Fall all Time Low For US Dollar: सोमवार, 9 मार्च को भारतीय मुद्रा रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण रुपये पर भारी दबाव देखने को मिला. दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद रुपया 53 पैसे टूटकर 92.35 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ.

रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ रुपया

इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में सोमवार को रुपया 92.22 के स्तर पर खुला. शुरुआती कारोबार में इसमें हल्की मजबूती भी दिखी और यह कुछ समय के लिए 92.15 तक पहुंच गया, लेकिन इसके बाद लगातार गिरावट का दबाव बना रहा. पूरे सत्र में कमजोरी के बाद अंततः रुपया 92.35 प्रति डॉलर के नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ. इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया कमजोर हुआ था और 18 पैसे की गिरावट के साथ 91.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था.

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से बढ़ा दबाव

फॉरेक्स विशेषज्ञों के अनुसार रुपये की गिरावट का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी है. एशियाई कारोबार के दौरान क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 25 फीसदी तक उछाल देखा गया. वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव 15 फीसदी से ज्यादा बढ़कर लगभग 106.8 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने तेल बाजार को झकझोर दिया, जिसका सीधा असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ा.

मजबूत डॉलर और विदेशी निवेश की निकासी

मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी के मुताबिक, वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने के कारण डॉलर मजबूत हुआ है, जिससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना. डॉलर इंडेक्स, जो 6 प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को मापता है, 0.35 फीसदी बढ़कर 99.33 पर पहुंच गया. इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार पूंजी निकालना भी रुपये की कमजोरी का एक बड़ा कारण रहा. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को करीब 6,030.38 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की.

शेयर बाजार में भी भारी गिरावट

रुपये की कमजोरी के साथ ही घरेलू शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 1,352.74 अंक गिरकर 77,566.16 पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 422.40 अंक टूटकर 24,028.05 के स्तर पर आ गया. वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता ने बाजार के मूड को कमजोर बनाए रखा.

आगे भी दबाव में रह सकता है रुपया

विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, महंगे कच्चे तेल और मजबूत डॉलर के चलते निकट भविष्य में रुपये पर दबाव बना रह सकता है. हालांकि अगर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बाजार में हस्तक्षेप करता है तो निचले स्तरों पर रुपये को कुछ समर्थन मिल सकता है. विश्लेषकों का अनुमान है कि आने वाले सत्रों में USD-INR की स्पॉट रेंज 92 से 92.80 के बीच रह सकती है.

विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

हालांकि एक सकारात्मक खबर यह भी है कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. रिजर्व बैंक के मुताबिक 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में देश का फॉरेक्स रिजर्व 4.885 अरब डॉलर बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. यह मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भविष्य में रुपये को स्थिर रखने में मददगार साबित हो सकता है.

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